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What is Holi Festival! होली कब आती है | होली का त्‍यौहार क्‍यो मनाया जाता है?

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दोस्‍तों जल्‍द ही होली का त्‍यौहार आने वाला है ओर आप सब भी इस त्‍यौहार का इतंजार कर रहे होंगे। इस त्‍यौहार को हम सभी अपने परिवार एवं दोस्‍तो के साथ बड़ी धूम-धाम से हर साल मनाते है लेकिन क्‍या आपके मन में यह Question आया कि आखिर Holi का त्‍यौहार बनाने के पीछे वजह क्‍या है?, क्‍यो हम हर वर्ष इस रंगो के त्‍यौहार को Celebrate करते है। तो चलिए जानते है कि क्‍यो इस त्‍यौहार को मनाया जाता है।

वैसे तो हमारे देश में समय समय पर कई तरह के त्‍यौहार मनाए जाते है लेकिन कुछ त्‍यौहार अपने आप में बड़ा महत्‍व रखते है जैसे होली, दीपावली, दशहरा इत्‍यादि। क्‍योकिं ये त्‍यौहार बुराई पर अच्‍छाई की जीत का सदेंश देते है। Holi के दिन सभी लोग लड़ाई-झगड़े भूलकर आपस में एक-दूसरे से गले मिलते है तथा हर्ष उल्‍लास के साथ एक-दूसरे को तरह-तरह के रंग एवं गुलाल लगाकर इस त्‍यौहार का आनदं लेते है।

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आप सभी जानते है कि भारत त्‍यौहारो का देश है जहा पर लगभग सभी त्‍यौहारो को मनाने के पीछे कोई न कोई वजह अवश्‍य होती है ठीक उसी तरह Holi Festival के पीछे भी एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है जिसके बारे में हम आपको इस लेख में बताने जा रहे है। तो चलिए जानते है कि आखिर Holi का त्‍यौहार क्‍यो मनाया जाता है?

कब आता है Holi का त्‍यौहार

holi kab hai

Holi का त्‍यौहार हर साल फाल्‍गुन यानि कि मार्च के महीने में मनाया जाता है ओर इस दिन पूर्णिमा का दिन होता है। इस त्‍यौहार पर शाम के समय होलिका का दहन किया जाता है। ओर अगले दिन रंगो के त्‍यौहार Holi को मनाया जाता है।

इस दिन हर उम्र के लोग अपने दोस्‍तों एवं रिश्‍तेदारों से मिलने जाते है एवं रंगो व पिचकारीयों से इस उत्‍सव का धूमधाम से मनाते है। अगर बात करे इस साल होली किस दिन मनाई जाएगी तो आपको बता दे कि 29 मार्च को Holi मनाई जाएगी।

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क्‍यो मनाई जाती है Holi?

Holi का त्‍यौहार मनाने के पीछे कई पौराणिक कथाए जुड़ी हुई है लेकिन जो सबसे Famous पौराणिक कथा है वो है भगवान विष्‍णु के अनंत भक्‍त प्रह्लाद की। बहुत पहले की बात है हिरण्‍यकश्‍यप नाम का एक असुर राजा हुआ करता था। जिसकाे कई वर्षो की कठिन तपस्‍या के बाद ब्रह्मा जी के द्वारा एक ऐसा वरदान प्राप्‍त हुआ जिसके तहत उसे न दिन में मार सकेगा न ही रात में, न बाहर ना ही अंदर, ना ही इसांन से ना ही जानवर से, ना किसी अस्‍त्र से ना ही किसी शस्‍त्र से एवं न ही आकाश में व न ही धरती पर।

इस वरदान को पाकर हिरण्‍यकश्‍यप अपने आप को भगवान मानने लगा एवं जो उसका विरोध करते वह उन पर अत्‍याचार करने लगा। ऐसे में राज्‍य के सभी लोग उससे डरकर उसकी पूजा करने लगे। मगर हिरण्‍यकश्‍यप का एक पुत्र था जिसका नाम प्रह्लाद था वह बचपन से ही भगवान विष्‍णु का बहुत बड़ा भक्‍त था ओर विष्‍णु की भक्ति में डूबा रहता था। लेकिन हिरण्‍यकश्‍यप को यह बिल्‍कुल अच्‍छा नही लगा एवं उसने अपने पुत्र को विष्‍णु की पूजा करने के लिए मना किया। परतुं प्रह्लाद ने विष्‍णु की पूजा अर्चना करना नहीं छोड़ा।

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इन सब से परेशान होकर हिरण्‍यकश्‍यप ने अपने पुत्र की हत्‍या करने का मन बना लिया। हिरण्‍यकश्‍यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए हर तरीका अपनाया किन्‍तु वह उसे मार न पाया। अन्‍त में असुर हिरण्‍यकश्‍यप ने अपनी बहिन होलिका की मदद से प्रह्लाद को मारने का षड्यंत्र रचा। होलिका को यह वरदान मिला हुआ था कि आग उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। यह सोचकर उसने प्रह्लाद को अपनी गोद में बिठाकर आग में जलाने का प्‍लान बनाया। जिससे कि भक्‍त प्रह्लाद आग से जलकर मर जाये।

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षड्यंत्र के मुताबिक होलिका प्रह्लाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठ गई। प्रह्लाद अग्नि में प्रवेश करने के बाद भी भगवान विष्‍णु के नाम का जाप करते रहे। ऐसे में भगवान विष्‍णु ने अपने भक्‍त प्रह्लाद के शरीर को जलने नही दिया बल्कि होलिका को मिला हुआ वरदान झूठा साबित हो गया एवं आग में जलकर उसकी मृत्‍यु हो गई। क्‍योंकि होलिका ने अपने वरदान का दुरूपयोग किया था। इस तरह से बुराई पर अच्‍छाई की जीत हुई व तब से आज तक हर साल फाल्‍गून की पूर्णिमा को इस त्‍यौहार को मनाया जाता है।

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