Baikunth Chaturdashi in Hindi | बैकुठं चतुर्दशी व्रत कथा व पूजा विधि यहा से जाने

Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha in Hindi बैकुठं चतुर्दशी का व्रत प्रतिवर्ष कार्तिक मास की शुक्‍लपक्ष की चतुर्दशी को किया जाता है। शिव पुराण व विष्‍णु पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्‍णु जी की पूजा कमल के पुष्‍पो से कि जाती है। पुराणों के अनुसार वर्ष की सभी चतुर्दशीयो में से सबसे बड़ी चतुर्दशी कार्तिक माह की बैकुठं चतुर्दशी का माना गया है। यदि इस संसार में जो कोई स्‍त्री व पुरूष बैकुठं चतुर्दशी का व्रत पूरी श्रद्धा के अनुसार रखता है उसे बैकुठं लोक मिलता है। ऐसे में आप भी बैकुठं चतुर्दशी का व्रत रखते है तो पोस्‍ट में बताई हुई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़कर आप अपना व्रत पूर्ण कर सकती है। तो पोस्‍ट के अंत तक बने रहे। बैकुठं चतुर्दशी व्रत कथा

Baikunth Chaturdashi in Hindi (बैकुठं चतुर्दशी का महत्‍व)

आपकी जानकारी के लिए बता दे सनातन धर्म में बैकुंठ चतुर्दशी का विशेष महत्‍व है। कहा जाता है की जो कोई भी इस दिन भगवान विष्‍णु जी की पूजा पूर्ण विधिवत रूप से करता है उसके ऊपर सदैव भगवान हरि की कृपा बनी रहती है। पुराणों व शास्‍त्रों के अनुसार भगवान विष्‍णु जी चातुर्मास तक (चार महीने के लिए) इस सृष्टि का कार्यभार भगवान शिवजी को सौपकर स्‍वयं विश्राम (निद्रा) करते है। तथा चार माह पूर्ण होने के बाद भगवान विष्‍णु जी कार्तिक मास Baikunth Chaturdashi importanc in Hindi की शुक्‍लपक्ष की एकादशी अर्थात देवउठनी ग्‍यारस को निद्रा से जागते है।

जिसके बाद वो भगवान शिवजी जी की भ‍क्ति में लग जाते है कहा जाता है की बैकुंठ चतुर्दशी वाले दिन भगवान शिवजी और विष्‍णु जी का एक ही रूप होता है। इसी लिए इस दिन संसार का जो कोई स्‍त्री व पुरूष इस दिन बैकुंठ चतुर्दशी का व्रत रखता है। उसके लिए सदैव स्‍वर्ग लोक के द्वार खुले रहते है। इसी कारण वश बैकुंठ चतुर्दशी का व्रत शैवों व वैष्‍णवों धर्म के लिए पारस्‍परिक एकता का प्रतीक है।

बैकुठं चतुर्दशी व्रत कथा

बैकुंठ चतुर्दशी व्रत कब है Vaikunth Chaturdashi Vrat Kab Hai

हिंदी पंचांग के अनुसार यह चतुर्दशी तिथि हर साल कार्तिक मास (Kartik Maas) की शुक्‍ल पक्ष में चतुर्दशी (चौदश) तिथि को होती है। साल में 26 नवंबर 2023 रविवार के दिन बैकुंठ चतुर्दशी होती है

बैकुंठ चतुर्दशी व्रत की त‍िथि (vaikunth Chaturdashi Date and time)

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:- शाम 05:22 मिनट पर (25 नवंबर 2023)
  • चतुर्दशी तिथि समाप्‍त:-दोपहर 03:53 मिनट पर (26 नवंबर 2023 को)
  • कार्तिक मास चतुर्दशी तिथि:- 26 नवंबर 2023 रविवार

Baikunth Chaturdashi Puja ka Shubh Muhurat चतुर्दशी पर पूजा का मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त:- सुबह 11:47 मिनट से दोपहर 12:29 मिनट तक (26 नवंबर)
  • निशिता मुहूर्त:- रात्रि के 11:42 मिनट से प्रात: 12: 35 मिनट तक

बैकुंठ चतुर्दशी व्रत पूजा विधि (Baikunth Chaturdashi Puja Vidhi)

  • कार्तिक शुक्‍लपक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को प्रात: ब्रह्मामुहूर्त में उठकर गंगाजल से स्‍नान करे। जिसके बाद साफ वस्‍त्र धारण करे।
  • स्‍नान आदि से निर्वत होकर भगवान सूर्य को पानी चढाकर पीपल व तुलसी के पेड़ में पानी चढ़ाऐ। क‍हा जाता है की पीपल के वृक्ष में भगवान हरि का वास होता है।
  • इसके बाद शिवालय में जाकर भगवान भोले नाथ को जल चढाऐ। और वैकुंठ चतुर्दशी व्रत का संकल्‍प ले।
  • शाम के समय जब पूजा करे तो भगवान विष्‍णु जी की पूजा में रौली, मौली, चावल, नैवेद्य, पंचतत्र, 108 कमल या फिर कोई भी पुष्‍प, फल आदि से पूजा करे।
  • जिसके बाद भगवान भोलेनाथ की पूजा करे और हाथ जोड़कर भगवान से अपनी मनोकामना पूर्ण करने की विनती करे।
  • इसके बाद बैकुंठ चौदस व्रत की कथा सुने और आरती करे। आरती करने के बाद प्रसाद चढाकर सभी को वितरण करे।
  • जिसके बाद दूसरे दिन प्रात: स्‍नान आदि से निर्वत होकर भगवान शिवजी की पूजा करे और किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर यथा शक्ति दान दक्षिणा दे।
  • जिसके बाद स्‍वयं इस व्रत का पारण करे।
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नोट:- बैकुंठ चतुर्दशी व्रत की पूजा करते समय इस महामंत्र का जाप करे। जो की इस प्रकार है।

विना हो हरिपूजा तु कुर्याद रूद्रस्‍य चार्चनम्, वृथा तस्‍य भवेत्‍पूजा सत्‍यमेतद्वचो मम।। इस महामंत्र का जाप तीन बार करे।

Baikunth Chaturdashi Vrat Katha (बैकुंठ चतुर्दशी व्रत की कथा)

एक बार महर्षि नारद जी देवलोक से पृथ्‍वी लोक पर भ्रमण करने हेतु आऐ। और पृथ्‍वी लोक में काफी समय बीताकर वो सीधे बैकुंठ धाम पहुच गऐ। वहा उन्‍होने भगवान विष्‍णुजी को प्रमाण किया त‍ब विष्‍णु जी ने उनके आने का कारण पूछा। त‍ब नारद जी ने कहा हे प्रभु आपने तो कृपा के सागर है। आप तो भक्‍तो पर दयाले रहते है उनकी सदैव रक्षा करते है। और उनको मुक्‍त‍ि देते है। इसलिए आप मुझे कोई ऐसा उपाय बताइऐ जिससे भक्ति करके सीधे मुक्ति पा सके।

नारद जी की बात सुनकर विष्‍णु जी बोले हे नारद मेरी बात सुनों यदि इस पूरे संसार में कोई भी स्‍त्री पुरूष या देवगण कार्तिम माह की शुक्‍लपक्ष की चतुर्दशी (चौदस) का व्रत रखेगा। और विधिवत रूप से पूजा अर्चना करेगा उसके लिए सदैव स्‍वर्ग लोक के मार्ग खुले रहेगे। जिसके बाद विष्‍णु जी जय और विजय को बुलाकर उन्‍हे आदेश देते है की कार्तिक चतुर्दशी के दिन स्‍वर्ग के द्वार खुले रखना। और नारद जी से कहा हे महर्षि इस चतुर्दशी वाले दिन जो कोई व्‍यक्ति श्रद्धा भाव से मेरी अर्चना करेगा उसको बैकुंठ धाम प्राप्‍त होगा।

वैकुंठ चौदस व्रत कथा (Baikunth Chaturdashi Story in Hindi)

पौराणिक मान्‍यताओ के अनुसार एक बार भगवान विष्‍णु जी भगवान शिवजी की पूजा के लिए पृथ्‍वी लोक पर काशी विश्‍व नाथ मंदिर आऐ। और वहा पर मणिकर्णिका नामक घाट पर स्‍नान आदि करके 1000 स्‍वर्ण कमल पुष्‍पो से भगवान विश्‍वनाथ की पूजा की। जब वह अभिषेक कर रहे थे तो शिवजी ने विष्‍णु जी की परीक्षा लेने के लिए 1000 पुष्‍पो में से एक पुष्‍प कम कर दिया। जब भगवान विष्‍णु जी शिवजी की पूजा के लिए पुष्‍प चढ़ाने लगे तो उन्‍हे एक पुष्‍प कम लगा। तो वो सोचने लगे की मैं अब फूल कहा से लाऊ क्‍यो न मै मेरी एक आंख चढ़ा देता हूँ। क्‍योकि मेरी दोनो आंखे भी तो कमल नयन और पुंडरीकाक्ष है। यही सोचकर भगवान विष्‍णु जी जैसे ही आंखे निकालने लगे तो भगवान शिवजी प्रकट हो गऐ।

और बोले हे विष्‍णु जी इस पूरे संसार में तुम्‍हारे जैसा कोई भी भक्‍त नही है। और इसी लिए आज से कार्तिक की चौदस बैंकुठ चतुर्दशी के नाम से जानी जाऐगी। और इसं संसार में श्रद्धा भाव से जो कोई व्रत करेगा उसे बैकुंठ धाम प्राप्‍त होगा। यह कहते हुए भगवान विष्‍णु जी को सुदर्शन चक्र प्रदान किया। और कहा इस सुदर्शन में करोड़ो, अरबो, सूर्यो की कांति के समान शक्ति है। जिसके बाद भगवान विष्‍णु जी ने कहा इस दिन मेरे सच्‍चे भक्‍तो के लिए स्‍वर्ग लोक के द्वार खुले रहेगे।

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कार्तिक चतुद्रशी व्रत कथा Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha in Hindi

एक दूसरी कथा के अनुसार किसी समय में एक धनेश्रवर नामक ब्राह्मण था, जो बहुत बुरे कार्य करता रहता था। उसके पूरे जीवन भर अधिकतर पाप कुमाया एक दिन वह गोदावरी नदीं में स्‍नान के लिए घर से जा रहा था। जिस दिन वह गोदावरी नदी में स्‍नान के लिए आया उस दिन कार्तिक मास की शुक्‍ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि‍ होने के कारण नदी में पहले से बहुत सारे भक्‍त जन स्‍नान आदि करके पूजा-अर्चना कर रहे थे। ब्राह्मण ने भी उनके देखे पहले स्‍नान किया और उसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा से करी।

जब उस ब्राह्मण ने अन्‍य सभी भक्‍तों के पैर छुए और आशीवार्द लिया तो उसको भी उसके पापों से मुक्ति मिल गई। जब धनेश्रवर की मृत्‍यु हुई तो यमराज जी उसे नरक में ले गए और वहा पर छोड़ दिया। तब भगवान विष्‍णु जी ने कहा की यह पहले बहुत पापी मानव था पर इसने कार्तिक मास की शुक्‍ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि जिस दिन बैकुंठ चतुर्दशी थी। इसने भी अन्‍य शेष भक्‍तों के साथ नदी में स्‍नान किया और पूजा पाठ किया। जिसके परिणाम स्‍वरूप इसको सभी पापों से मुक्ति मिल गई, उसके बाद उस ब्राह्मण को नरक से दुबारा स्‍वर्ग भेजा गया था।

डिस्‍कलेमर:- दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको बैकुंठ चतुर्दशी Vaikunth Chaturdashi Vrat Katha in Hindi के बारे में विस्‍तार से बताया है। जो आपको पंचाग व मान्‍यताओं के आधार पर लिखकर बताया है आपको बताना यह आवश्‍यक है की Onlineseekhe.com किसी प्रकार की पुष्टि नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए किसी पंडित, विद्धान के पास जाएगा। यदि हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

यह भी पढ़-

प्रश्‍न:- 2023 में वैकुंठ चतुर्दशी कब है।

उत्तर:- 26 नवंबर 2023 रविवार

प्रश्‍न:- प्रतिवर्ष बैकुंठ चतुर्दशी कब होती है।

उत्तर:- कार्तिक माह की शुक्‍लपक्ष की चौदस (चतुर्दशी) को

प्रश्‍न:- बैकुंठ चतुर्दशी का महत्‍व क्‍या है।

उत्तर:- कहा जाता है की इस व्रत को रखने से व्‍यक्ति अपने सभी पापों से मुक्‍ति पाकर बैकुंठ धाम को जाता है।

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