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Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi | इन्दिरा एकादशी व्रत कथा व पूजा विधि यहा से पढ़े

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Indira Ekadashi 2022:- जैसा की आप सभी जानते है हमारे हिन्‍दु धर्म के अनुसार एक वर्ष कुल 24 एकादशीया (ग्‍यारस) है। जो अपने आप में एक बड़ ही महत्‍व रखती है। एक है इन्दिरा एकादशी जो आश्‍विन महीने की कृष्‍ण पक्ष की एकादशी को इन्दिरा एकादशी कहते है। यह ए‍कादशी पितृपक्ष में पड़ने के कारण इसे भटकते हुए पितरों की गति सुधारे वाली एकादशीको इन्दिरा एकादशी Indira Ekadashi Vrat Katha भी कहते है।

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यदि मनुष्‍य इस एकादशी को पूरे विधि-विधान व श्रद्धा भाव से रखता है तो उनके पितरों को (पूर्वजो) सभी कष्‍टाे से मुक्‍ति मिल जाती है। अर्थात उनकी आत्‍मा को शांति प्रदान होती है। इस कारण यह प्रतिवर्ष पितृपक्ष में आती है। ऐसे में आप भी अपने पितरों की आत्‍मा को शांति प्रदान के लिए इन्दिरा एकादशी का व्रत आदि रखते है। तो पोस्‍ट में दि गई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़करन आप अपना व्रत पूर्ण कर सकते है। पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

इन्दिरा एकादशी का महत्‍व (Indira Ekadashi Vrat ka Mahatva)

Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi
Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi

प्रतिवर्ष आश्विन माह की कृष्‍णपक्ष की यानी पितृपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को इन्‍दिरा एकादशी कहते है। इस बार यह एकादशी 21 सितम्‍बर 2022 बुधवार के दिन पड़ रही है। इस दिन शालीग्राम जी (विष्‍णु भगवान) की पूजा की जाती है पूजा के दौरान शालीग्राम जी पर तुलसी दल अवश्‍य चढ़ाना चाहिए। इस दिन भगवान विष्‍णु जी (शालीग्राम जी) पूजा-पाठ पूरे विधि-विधान या श्रद्धा भाव से करने के बाद भगवान विष्‍णु जी से अपने पितृरो की मुक्ति की कामना करे। तथा इंदिरा एकादशी का पाठ आदि करे , जिसके बार परिवार के सभी सदस्‍य एक साथ बैठकर भगवतगीता का सातवा अध्‍याय का पाठन करे। और सात्विक भोजन ग्रहण करे।

इंदिरा ग्‍यारस का शुभ मुहूर्त (Indira Gyaaras ka Shubh Muhurt)

प्रतिवर्ष यह व्रत अश्विन मास की कृष्‍ण पक्ष की एकादशी (ग्‍यारस) की तिथि को किया जाता है। इस बार यह व्रत 21 सितंबर 2022 का है जिसकी शुरूआत 20 सितंबर 2022 मंगलवार के दिन रात्रि 09:26 मिनट पर हो जाएगी। और इसका समापन 21 सितंबर को रात्रि के 11:34 मिनट पर हो जाएगी तो उदयातिथि के अनुसार यह व्रत 21 सितंबर के दिन किया जाएगा।

इंदिरा एकादशी व्रत पारण समय 2022

आप सभी इंदिरा एकादशी का व्रत 21 सितंबर को करते है तो आपको इस व्रत का पारण 22 सितंबर 2022 गुरूवार के दिन प्रा:त 06:09 मिनट से लेकर 08:35 मिनट के मध्‍य में करना है।

इन्दिरा एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इंदिरा एकादशी का व्रत (Indira Ekadashi Vrat Katha) रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को प्रात:काल जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर साफ वस्‍त्र धारण करे।
  • जिसके बाद सूर्य भगवान (सत्‍यनारायण) को पानी चढ़ाकर पीपल व तुलसी के पेड़ में पानी चढ़ाऐ।
  • इसके बाद अपने दोनो हाथे में थोड़ा जल व अक्षत, पुष्‍प लेकर इंदिरा ग्‍यारस व्रत का संकल्‍प करे।
  • जिसके बाद भगवान शालीग्राम को तुलसी दल, रौली-मौली, धूप-दीप, उसी मौसम के फूल व फल, नैवद्य आदि अर्पित करके विधि पूर्वक पूजा करे।
  • यदि किसी के घर में व्रत वाले दिन श्राद्ध है तो उसे अपने पितरों का श्रद्धा अनुसार पिडदान/श्राद्ध करे।
  • संध्‍या होने से पहले व्रत का पारण करे ध्‍यान रहे व्रत में अन्‍न नही खाना चाहिए। तथा रात्रि को भगवान के नाम का जागरण करे।
  • दूसरे दिन यानी द्वादशी वाले दिन ब्राह्मणें को भोजन करवाकर यथा शक्ति दान-दक्षिण देकर उन्‍हे प्रेम पूर्वक विदा करे। जिसके बाद स्‍वमं का भोजन ग्रहण करे।

इंदिरा एकादशी व्रत कथा (Gyaaras Vrat katha in Hindi)

Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi:- द्वापर युग की बात है एक बार अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्‍ण जी से पूछा हे मधूसूदन ये इंदिरा एकादशी क्‍या है और इसके क्‍या प्रभाव है। कृपा करके मुझे इस एकादशी के बारे में विस्‍तार पूर्वक समझाऐ।

अर्जुन की यह बात सुनकर भगवान कृष्‍ण जी बोले हे अर्जुन आश्विन महीने की कृष्‍णपक्ष में पढ़ने वाली एकादशी को ही इंदिरा एकादशी कहते है। इस संसार में जो कोई मनुष्‍य इस व्रत को पूरी श्रद्धा के अनुसार रखता है वह अपने सभी पापों से मुक्‍त हो जाता है। अपने पूर्वज/पितर जिनकी आत्‍मा को शांति नही मिली उनका उद्धार हो जाता है। जो कोई इस व्रत की कथा को तन-मन से सुनता है उसे अनंत फल की प्राप्‍ति होती है। मैं तुम्‍हे यह कथा सुनाता हूँ।—-

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सतयुग में एक महिष्‍मती नामक नगरी जिस पर इन्‍द्रसेन नाम का राजा राज्‍य करता था। वह राजा बड़ा ही दयालु व प्रतापी था। जिस कारण उसके किसी भी वस्‍तु की कमी नही थी और उसकी प्रजा भी बहुत सुखी पूर्वक जीवन व्‍यतीत कर रही थी। एक दिन राजा अपने दरबार में बैठा हुआ था तो उसी समय देवर्षि नारद जी वहा आ पहुचे। नारद जी को देखकर राजा अपने आसन से उठे और उनका भव्‍य स्‍वागत करके प्रणाम किया और उन्‍हे आसन ग्रहण करने को कहा। इसके बाद देवर्षि नारद जी ने राजा इन्‍द्रसेन से कहा हे राजन आपके राज्‍य में सभी सुख भोग रहे है। प्रजा को किसी प्रकार का कोई कष्‍ट या दुख नही है। मैं आपकी इस उदारता को देखकर अति प्रसन्‍न हूॅ।

नारद जी की बात सुनकर राजा ने कहा ये सब तो आपकी कृपा है। जो मेरे राज्‍य में हर प्राणी सुख भोग रहा है। इसके बाद राजा इन्‍द्रसेन ने महर्षि नारद जी से आने का कारण पूछा और कहा की मैं आपकी क्‍या सेवा करू जिससे आप प्रसन्‍न हो जाऐ। राजा की बात सुनकर नारद जी बोले हे राजन- मैं एक बार यमलोक गया तो देखा की तुम्‍हारे पिता भी वहा बैठ हुऐ थे। हे राजा तुम्‍हारे पिता भी तुम्‍हारी तरह ही बड़े ज्ञानी, धर्माता थे किन्‍तु एकादशी का व्रत नही करने के कारण मरने के बाद वो यमलोक में गए। जिस कारण वो बहुत दुखी है। उन्‍होने तुम्‍हारे लिए एक संदेश भेजा है। राजा ने पूछा वह क्‍या संदेश है। देवर्षि कृपा करके मुझे बताऐ।

आपके पिता ने कहा हे देवर्षि आप मेंरे पुत्र इन्‍द्रसेन जो इस समय पृथ्‍वी पर महिष्‍मती नामक नगरी का राजा है। उसके पास जाना और कहना की मैने पूर्व जन्‍म में कुछ बुरे कर्म किए है जिससे मुझे यह लोक मिला है। यदि इन्‍द्रसेन मेंरा पुत्र मेंरे लिए आश्विन महीन की कृष्‍णपक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत (Indira Ekadashi Vrat katha in Hindi) पूरे विधि-विधान व श्रद्धा पूर्वक करेगा। तो मुझे इस लोक से मुक्ति मिल जाएगी।

जिसके बाद मैं स्‍वर्गलोक में वास करूगा। यह सुनकर राजा ने देवर्षि नारद जी से पूछा की कृपा करके आप मुझे इस इंदिरा एकादशी व्रत का विधान बताऐ जिससे मेरे पिताजी को स्‍वर्गलोक प्राप्‍त हो। नारद जी ने कहा इस व्रत के लिए तुम दशमी के दिन प्रात: जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर किसी नदी पर अपने पितरो के नाम का श्राद्ध करे। और रात्रि को पृथ्‍वी पर शयन करे।

जिसके बाद एकादशी वाले दिन प्रात:काल जल्‍दी उठकर सूर्य भगवान को पानी चढ़ाने के एक लौटे में जल, धूप, दीप, पुष्‍प आदि डालकर भगवान विष्‍णु जी को चढाऐ। और इस व्रत का संकल्‍प ले ”मैं आज पूरे दिन व्रत का निराहार करूगा और सभी भोगो का त्‍याग करूगा।

इंदिरा एकादशी व्रत (Gyaaras Vrat Katha) की सभी विधि बतारक नारद जी वहा से चले गए और कुछ दिनो के बाद इंदिरा एकादशी आई। राजा ने इस एकादशी का व्रत किया और पूरे विधि-विधानो से श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना करी। और अपने पिता के नाम का श्राद्ध किया। तथा दूसरे दिन ब्राह्मणो का भोजन करवाकर दान-दक्षिण देकर उन्‍हे विदा किया। उसके बाद स्‍वमं ने भोजन किया।

राजा इन्‍द्रसेन के इंदिरा एकादशी व्रत के प्रभाव से उसने पिता को यमलोक से मुक्ति मिल गई और वो सदा क लिए स्‍वर्ग लोक को चले गए। इसके बाद भगवान श्री कृष्‍ण जी ने अर्जुन से कहा हे सखा यदि इस संसार में जो कोई मनुष्‍य इंदिरा एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा भाव से रखता है। तो उसके सब कष्‍ट दूर हो जाते है और उनके पूर्वजो को मुक्ति प्राप्‍त होती है।

दोस्‍तो आज के इस आर्टिकल में हमने आपको इंदिरा एकादशी/ग्‍यारस व्रत कथा व पूजा विधि Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi के बारे में विस्‍तार से बताया है। जो पौराणिक कथा व पंचाग के अनुसार जानकरी बताई है। हमारे द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमेंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद दोस्‍तो…..

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2 thoughts on “Indira Ekadashi Vrat Katha in Hindi | इन्दिरा एकादशी व्रत कथा व पूजा विधि यहा से पढ़े”

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