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Guga Panchami In Hindi 2021 | गूगा पंचमी कब आती है। Guga Panchami Katha | गोगा पंचमी कथा व पूजा विधि

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दोस्‍तो जल्‍दी ही गूगा पंचमी (Guga Panchami) आने वाली है और आप सभी इस पंचमी का इतंजार भी कर रहे होगे। जैसा कि आप सब जानते है कि इस त्‍यौहार को परिवार के सभी लोग मिलकर मनाते है। इस दिन बहने अपने भाई की पूजा करती है और उसे मिठाई खिलाकर उसकी लम्‍बी उम्र की प्रार्थना करती है। वैसे तो हमारे धर्म में बहुत से त्‍यौहार, पंचमी मनाऐ जाती है किन्‍तु गूगा पंचमी अपने आप में एक खास महत्‍व रखती है।

यह त्‍यौहार भाद्रपद की कृष्‍ण पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करी जाती है। इस दिन स्‍त्रीया गूगा पंचमी का व्रत अर्थात् उपवास (Guga Panchami) रखती है। इस व्रत को रखने से स्त्रिया सौभाग्‍यवती होती है तथा उनके पति की अनेक विपत्तियों से रक्षा भी होती है। इसके अलावा उनकी सभी तरह की मनोकामनाए भी पूरी होती है।

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गूगा पंचमी के अवसर पर बहने अपने भाइयों को टीका लगाकर उन्‍हे मिठाई खिलाती है एवं स्‍वंय चना और चावल का बना हुआ बासी भोजन करती है जो कि दो दिन पुराना होता है। इसके बदले में भाई अपने बहनों को उनकी क्षमता के अनुसार पैसे उपहार स्‍वरूप भेटं करते है।

Guga Panchami
Guga Panchami Vrat in Hindi

Guga Panchami Date & Time

जैसा कि आप सभी जानते है कि गूगा पंचमी या फिर गोगा पंचमी का व्रत पति की लम्‍बी उम्र के लिए रखा जाता है लेकिन हम आपको बताना चाहेंगे कि यदि आप इस व्रत को करना चाहती है या फिर आप इस पचंमी का इन्‍तजार कर रहे है तो इस बार गूगा पंचमी (Guga panchami) 27 अगस्‍त 2021 को शुक्रवार के दिन पड़ेगी।

इसके साथ आपको यह भी बता दें कि इस व्रत का शुभ मुहूर्त 26 अगस्‍त को 6 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगा। तथा 28 अगस्‍त को रात के 8 बजकर 56 मिनट पर खत्‍म होगा। वही अगर बात करे पूजन के समय का तो आप सुबह 7 बजे से लेकर दोपहर के 1 बजकर 42 मिनट तक गूगा पंचमी का पूजन कर सकती है।

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ये तो रहा कि पूजन का सही समय क्‍या है आइये अब हम ये जानते है कि गूगा पचंमी पूजन के लिए आपको क्‍या-क्‍या सामान अर्थात् सामग्रीया चाहिए होगी।

गूगा पंचमी पूजन के लिए जरूरी सामग्रीया

Guga Panchami (गूगा पंचमी) की पूजा करने के लिए आपको कुछ सामाग्रीया चाहिए जो कि नीचे लिखी हुई है-

  • रौली-मौली
  • चावल
  • गेरू
  • कच्‍चा दूध
  • एक लौटा जल
  • बाजरा
  • आटा
  • घी
  • चीनी
  • मिठाई

चलिए पूजन सामग्रीयो के नाम जानने के बाद ये जानते है कि गूगा पंचमी के पूजन की विधि क्‍या है?

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Guga Panchami Pujan Vidhi | गूगा पंचमी पूजा विधि

  • गूगा पंचमी के दिन घर के सभी लोगो को जल्‍दी उठकर स्‍नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए।
  • इसके बाद घर के सबसे बुजुर्ग सदस्‍य को सूर्य भगवान को पानी चढ़ाकर पीपल व तुलसी के पेड़ में पानी चढाना चाहिए।
  • पानी चढ़ाने के पश्‍चात् घर के मन्दिर के पास किसी भी दीवार को गेरू से पोते अर्थात गेरू से पुताई करे।
  • अब कच्‍चे दूध में कोयला मिलाए। जिसके बाद आपको पुती हुई जगह पर चौकाेर मन्दिरनुमा आकृति बनाये।
  • अब इसमें आपको गेरू, रोल तथा कोयले से 5 सर्प/सापं बनाये।
  • आपने जो सर्प की आकृतिया बनाई है अब आपको कच्‍चे दूध, पानी, रोली-मोली एवं चावल से सर्पो का अभिषेक करना है।
  • फिर बाजारा, घी, आटा को एक जगह मिलाकर इनका भोग लगाए।
  • इस त्‍यौहार कि यह खात बात है कि गोगादेव जी कि पूजा करने से बच्‍चों क‍े जीवन की रक्षा व माताए अपनी संतान व पति की लंबी उम्र की कामना करते है।
  • इसके अलावा जो कोई स्‍त्री पुरूष नि:संतान है वो गूगा पंचमी का व्रत रखने से गोगादेव जी उनकी यह इच्‍छा पूरी करते है।
  • गूगा पंचमी के चार दिन बाद भाद्रपद कि कृष्‍ण नवमी को गोगा नवमी का त्‍यौहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है।

ये तो था कि आप गूगा पंचमी का व्रत कैसे रखे, पूजा कैसे करे , पूजन की विधि क्‍या है लेकिन क्‍या आपको गूगा देव भगवान की कथा के बार में पता है। अगर नही, तो आइये इनकी कथा के बार में जानते है।

गूगादेव जी की कथा

गोगादेव जी का जन्‍म विक्रम संवत में सन 1003 में राजस्‍थान के चुरू जिले के ददरेवा गांव में हुआ था इनका जन्‍म गुरू गोरखनाथ जी के आर्शीर्वाद से चौहान वंश के शासक जैबर (जेवरसिंह) के घर हुआ। चौहान वशं में अगर पृथ्‍वी राज चौहान के बाद किसी को ख्‍याति मिली है तो वे है गोगा देव जी। इनका राज्‍य सतलुज से लेकर हांसी तक फैला हुआ था।

Guga Panchami
गूगा पंचमी कथा, पूजन विधि

जब गोगाजी धीरे-धीरे बड़े हुए तो उन्‍होने अपनी शिक्षा गुरू गोरखनाथ जी से प्राप्‍त की। लोक कथाओं के अनुसार गोगाजी के दो पत्‍नीया था जिनके नाम राणी केलमदे एवं राणी सुरियल था। गोगाजी के कई पुत्र हुए जिनमे सबसे बड़े नानक थे। आपको बताते चले कि गोगाजी को दिल्‍ली के सुल्‍तान फिरोजशाह के साथ युद्ध करना पड़ा। जिसमें गोगाजी के दो मौसेरे भाई जो कि सुल्‍तान की ओर से लड़ रहे थे मारे गये थे।

गोगाजी (Guga Panchami) जब युद्ध समाप्‍त होने के बाद अपने राज्‍य में आये तो उनकी माता को इस बात का पता चला कि उसकी बहन के दोनो लडके गोगाजी के हाथो से मारे गऐ। इस बात पर गोगा जी की माता को बहुत क्रोध आया और गोगा को उसने घर छोडकर चले जाने को कहा, और अपना मुहं नही दिखाने को कहा। यह बात गोगाजी को बहुत बुरी लगी और वह अपना घर छोडकर चला गया । और उन्‍होने जीवित समाधि ले ली।

लोककथाओ के अनुसार गोगाजी की सांपो के देवता के रूप में भी पूजा की जाती है। इन्‍हे अनेक नामो से बुलाया जाता है जैसे गोगाजी, गुग्‍गावी, जाहिरवीर, राजा मण्‍डलिक, जाहर पीर आदि। उनकी जन्‍म भूमि पर आज भी उनके धोड़े का अस्‍तबल है आज उनके समाधि को सैकड़ो वर्ष हो गऐ किन्‍तु धोड़े का रकाब आज भी है। गोगाजी का स्‍थान सभी लोक देवताओं में से प्रमुख है।

गोगाजी राजस्‍थान के 6 प्रमुख लोक देवताओं में से पहले स्‍थान पर आते है। जिन्‍हे जाहरवीर गोग राणा के नाम से भी जाना जा‍ता है। राजस्‍थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेंड़ी शहर में हर वर्ष भाद्रपद की शुक्‍लपक्ष की पचंमी से लेकर नवमी तक यहा विशाल मेला भरता है। इनकी पूजा हिन्‍दु व मुस्लिम दोनो ही करते है। गुजरात राज्‍य में रबारी जाति के लोग गोगाजी को अपने कुल का महाराज मानते है।

इनक‍ी समाधी स्‍थल हनुमानगढ़ जिले के नोहर उपखंड में इनका पावन धाम गोगामेंड़ी इनके जन्‍म स्‍थान से लगभग 80 किलोमीटर दूर है। इतिहासकार इनके जीवन को शौर्य, धर्म, उच्‍च जीवन आदर्शो का प्रतीक मानते है।

तो दोस्‍तों ये थी गोगा देव जी की कथा। हम आशा करते है कि आपको यह कथा पसन्‍द आई होगी। जो भी महिलाए इस दिन व्रत रखती है गोगा देव जी उनकी सभी कामनाओ को पूर्ण करे।

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हमने आज के लेख के जरिए आपको गूगा पंचमी (Guga Panchami) के बारे में सभी तरह की जानकारीया प्रदान की है। यदि आपको हमारा यह लेख पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्‍तो के साथ भी शेयर करे। यदि आपके मन में कोई प्रश्‍न आ रहा है तो हमसे जरूर पूछे।

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