Geeta Jayanti Kurukshetra: गीता जयंती कब है, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

Geeta Jayanti Kurukshetra:- आज भारतवर्ष का सबसे पवित्र और धार्मिक ग्रंथ श्रीमद भगवत गीता है इसके कुल 18 अध्‍यायों में 700 श्‍लोक है। इन पूरे अध्‍याय व श्‍लोक में मनुष्‍य के पूरे जीवन का सार लिखा हुआ है आज से कई हजार साल पहले स्‍वयं भगवान श्री कृष्‍ण जी ने पांड़ पुत्र अर्जुन को इसका उपदेश दिया था।

गीता जयंती (Geeta Jayanti in Hindi)

आपकी जानकारी के लिए बता दे मोक्षदा एकादशी व्रत वाले दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। जो इस वर्ष 22 दिसंबर 2023 शुक्रवार के दिन मनाई जाएगी। कहा जाता है इस दिन महाभारत के युद्ध में भगवान श्री कृष्‍ण जी ने गांडीव धारी अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। जिस कारण प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष की शुक्‍लपक्ष की एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष गीता जयंती का शुभ मुहूर्त वही है जो मोक्षदा एकादशी के व्रत का है। जो की हमने लेख में ऊपर बता दिया है। कहा जाता है मार्गशीर्ष का माह भगवान श्री कृष्‍ण जी को समर्पित है।

गीता जयंती

गीता जयंती का महत्‍व (Geeta Jayanti )

हिंदू धर्म में श्रीमद्भागवत गीता को विशेष माना गया है। जिसमें कुल 18 अध्‍याय है जिसका उपदेश द्वापर युग के अंत में भगवान श्री कृष्‍ण जी ने अर्जुन को धर्म की स्‍थापना बनाऐ रखने के लिए दिया था। गीता में धार्मिक, कार्तिक, सांस्‍कृतिक आदि का उपदेश दिया गया है। कहा जाता है जो कोई श्रीमद् भागवत गीता का अध्‍यन प्रतिरोज करता है उसे मृत्‍यु के बाद भगवान के श्रीचरणों में स्‍थापन प्राप्‍त होता है।

गीता जयंती 2023 (Geeta Jayanti in Hindi)

भगवद गीता जयंती एक हिन्‍दू त्‍यौहार (Geeta Jayanti Festival) है जो भगवद गीता के ज्ञान का अवसर मनाता है। यह पर्व भगवद गीता के श्री कृष्‍ण और अर्जुन के बीच में महाभारत के युछ के समय विचारों और उपदेशों का याद करने के लिए मनाया जाता है। भगवद गीता, महाभारत के भीष्‍म पर्व के अंतर्गत आती है और इसमें भगवान श्री कृष्‍ण जी ने अर्जुन को जीवन के मार्ग पर चलने के लिए उपदेश दिया है।

गीता में जीवन के विभिन्‍न पहलुओं पर चिार किया गया है जैसे कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग आदि गीता जयंती का अयोजन भारतीय हिन्‍दू समाज में विभिन्‍न रूपों में किया जाता है। इस दिन लोग भगवद गीता के पाठा करते है सत्‍संग अयोजित करते है और भगवद गीता के महत्‍व को समझाने के लिए कार्यक्रमों में भाग लेते है। यह खास त्‍यौहार हमे यह सिखाता है कि जीवन में उद्दीपन, साहस, आत्‍मा के साथ्‍ज्ञ साक्षर रहना कितना महत्‍वपूर्ण है। गीता जयंती का अवसर भक्तियोगी और ज्ञानी लोगों के बीच में एक धार्मिक और सामाजिक उत्‍सव के रूप में मनाया जाता है।

गीता जयंती का शुभ मुहूर्त (Geeta Jayanti Shubh Muhurat)

  • गीता जयंती/गीता एकादशी का प्रारंभ:- प्रात: 08:15 मिनट पर (22 दिसंबर को)
  • गीता जयंती का समापन:- 07:10 मिनट पर (23 दिसंबर को)
  • गीता जयंती कब है:- 22 दिसंबर 2023 शुक्रवार को

भगवत गीता के महत्‍वपूर्ण श्‍लोक

वेदानां सामवेदोडस्मि देवानामस्मि वासव:। इन्द्रियाणां मनच्‍श्रास्मि भूतानामस्मि चेतना।।

अर्थ:- पदार्थ तथा जीव में यह अन्‍तर है कि पदार्थ में जीवों के समान चेतना नहीं होती, अत: यह चेतना परम तथा शाश्रव्‍त है। पदार्थो के संयोग से चेतना उत्‍पन्‍न नहीं की जा सकती।

रूद्राणां शड्करच्‍श्रास्मि वित्तेशों यक्षरक्षसाम् । वसूनां पावकच्‍श्रास्मि मेरू: शिखरिणामहम् ।।

अर्थ:- ग्‍यारह रूद्राें में शंकर या शिव प्रमुख हैं। वे भगवान के अवतार हैं जिन पर ब्रह्माण्‍ड के तमोगुण का भार है यक्षों तथा राक्षसों के नायक कुबेर हैं जो देवताओ के कोषाध्‍यक्ष तथा भगवान के प्रतिनिधि है। मेरू पर्वत अपनी समृद्ध प्राकृत सम्‍पदा के लिए विख्‍यात है।

पश्‍चादित्‍यान्‍वसून्‍रूद्राश्रिव्‍नौ मरूतस्‍तथा। बहून्‍यदृष्‍टपूर्वाणि पश्‍याश्रर्च्‍याणि भारत ।।

अर्थ:- कुती पुत्र अर्जुन कृष्‍ण जी का अन्‍तरंग सखा तथा अत्‍यन्‍त विद्वान था तो भी वह उनके विषय में सब कुछ नहीं जानता था। यहॉंं पर यह कहा गया हैं कि इन समस्‍त रूपों को न तो मनुष्‍यों ने इसके पूर्व देखा है। न सुना है। अब कृष्‍ण इन आच्‍श्रर्यमय रूपों को प्रकट कर रहे है।

यदा यदा ही धर्मस्‍य ग्‍लानिर्भवति भारत: । अभ्‍युत्‍थानमधर्मस्‍य तदात्‍मांन सृजाम्‍यहम् ।।

अर्थ:- हे भारत अर्थात अर्जुन जब-जब इस पृथ्‍वी पर अर्धम में वृद्धि होती है यानी अर्धम बड़ता है तब-तब मैं धर्म का विनाश करने के लिए अवतार लेता हॅू।

geeta jayanti

गीता जयंती क्‍यों मनाई जाती है बताइए

गीता जयंती का अयोजन भारतीय हिन्‍दू समाज में भगवद गीता के महत्‍वपूर्ण उपदेशों को याद करने और उनको मनाने के लिए किया जाता है। यह एक प्रकार से त्‍यौहार है जो भगवद गीता के पूरे 18 अध्‍याय का पाठा, ध्‍यान और साधना के माध्‍यम से भगवान श्री कृष्‍ण के उपदेशों की स्‍मृति में किया जाता है। भगवद गीता में जीवन के विभिन्‍न पहलुओं पर चिार किया गया है जैसे कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग, साधना योग आदि।

इसमें मन, बुद्धि और आत्‍मा के संबंध पर विस्‍तार से चर्चा की गई है और व्‍यक्ति को अपने कर्तव्‍यों का निवर्ााह करने के लिए उत्तेजित किया जाता है। इसे मानव जीवन के मार्गदर्शन के रूप में माता जाता है जो साधकों को धार्मिक और नैतिक मार्ग पर चलने के लिए अधिक से अधिक प्रेरित करता है। गीता जयंती के दिन लोग भगवदत गीता के पाठा करते है सत्‍संग आदि आयोजित करते है और भागवत गीता के महत्‍व को समझाने के लिए विभिन्‍न प्रकार के कार्यक्रमों में भाग या उनका आयोजन किया जाता है। इसके अलावा भगवद गीता से संबंधित पुस्‍तकों का पाठा भी किया जाता है और लोगो का ध्‍यान इनकी और आर्कर्षित किया जाता है।

डिस्‍कलेमर:- आपको गीता जयंती के बारें में बताया है जो पौराणिक कथाओं (महाभारत), न्‍यूज, पंचाग के आधार पर लिखकर बताया है1 आपको बताना जरूरी है Onlineseekhe.com किसी प्रकार की पुष्टि नहीं करता है अधिक जानकारी के लिए किसी संबंधित विशेषज्ञ, विद्धान आदि के पास जाएगा।

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