Durga Navratri Vrat Katha In Hindi | श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा

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दोस्‍तो आज के इस आर्टिकल में Durga Navratri Vrat Katha के बारे में बताएगे। हमारे हिन्‍दु धर्म नवरात्रि के त्‍यौहार का बड़ा महत्‍व होता है जो की लगातार नौ दिनों तक नौ अलग-अलग देवीयों के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रि का व्रत लगभग सभी व्‍यक्ति करते है यदि कोई मनुष्‍य श्रद्धा भाव व मनोरथपूर्ण से इस व्रत को रखते है उन सभी की इच्‍छा पूरी होती है। इस व्रत के करने से पुत्र चाहने वालो को पुत्र, सुख चाहने वाले को सुख, धन चाहने वाले को धन, वि़द्या चाहने वाले को विद्या प्राप्‍त होती है। और मनुष्‍य की सभी विपत्तियां दूर हो जाती है। इस व्रत को करने वाले एक समय भोजन करते है।

यह व्रत चैत्र मास की शुक्‍लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर नवमी तक होता है। इस नवमी का राम नवमी भी कहा जाता है जो की इस बार 02 अप्रैल 2022 शनिवार के दिन से लेकर 10 अप्रैल 2022 तक नवरात्रि का त्‍यौहार रहेगा। समाप्‍त होने की तिथि के दूसरे दिन दशमी होती है। ऐसे में आप भी नवरात्रि का व्रत रखते है तो आर्टिकल में दी गई व्रत कथा व पूजा विधि काे पढ़कर अपना व्रत पूर्ण कर सकते है। तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

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मॉ दुर्गा की उत्‍पत्ति कैसे हुई

maa durga navratri vrat kathan

कई हजार वर्षो पहले की बात है एक राज्‍य में महिषासुर नाम का राक्षस राज करता था उसका आधा शरीर राक्षस का और आधा भैसे का था। उस राक्षस ने कई हजार वर्षो तक बह्ममा जी की घोर तपस्‍या की उसकी इस कठिन तपस्‍या से बह्माजी प्रसन्‍न हो गऐ। और महिषासुर से कहा की मैं तुम्‍हारी तपस्‍या से प्रसन्‍न हू। मांगो क्‍या वरदान मागना चाहते हाे। उस राक्षस ने कहा हे प्रभु मुझे ऐसा वरदान दो की तीनो लोको में मुझे कोई भी देवता या मानव ना मार सके। बह्मजी ने उस राक्षस को ऐसा ही वरदान दे दिया। बह्माजी से ऐसा वरदान पाकर महिषासुर बहुत ही घमंड़ी और अत्‍याचारी बन गया। उसने देवताओ पर आक्रमण करके इन्‍द्र को हराकर उसके सिहांसन पर बैठ गया। सभी देवतागण उस राक्षस से परेशान होकर सीधे बह्माजी, विष्‍णुजी, शिवजी की शरण में गऐ आप बीती बतायी।

देवताओ की सहायता के लिए बह्मजी, विष्‍णुजी व शिवजी ने मिलकर एक ऐसी देवी शक्ति का निमार्ण किया जिसे सब आदि शक्ति के नाम से जानते है। फिर सभी देवतागण मिलकर मॉं दुर्गा को अस्‍त्र-सस्‍त्र देकर महिषासुर का वध करने के लिए भेज दिया। मॉं दुर्गा उस राक्षस की नगरी की तरफ चली गई। जब महिषासुर को इस बात का पता चला तो वह उस देवी के सामने आ गया और देवी को देखकर कहा आप मुझ से विवाह करोगी।

यह सुनकर मॉ दुर्गा ने उस राक्षस से कहॉ अगर तुम मुझे युद्ध में हरा देते हो तो मैं तुमसे विवाह कर लूगी। यह सुनकर महिषासुर युद्ध के लिए तैयार हो गया। दोनाे मे भयकंर युद्ध शुरू हो गया महिषासुर काम,मोह,कोध्र,लाेभ के आधिन हो गया और असका विवेक नष्‍ट हो गया। मॉं दुर्गा और महिषासुर के बीच लगातार 10 दिनो तक घमासान युद्ध हुआ। मॉं आदि शक्ति ने महिषासुर के सभी अस्‍त्र व सस्‍त्र को नष्‍ट करके उसका वध कर दिया। और देवताओ को उस राक्षस से भय मुक्‍त करके उनकी रक्षा की तब सभी देवतााओ ने मॉं के उपर से फूलाे की बौछार कर दी और माता की जय कार की। तब से लेकर आज तक लोग Durga Navratri Vrat Katha नवरात्रि में करते है।

नवरात्रि घटस्‍थापना शुभ मुहूर्त (Chaitra Navratri 2022)

नवरात्रि प्रतिपदा तिथ‍ि की शुरूआत 01 अप्रैल 2022 शुक्रवार को रात्रि के 11:53 मिनट पर शुरू हो जाएगी। और 01 अप्रैल 2022 शरिवार को 11:58 पर समाप्‍त हाे जाएगी। और आप नवरात्रि व्रत पूजा के लिए घट की स्‍थापना 02 अप्रैल 2022 को प्रात: 06:10 मिनट से लेकर 08:31 मिनट के बीच में कर सकते है। जो की कुल अवधि 02 घण्‍टे और 21 मिनट ही है। ज्‍योतिषों व पंडितों के अनुसार यह मुहूर्त अति शुभ माना गया है जिसके बाद कोई मुहूर्त नहीं है तो कृपा करके आप इस शुभ मुहूर्त के बीच में पूजा के लिए घटस्‍थापना करे।

दुर्गा पूजन घट स्‍थापना के लिए सामग्री

Durga Navratri Vrat Katha
Durga Navratri Vrat Katha

Durga Navratri Vrat Katha में पूजा के लिए घट स्‍थापना की सभी सामग्री इस प्रकार है

  • तांबे के लौटे में गंगाजल
  • रौली एवं मौली
  • पान सुपारी
  • घी का दीपक व धूपबात्ती
  • मौसम के फल
  • फूल व माला
  • विल्‍पत्र
  • केले व आम के पत्ते
  • पंचरत्‍न व लाल वस्‍त्र
  • जौ
  • तेल सिन्‍दूर व कपूर
  • गाय का गोबर
  • गाय का दूध,घी,दही,
  • दुर्गा मॉ की प्रतिमा
  • कुमारी पूजन के वस्‍त्र
  • डाभ

नवरात्रि का व्रत करने की विधि

संसार का कोई भी प्राणी नवरात्रि का व्रत रखता है तो उसे सबसे पहले सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान करके, मन्दिर में जाकर या अपने घर पर किया घट स्‍थापना में बैठ जाना चाहिऐ। और मॉं दुर्गा का ध्‍यान करके यह कथा पढ़नी चाहिऐ या फिर किसी से सुननी चाहिऐ। यदि कोई कन्‍या Durga Navratri Vrat Katha करती है तो उसे यह बहुत ही फलदायक होता है। इस व्रत में उपवास या सागार का कोई नियम नही होता वाे एक समय भोजन कर सकती है।

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दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा

एक बार बृहस्‍पति जी ने ब्रह्माजी से कहा की भगवान आप तो बुद्धिमान, सर्वशास्‍त्र व सभी वेदों के ज्ञाता है। तो आप ही मुझे नवरात्रि के बारे में विस्‍तार से बता सकते है। इस संसार में लोग चैत्र, माघ, आश्विन व आषाढ़ मास के शुक्‍लपक्ष पर नवरात्रि का व्रत क्‍यों करते है और लोग इतनी उत्‍सुकता से इसे क्‍यों मनाते है। लोगो काे इस व्रत से क्‍या फल मिलता है।

बृहस्‍पति जी की बात सुनकर ब्रह्माजी ने कहा की इस संसार में जो भी मनुष्‍य Durga Navratri Vrat Katha करेगा उसकी सभी मनोकामनाऐ पूरी हो जाऐगी और वह व्‍यक्ति सदा सदा के लिए सुखो का आनंद लेगा। और उसके सभी पाप दूर हो जाऐगे।

सुमति का जन्‍म

ब्रह्माजी ने कहा बहुत पहले की बात है एक नगर जिसमे एक अनाथ व गरीब ब्रह्मण रहता था। वह मॉं दुर्गा का बहुत बड़ा भक्‍त था उसके एक सुन्‍दर सी कन्‍या ने जन्‍म लिया, जो बहुत ही सदगुणो वाली व ऐसी यथार्थ वाली सुमति नाम की थी। वह कन्‍या बाल्‍यवस्‍था में इस प्रकार बढ़ने लगी जैसे कोई शुक्‍लपक्ष में चन्‍द्रमा की कला बढ़ती है।

वह कन्‍या अपने पिता के साथ मॉ दुर्गा की पूजा अराधना व सदैव यज्ञ होम करती थी। एक दिन वह अपनी सभी सहेलियो के साथ खेलने लग गयाी और वह मॉं दुर्गा की पूजा में नही बैठ पाई, ऐसे में सुमति के पिता को बहुत क्रोध आया और उसने कहा की आज तुम मॉं भगवती की पूजा में उपस्थ्ति नही हुई। इस गलती के लिए में तुत्‍हारा विवाह एक कुष्‍ठ व दरिद्र मनुष्‍य के साथ करूगा।

सुमति का विवाह कुष्‍ठा के साथ

इस प्रकार क्रोधित पिता के वचन सुनकर वह बहुत ही दुखी हो गई । और उसकी शादी एक कुष्‍ठ रोगी के साथ कर दी । वह अपने पिता के कटु वचनो को सुनकर मन ही मन में विचार करने लगी मेरा बहुत ही खराब दुर्भाग्‍य है जो मुझे ऐसा पति मिला। इस तरह से अपने मन को दुखी करती हुयी अपने पति के साथ वन को चली गई। चलते चलते उन दोनो को रात हो गई तो वो उसी भयानक वन में सो गये।

durga navratra vrat katha
Durga Navratri Vrat Katha

सुमति की ऐसी स्थिति देखकर मॉ दुर्गा को दया आ गई और उसके पहले के पुण्‍य के प्रभाव से उसके सामने प्रकट हुई और सुमति से कही हे दीन ब्रह्मणी मांगो क्‍या वर मांगती हो। मैं तुम पर बहुत ही प्रसन्‍न हू। यह सुनकर उस ब्रह्मणी ने कहा की आप कौन है और मुझ पर क्‍यों प्रसन्‍न हो। यह सुनकर देवी ने कहा मैं आदि शक्ति हू मैं ही विद्या व सरस्‍वती हूँ और मैं तुम्‍हारे पूर्व जन्‍म के पुण्‍य के प्रसन्‍न हूँ।

सुमति के पिछले जन्‍म की कहानी

मैं तुम्‍हारे पूर्व जन्‍म की कहानी बताती हूॅ । पिछले जन्‍म में तुम एक भील की स्‍त्री थी और बहुत ही पतिव्रता थी । एक दिन तेरे पति निषाद ने चोरी कर ली और तुम्‍हे व तुम्‍हारे पति को सिपाहियों ने पकड़ कर जेल में बन्‍द कर दिया। उन लोगो ने तुम दोनो को खाना भी नही दिया इस तरह से 9 दिनो तक भुखी प्‍यासी रही और इसी प्रकार तुम्‍हारे Durga Navratri Vrat Katha के व्रत पूर्ण हो गये। उन दिनो में जो तुमने बिना कुछ या पिये व्रत किया है। मैं उसी से प्रसन्‍न होकर तुम्‍हें मनवांछित वर दे रही हॅू।

मॉं दुर्गा की बात सुनकर सुमति बोली माता यदि आप मुझ पर प्रसन्‍न है तो आप मेरे पति को कोढ़ से मुक्‍त कर दो व इनके सभी पापो को माफ कर दो। मॉ दुर्गा ने उसके पति के सभी पापो व कुष्‍ठो को दूर कर दिया। सुमति अपने पति की मनोहर देह को देखकर कहने लगी हे माता आप तो इस संसार की माता है, आप अपने भक्‍तो के दुखो को हरने वाली है। इन सभी बातो से माता ने प्रसन्‍न होकर सुमति से कहा की तुम्‍हारी कोख से एक अति सुन्‍दर व बुद्धिमान बालक जन्‍म लेगा। मॉ दुर्गा की यह बात सुनकर सुमति बहुत ही खुश हुई।

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इसके बाद माता दुर्गा ने कहा हे ब्राह्मणी ओर जो कुछ तेरी इच्‍छा हो वही मनवांछित वस्‍तु मॉग सकती हो। ऐसा भगवती दुर्गा का वचन सुनकर सुमति बोली की हे माता भगवती दुर्गे अगर आप मेरे ऊपर प्रसन्‍न है तो कृपा करके मुझे नवरात्रि विधि बताइए। हे दयावती जिस विधि से नवरात्र करने से आप प्रसन्‍न होती है। उस विधि और उसके फल को मेरे लिए विस्‍तार से वर्णन करे।

इस प्रकार ब्राह्मणी के वचन सुनकर माता दुर्गा (आदिशक्ति) कहने लगी हे ब्राह्मणी मै तुम्‍हारे लिए सम्‍पूर्ण पापों को दूर करने वाली नवरात्र व्रत विधि (Navratri Vrat Vidhi in Hindi) को बतलाती हॅूँ। जिसको सुनने से तमाम पापों से छूटकर मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। आश्विन महीने की शुक्‍लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर नौ दिनो तक विधि पूर्वक व्रत करे। यदि दिन भर का व्रत न कर सके तो एक समय का भोजन करे। पढ़े-लिखे ब्राह्मणो से पूछकर घट स्‍थापना करे।

जिसके बाद वाटिका बनाकर उसको प्रतिदिन जल से सीचें और महाकली, महालक्ष्‍मी, और महासरस्‍वती आदि की मूर्तियॉ बनाकर उनकी नित्‍य विधि सहित पूजा करेे। और पुष्‍पों से विधि पूर्वक अर्घ्‍य दे खासतौर पर कोई बिजौर के फूलो से अर्घ्‍य दे तो उसकी सभी इच्‍छाए पूर्ण् होती है।

जायफल से कीर्ति, दाख से कार्य की सिद्धि होती है ऑवले से सुख और केले से भूषण की प्राप्ति होती है। इस प्रकार फलों से अर्घ्‍य देखकर यथा विधि हवन करे। खांड़, घी, गेहॅू, शहद, जौ, तिल, बिम्‍ब, नारियल, दाख और कदम्‍ब आदि से हवर करे। खीर व चम्‍पा के पुष्‍पों से धन और पत्तौ से तेज और सुख की प्राप्ति होती है।

ऑवले की कीर्ति और केले से पुत्र प्राप्‍त होता है। कमल से राजा सम्‍मान और दाखों से सुख सम्‍पत्ति की प्राप्ति होती है। एवं खांड़, घी, नारियल, शहद, जौ, और तिल आदि से मनवांछित वस्‍तु प्राप्‍त होती है। व्र करने वाला मनुष्‍य इस विधान से होम कर आचार्य को अत्‍यन्‍त नम्रता के साथ प्रणाम करे और यज्ञ की सिद्धि के लिए उसे दक्षिणा दे।

इस महाव्रत को पहले बताई हुई विधि के अनुसार जो कोई करता है उसके सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते है। इसके तनिक भी संश्‍य नही है। इन नौ दिनों में जो कुछ दान आदि दिया जाता है उसकेा करोड़ो गुना मिलता है। इस संसार में जो कोई मनुष्‍य नवरात्रि का व्रत पूरे विध‍ि विधान व श्रद्धा भाव से करता है उसे अश्‍वमेघ यज्ञ का फल प्राप्‍त होता है।

हे ब्राह्मणी इस सम्‍पूर्ण कामनाओं काे पूर्ण करने वाले उत्तम व्रत को तीर्थ, मंदिर अथवा घर में ही विध‍ि के अनुसार करे। ब्रह्मा जी बोले कि हे बृहस्‍पते इस प्रकार ब्राह्मणी को व्रत की विधि और व्रत का फल बताकर देवी दुर्गा अन्‍तर्ध्‍यान हो गई। जो मनुष्‍य या स्‍त्री इस व्रत को भक्ति पूर्वक करता है। वह इस लोक में सभी सुख भोगकर अन्‍त में दुलर्भ मोक्ष को प्राप्‍त होता है।

हे बृहस्‍पतें यह दुर्लभ व्रत का माहात्‍म्‍य मैंने तुम्‍हारे लिए बतलाया है। ऐसा ब्रह्मा जी के वचन सुनकर बृहस्‍पत‍ि जी आनन्‍द के कारण रोमांचित हो गए और ब्रह्मा जी से कहने लेग हे ब्रह्मा जी- आपने मुझ पर अति कृपा की जो अमृत के समान इस न‍वरात्रि व्रत का (Navratri Vrat katha in Hindi) महात्‍म्‍य सुनाया है।

हे प्रभों आपके बिना और कौन इस माहात्‍म्‍य को सुना सकता है ऐसे में बृहस्‍पति जी के वचन सुनकर ब्रह्मा जी बोले कि हे तुमने सब प्राणियों का हित करने वाले इस अलौकिक व्रत को पूछा है। इसलिए तुम धन्‍य हो। यह भगवती शक्ति सम्‍पूर्ण लोको का पालन करने वाली है। इस महादेवी के प्रभाव को कौन जान सकता है।

दुर्गा नवरात्रि हवन पूजा

Durga Navratri Vrat Katha के अनुसार अष्‍टमी के दिन सप्‍तशती के द्वारा हवन पूजा किया जाता है। इस हवन में सबसे पहलेे श्री गणेश जी की पूजा करके नवग्रह, रूद्र, कलश, मॉं भगवती सहित ब्रह्मा पूजन किया जाता है। और हवन में प्रजापतये स्‍वाहा से लेकर वरूण गणपति तथा नवग्रह की आहूतियॉं दे। प्रत्‍येक मन्‍त्र में तेरह अध्‍याय तक आहूतियॉ दे। जब हवन व पूता समाप्‍त हो जाऐ तब कम से कम 11 कन्‍याओ व 11 ब्रह्मणो के चरणों को धोकर उन्‍हे दान दे। इस प्रकार आपके नवरात्रि पूर्ण होते है।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा व पूजा विधि (Shri Durga Navratri Vrat Katha & Puja Vidhi) Durga Navratri Vrat Katha के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी प्रदान की है यदि ऊपर लेख में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो लाई करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद दोस्‍तो….

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