Dol Ekadashi Vrat Katha in Hindi | पद्मा/परिवर्तिनी व जलझूलनी ग्‍यारस व्रत की कथा व पूजा विधि यहा से पढ़े

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दोस्‍तो आपको बता दे की बहुत जल्‍दी ही डोल ग्‍यारस का व्रत आने वाला है। वैसे तो वर्ष की कुल 24 एकादशी (ग्‍यारस) में से सबसे महत्‍वपूर्ण भाद्रपद महीने की शुक्‍लपक्ष की एकादशी को डोल ग्‍यारस आती है। पुराणों व ग्रथो में कहा गया है। की आषढ़ महीने में अपने शेष शैया पर निद्रा करते हुए भगवान विष्‍णु जी भाद्रपद माह शुक्‍लपक्ष की एकादशी को करवट बदलते है। जिस कारण इसे पद्मा एकादशी और परिवरर्तनी एकादशी कहते है।

यह एकादशी श्री कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के 18 दिन बाद आती है। इस बार पद्मा एकादशी 17 सितम्‍बर 2021 शुक्रवार के दिन है। इसी दिन की माता यशोदा नें भगवान कृष्‍ण जी का कुऑं पूजन किया था तथा पहली बार पालने में झूला झुलाया था। जिस कारण इस एकादशी को जल झूलनी ग्‍यारस भी कहा जाता है। इस दिन स्‍त्री व पुरूषो अपने बच्‍चो की लम्‍बी उम्र की कामना व अपनी सभी मनोकामनाए पूर्ण करने के लिए डोल एकादशी का व्रत (Parivartini Ekadashi Vrat) रखते है। ऐसे में अगर आप भी जलझूलनी ग्‍यारस का व्रत रखते है इस आर्टिकल के माध्‍यम से बताई हुई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़कर आप अपना यह व्रत पूर्ण कर सकते है।

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डोल एकादशी का महत्‍व (Jal julni Gyaras ka Mahatva)

आपको बता दे की इस बार डोल एकादशी 17 सितम्‍बर 2021 के दिन है। यह एकादशी सभी 24 एकादशीयो में से सबसे बडी़ है। जिसे करने से मनुष्‍य के सभी पाप मिट जाते है तथा उसके सभी मनोरथ पूरे होते है। पद्मा एकादशी इसके दूसरे दिन वामन द्वादशी का व्रत आता है। पुराणों व ग्रथो में जलझूलनी ग्‍यारस की तुलना अश्रव मेघ यज्ञ से किया है। इस व्रत वाले दिन भगवान विष्‍णु जी की और बालगोपाल कृष्‍ण जी की पूजा की जाती है। यह व्रत कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी के 18 दिनों के बाद आता है।

जल झूलनी ग्‍यारस का शुभ मुहूर्त 2021 (Parivartini Ekadashi ka Shub Muhurt)

भाद्रपद माह की शुक्‍लपक्ष की परिवर्तनी एकादशी का शुभ मुहूर्त की शुरूआत 16 सितम्‍बर 2021 गुरूवार के दिन प्रात: 09:40 मिनट पर शुरूआत हो जाएगी। तथा 17 सतिम्‍बर 2021 शुक्रवार के दिन समापन हो जाएगी। व्रत रखने वाले सभी स्‍त्री व पुरूष इस शुभ मुहूर्त के बीच में व्रत पूजा कर सकते है।

जल झूलनी ग्‍यारस का व्रत रखने वाले सभी स्‍त्री व पुरूष व्रत का पारण (व्रत तोड़ने) खोलने का समय 18 सितम्‍बर 2021 यानी शनिवार के दिन प्रात:काल 6 बजकर 10 मिनट से लेकर 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्म के बीच में आप अपना व्रत का पारण कर सकते है।

पद्मा एकादशी व्रत की पूजा विधि (Dol Ekadashi Vrat Puja Vidhi in Hindi)

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  • जल झूलनी ग्‍यारस का व्रत (Padma Ekadashi Vrat) रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को प्रात:काल काल जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होना चाहिए।
  • इसके बाद भगवान सूर्य को पानी चढ़ाकर पीपल व तुलसी के पेड़ में पानी चढ़ाए।
  • जब भगवान कृष्‍ण जी को झूले में बैठाकर नगर के चारो ओर भ्रमण के लिए ले जाते है ताब उस झूले में बैठ गोपाल जी के भोग लगाए।
  • इसके बाद झूले के नीचे से तीन बार निकले और भगवान विष्‍णु जी (कष्‍णजी) का ध्‍यान करे।
  • जब झूला वापस मंदिर में आ जाऐ तो भगवान कृष्‍ण जी के दर्शन करके प्रसाद ग्रहण करे उसके बाद संंध्‍या से पहले व्रत का पारण करे।
  • ध्‍यान रहे की डोल ग्‍यारस के व्रत के अन्‍न नहीें खाना चाहिए। केवल फल, चांदी, साबुत दाने, सैवया आदि को उत्तम माना गया है।
  • इस दिन जो भी मनुष्‍य पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्‍णु जी के लिए यह व्रत रखता है। तो उसको अपने द्वारा किये गए सभी पापो से मुक्ति मिल जाती है।

जल झूलनी ग्‍यारस कैसे मनाते है (How to Celebrate Jal Jhulani Gyaras)

  • खात तौर पर डोल ग्‍यारस/पद्मा/परिवर्तनी/ जल झूलनी ग्‍यारस भारत के उत्तरी राज्‍यों में बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है।
  • इस दिन देश के सभी मंदिराे को बहुत ही अच्‍छा सजाया जाता है। साथ ही कान्‍हाजी के मूर्ति को पूरा श्रृंगार किया जाता है।
  • साथ ही बहुत ही सुन्‍दर झूला डालकर उसमें लड्डू गोपाल जी काे झूलाते है। तथा डोलो में बाल गोपाल को बिठाकर उसे पूरे शहर, गॉंव, नगरो के चारों तरफ बैड़ बाजौ के साथ सुन्‍दर झांकी निकाली जाती है।
  • सभी व्‍यक्ति इस सुन्‍दर डोला के नीचे से निकलकर अपनी मन्‍नते मागंते है।
  • इसके बाद गोपाल जी की झांकी को किसी पवित्र नदी या तालाब के किनारे ले जाकर बाल गोपाल को स्‍नान कराते है। तथा झांकी में मौजूद सभी लोग भी स्‍नान करते है।
  • स्‍नान कराने के बाद बालगोपाल जी को नाव में बैठाकार नदी के सभी घाटो पर घुमाया जाता है कृष्‍ण जी की इस झांकी को देखने के लिए नदीयो के सभी घाटो पर बहुत ज्‍यादा भीड़ लगी रहती है।
  • कम से कम 3 या 4 घंटे की झांकी निकालने के बाद वापर बाल गोपल जी को मंदिर में लाकर उसकी जगह पर स्‍थापित कर देते है।
  • इसके बाद सभी भक्‍तो को प्रसाद वितरण किया जाता है। प्रसाद के रूप में धनिया की पजूरी, तुलसी, खीरा आदि दिऐ जाते है।
  • आपको बता दे डोल ग्‍यारस को उत्तर प्रदेश व मध्‍यप्रदेश राज्‍यो में बड़ी धूम-धाम से मनाया जात है।

डोल ग्‍यारस की कथा (Padma Ekadashi Vrat ki Katha)

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द्वापर युग में जब भगवान कृष्‍ण जी ने धरती पर धर्म की स्‍थापन के लिए जन्‍म लिया था। तब उनका जन्‍म एक कारागार में हुआ किन्‍तु अपनी माया के तहत वासुदेव जी के द्वारा गोकुल में जा पहुचे। गोकुल में बाबा नन्‍द के यहा पर आऐ और उसी समय माता यशोदा के जन्‍मी पुत्री के जगह स्‍वयं सो गए। माता यशोदा ने सोचा की मेरे को पुत्र रत्‍न की प्राप्‍ति हुई है।

जब कृष्‍ण जी 18 दिन के हो गऐ तब माता यशोदा ने पूरे घर को पवित्र कर भगवान के बालरूप अवतार का जलवा पूजन किया। तथा इसी दिन माता यशोदा ने पहली बार अपने बाल गोपाल कृष्‍ण जी को घर से बाहर निकाला था। इस दिन पूूरे गोकुल वासियो ने बड़ा ही जश्‍न मनाया और झांकी का आयोजन किया। इसी उपल्‍क्ष में तब से लेकर आज तक भगवान कृष्‍ण जी की जल झूलनी ग्‍यारस वाले दिन सुन्‍दर झांकीया निकाली जाती है।

दोस्‍तो आजा के इस लेख में हमने आपको डोल/पद्मा/परिवर्तनी एवं जल झूलनी एकादशी के बार में सम्‍पूर्ण जानकारी प्रदान की है। यदि आप सभी को हमारा यह लेख पंसद आया है तो लाइक करे व अपने मिलने वाले के पास शुयर करे। अगर आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कंमट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

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