Annapurna Jayanti 2021 in Hindi | अन्‍नपूर्णा जयंती कथा व शुभ मुहूर्त एवं महत्‍व जाने

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Annapurna Jayanti 2021 in Hindi | अन्‍नपूर्णा जयंती कथा व शुभ मुहूर्त,महत्‍व जाने | Margashirsha Purnima in Hindi ! Annapurna Katha in Hindi | Annapurna Jayanti Date and time in Hindi |अन्‍नपूर्णा व्रत कथा

अन्‍नपूर्णा जयंती प्रविवर्ष मार्गशीर्ष माह की शुक्‍लपक्ष की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। अर्थात मार्गशीर्ष महीने के अंतिम दिन मनाई जाती है। इस दिन माता पार्वती की पूजा का विधान है क्‍यो‍ंकि माता पार्वती न ही देवी अन्‍नपूर्णा का रूप लिया था। जिसे अन्‍नपूर्णा जयंती के नाम से जाना जाता है। इस दिन स्‍त्रिया अपने पति की लम्‍बी आयु व पुत्र कामना के लिए व्रत भी रखती है। ऐसे में आप भी अन्‍नपूर्णा देवी का व्रत रखते है तो पोस्‍ट में बताई हुई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़कर अपना व्रत पूर्ण कर सकते है।

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अन्‍नपूर्णा जयंती का महत्‍व/ अन्‍नपूर्णा व्रत का महत्‍व

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Annapurna Vrat Katha in Hindi

इस जयंती को मनाने के पीछे अन्‍न को महत्‍व देना है अर्थात अनाज को बिना वजह सदपयोग नहीं करना चािहए केवल उसका उपयोग करना चाहिए। इस जयंती वाले दिन औरतो को अपने घरों की रसोईयों की साफ-साफाई का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए तथा उसकी पूजा करनी चाहिए। क्‍यो‍ंकि अन्‍नापूर्णा माता को रसोई की माता भी कहा जाता है।

मान्‍यताओ के अनुसार इस दिन किसी गरिब को अन्‍न का दान करना चाहिए। जिससे अन्‍नपूर्णा माता आप पर सदैव प्रसन्‍न रहेगी। यह जयंती लगभग पूरे भारतवर्ष में मनाई जाती है किन्‍तु सभी जगहो अपनी-अपनी रिवाजो के अनुसाई मनाते है। इस जयंती वाले दिन मार्गशीर्ष स्‍नान पूर्णिमा Margashirsha Snan Purnima भी होती है।

अन्‍नपूर्णा जयंती 2021 तिथि (Annapurna Jayanti in Hindi)

हिन्‍दी पंचाग के अनुसार अन्‍नपूर्णा जयंती प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। जो की इस वर्ष 19 दिसबंर 2021 रविवार के दिन पड़ रही है

अन्‍नपूर्णा जयंती पूजा विधि/अन्‍नपूर्णा व्रत की पूजा विधि

  • इस जयंती वाले दिन व्‍यक्ति को प्रात: जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर सूर्य भगवान को जल चढ़ाऐ। जिसके बाद पीपल व तुलसी के पेंड़ में भी चढ़ाऐ।
  • जिसके बाद अपनी रसोई की अच्‍छे से सफाई करे और पूजा के लिए स्‍थान बनाऐ। इस स्‍थान पर गंगाजल का छिड़काव करे।
  • जिसके बाद हल्‍दी, कुमकुमं, पुष्‍प, चावल, चन्‍दन, अक्षत, रौली व मौली आदि से रसोई के चूल्‍हे की पूजा करे।
  • जिसके बाद एक चौकी पर माता अन्‍नपूर्णा (देवी पार्वती) की प्रतिमा को स्‍थापित करे और सूत का धागा लेकर उसमें 17 गांठे लगे। माता को 10 दूर्वा औश्र 10 अक्षत अर्पित करे।
  • जिसके बाद माता अन्‍नपूर्णा के व्रत की कथा पढ़े तथा आप से हुई गलती के लिए क्षमा याचना करे। और माता को प्रसाद चढ़ाऐ।
  • जिसके बाद उस धागे को सभी परिवार के सदस्‍यो के हाथों पर बाध देना है।

अन्‍नपूर्णा जयंती कथा/ अन्‍नपूर्णा व्रत कथा (Annapurna Katha in Hindi)

शिव पुराण के अनुसार जब पृथ्‍वी पर अन्‍न व जल समाप्‍त हो गऐ और चारो तरफ अकाल पड़ गया तथा पृथ्‍वी वासी हाहाकार मचाने लगे। तो इनकी इस विड़बना को देखकर सभी देवता भगवान ब्रह्मा जी और विष्‍णु जी के पास गऐ। और कहा यदि भगवान मावत जात‍ि को जल व अन्‍न नहीं दिया जाएगा तो वह समाप्‍त हो जाएगी। और पृथ्‍वी पर कोई भी जीवन नहीं रहेगा।

देवताओं की बात सुनरक भगवान बोले की इनकी समस्‍या का समाधान केवल भगवान शिवजी और माता पार्वती ही कर सकते है तो आप हमारे साथ कैलाश पर्वत पर चले। जिसके बाद भगवान विष्‍णुजी और ब्रह्माजी व सभी देवता मिलकर भगवन शंकर जी के पास आऐ तो देखा की भवगान शिवजी तो योग निन्‍द्रा में है।

सभी ने मिलकर उनको योग निंद्रा से जगाया और सारा वृत्तां सुनाया तब शिवजी ने पूरी पृथ्‍वी को अपने निरक्षण में लिया। उसी समय माता पार्वती ने देवी अन्‍नपूर्णा का स्‍वरूप लिया जिसके बाद भगवन शिवजी ने अन्‍नपूर्णा देवी से चावल भिक्षा के रूप में लिए। और सभी मानव जाती को खिलाए।

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जिसके बाद सभी धरती के वासी प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अन्‍नपूर्णा जयंती के रूप में मनाते है। तथा देवी अन्‍नपूर्णा का व्रत भी करते है। ताकी उनके घर में कभी भी किसी वस्‍तु की कमी नहीं रहे। इस जयंती वाले दिन माता अन्‍नपूर्णा की चालीसा पढ़नी चाहिए।

अन्‍नपूर्णा माता चालीसा (Annapurna Jayanti)

दोहा:- विश्‍व्श्रेवर पदपदम की रज निज शीश लगाय। अन्‍नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय।।

चौपाई:-

नित्‍य आनंद करिणी माता, वर अरू अभय भाव प्रख्‍याता। जय ! सौंदर्य सिंधु जग जननी, अखिल पाप हर भव-भय हरनी।।

श्रवेत बदन पर श्रवेत बसन पुनि, संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि ।। काशी पुराधीश्रवरी माता, माहेश्रवरी सकल जग त्राता ।।

वृषभारूढ़ नाम रूद्राणी, विश्‍व विहारिणि जय ! कल्‍याणी ।। पतिदेवता सुतीत शिरोमणि, पदवी प्राप्‍त कीन्‍ह गिरी नंदिनि।।

पति विछोह दु:ख सहि नहिं पावा, योग अग्नि तब बदन जरावा।। देह तजत शिव चरण सनेह, राखेहु जात हिमगिरि गेहू।।

प्रकटी गिरिजा नाम धरायों, अति आनंद भवन मँह छायों।। नारद ने तब तोहिं भरमायहु, ब्‍याह करन हित पाठ पढ़ायहु।।

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ब्रहमा वरूण कुबेर गनाये, देवराज आदिक कहि गाये।। सब देवन को सुजस बखानी, मति पलटन की मन मुॅह ठानी।।

अचल रहीं तुम प्रण पर धन्‍या, कीहनी सिद्ध हिमाचल कन्‍या।। निज कौ तब नारद घबराये, तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाऐ।।

करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ, संत बचन तुम सत्‍य परेखेहु।। गगनगिरा सुनि टरी न टारें, ब्रह्मा तब तुव पास पधारे।।

कहेउ पुत्रि वर मॉगु अनूपा, देहॅू आज तुव मति अनुरूपा।। तुम तप कीन्‍ह अलौकिक भारी, कष्‍ट उठायहु अति सुकुमारी।।

अ‍ब संदेह छॉडि़ कछु मोसों, है सौगंध नहीं छल तोसों।। करत वेद विद ब्रह्मा जानहु, वचन मोर यह सांचा मानहु।।

तजि संकोच कहहु निज इच्‍छा, देहौं मैं मनमानी भिक्षा।। सुनि ब्रह्मा की मधुरी बानी, मुख सों कछु मुसुकाय भवानी।।

बोली तुम का कहहु विधाता, तुम तो जगके स्रष्‍टाधाता।। मम कामना गुप्‍त नहिं तोंसों कहवावा चाहहु का मोंसो।।

दक्ष यज्ञ महँ मरती बारा, शंभुनाथ पुनि होहिं हमारा।। सो अब मिलहिं मोहिं मनभाये, कह‍ि तथास्‍तु विधि धाम सिधाये।।

तब गिरिजा शंकर तव भयऊ, फल कामना संशयो गयऊ।। चन्‍द्रकोटि रवि कोटि प्रकाशा, तब आनन महँ करत निवासा।।

माला पुस्‍तक अंकुश सोहै, कर मँह अपर पाश मन मोहै।।

अन्‍नपूर्णे ! सदापूर्णे, कृपा सागरी क्षेमंकरि मॉ, भव विभूति आनंद भरी मॉं।।

कमल विलोचन विलसित भाले, देवि कालिके चण्डि़ कराले।। तुम कैलास मांहि है गिरिजा, विलसी आनंद साथ सिंधुजा।।

स्‍वर्ग महालक्ष्‍मी कहलायी, मर्त्‍य लोक लक्ष्‍मी पदपायी।। विलसी सब मँह सर्व सरूपा, सेवत तोहिं अमर पुर भूपा।।

जो पढि़ह‍हिं यह तव चालीसा, फल पाइंहहि शुभ साखी ईसा।। प्रात समय जो जन मन लायो,पढि़ह‍हिं भक्ति सुरूचि अघिकायो।।

स्‍त्री कलत्र पति मित्र पुत्र युत, परमैश्रवर्य लाभ लहि अद्धुत।। राज विमुख को राज दिवावै, जस तेरो जन सुजस बढ़ावै।।

पाठ महा मुद मंगल दाता, भक्‍त मनोवांछित निधि पाता।।

दोहा:-

जो यह चालीसा सुभग, पढि़ नावैंगे माथ। तिनके कारज सिद्ध सब, साखी काशी नाथ।।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपकों अन्‍नपूर्णा जयंती के बारे में कुछ महत्‍वपूर्ण जानकारी बताई है। यदि आपको हमारे द्वारा बताई हुई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

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प्रश्‍न:- अन्‍नपूर्णा जयंती कब है

उत्तर:- 19 दिसबंर 2021 रविवार

प्रश्‍न:- अन्‍नपूर्णा जयंती पर किस देवी की पूजा की जाती है।

उत्तर:- माता पार्वती (अन्‍नपूर्णा)

प्रश्‍न:- हिन्‍दी पंचाग के अनुसार अन्‍न्‍पूर्णा जयंती कब मनाई जाती है

उत्तर:- मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन

प्रश्‍न:- अन्‍नपूर्णा जयंती वाले दिन दूसरा कौनसा पर्व होता है

उत्तर:- मार्गशीर्ष पूर्णिमा

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