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International Day of Sign Languages 2021 | सांकेतिक भाषाओं का अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस के बारे में पढ़े

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सांकेतिक भाषाओ का अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस (International Day of Sign Languages) 2021:- यह दिवस प्रतिवर्ष 23 सितम्‍बर को पूरे विश्‍वभर में बधिर व्‍यक्तियों को जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष सांकेतिक भाषा का अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस 23 सितम्‍बर 2021 गुरूवार के दिन सभी देशो में अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर मनाया जाएगा। इस दिवस का उदेश्‍य जो बधिर लोग होते है उनको शरीर के हाव-भाव से भाषा (बोलना) सिखाना है।

आपको बता दे की सांकेतिक भाषाओं का अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस के रूप में मनाने के लिए संयुक्‍त राष्‍ट्र ने 23 सितम्‍बर 2018 को घोषण की थी। इसी उपलक्ष्‍य पर प्रतिवर्ष सितम्‍बर को अंतर्राष्‍ट्रीय साइन लैंग्‍वेज दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में आप भी सांकेतिक भाषाओ का अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस के बारे में सभी जानकारी विस्‍तार से पढ़ना चाहते है तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

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International Day of Sign Languages
International Day of Sign Languages

सांकेतिक भाषा अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस क्‍यों मनाया जाता है (International Day of Sign Languages)

इसलिए मनाया जाता है विश्‍व बधिर फेडरेशन के अनुसार पूरे विश्‍व में लगभग 7 करोंड 20 लाग के पास बधिर व्‍यक्ति है। जिनमें से 80 प्रतिशन लोग विकासशील देशो में निवास करते है। जो लगह तरह की 300 प्रकार की सांकेतिक भाषा का प्रयोग करते है। विश्‍व में जिन व्‍यक्तियो को सुनाई नहीं देता या फिर बोल नहीं सकते, जिनकी सुनने की शक्ति कमजोर है। उन सभी बधिर व्‍यक्तियो के लिए सांकेतिक भाषा ही संसार का एकमात्र तरीका है। जिससे वो सामने वाले को समझा सकते है की वह क्‍या कह रहा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे दूसरी सभी भाषाओं की तरह सांकेतिक भाषाओ के भी अपने व्‍याकरण और नियम अलग होते है। सांकेतिक भाषा विश्‍व के सभी बधिर व्‍यक्तियो के लिए एक विकासशील भाषा व बहुत ही महम्‍वपूर्ण व उपयोगी है। जिस कारण इसे मूक-बधिर लोगों की मातृ भाषा कहा जाता है। फर्क इताना है विश्‍व के अलग-अलग देशो में ‘साइन’ के जरिये बधित व्‍यक्तियो को एक ही बात कहने के अलग-अलग तरीके है।

जैसे- दक्षिण भारत की ओर बधिर व्‍यक्तिो को मुठठी बंद कर दोनो बाहों को एक के ऊपर एक रखा जाऐ तो उसे शादी का मतलब या ‘साइना’ समझा जाता है। तथा वही उत्तरी भारत की ओर जेल का ‘साइना’ माना जाता है। आपको बता दे वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार हमारे देश भारत में लगभग 50 लाखा से भी ज्‍यादा लोग बधिर (जो बोल या सुन नही सकते) है। या फिर उनकी श्रवण शक्ति बहुत ज्‍यादा कमजोर है।

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सांकेतिक भाषा अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस का इतिहास (Day of International Sign Languages)

दोस्‍तो आपको बता दे सांकेतिक भाषा (Day of Sign Languages) का प्रमाण 5 वीं शताब्‍दी ईसा पूर्व में प्‍लेटो की क्रेटीलस बुक मिलता है। जिसे सुकरात कहा गया है। अर्थात यदि हमारे पास जुबान या आवाज दोनो नही है तो हम एक-दूसरे के विचार व भावना व्‍यक्‍त समझ सकते है। यानी हमारे हाथो व पैरो तथा शरीर के अन्‍य सभी अंगो के माध्‍यम से संकेत करके समझ सकते है। इसके बाद सन 1620 में जुआन पाब्‍लो बोनेट ने अपनी मेंड्रिड बुक में मूक बधिर व्‍यक्तियो के बार में यह पुस्‍तक दुनिया के सामने प्रकाशित की थी।

इसके बाद सन 1680 में जोर्ज डालगार्नो ने भी अपनी एक पुस्‍तक बधिर लोगो के लिए लॉच की थी। इनके बाद सन 1755 में अब्‍बे डी लिपि ने पेरिस देश के सभी बधिर बच्‍चो को ‘साइना’ में अपने विचार प्रकट करने के लिए प्रथम विद्यालय की स्‍थापना करी। जिसके बाद 19 वीं सदी में तो कई देशो ने बधिर बच्‍चों के लिए बहुत से स्‍कूल व कॉलेजो की स्‍थापना करी। जिसके बाद 23 सितम्‍बर 1951 को विश्‍व मूक फेडरेशन की स्‍थापना की गई। और इसी उपलक्ष में प्रविवर्ष 23 सितम्‍बर को अंतर्राष्‍ट्रीय साइन लैंग्‍वेज दिवस मनाया जाता है।

सांकेतिक भाषा विश्‍व दिवस (International Day of Sign Languages in Hindi)

दोस्‍तो आप सभी जानते है की 19 वी सदी की बजाय आज के युग में बधिर लोगो के लिए पूरे विश्‍व में बहुत सी सुविधाए उपल्‍बद हो गयी है। जिससे उनको सांकेतिक भाषा समझन में इतीन कठीनाई नही आती। सांकेतिक भाषा अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस 2021 की थीम सांकेतिक भाषा में पूरे विश्‍व के राष्‍ट्रो में भाषा के सन्‍दर्भ में जागरूकता फैलाना है। तथा सांकेतिक भाषा सभी के लिए है।

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दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको सांकेतिक भाषा अंतर्राष्‍ट्रीय दिवस (International Day of Sign Languages) के बारे में सभी जानकारी प्रदान की है। यदि आपको हमारे आर्टिकल द्वारा दी गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शुयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछ सकेत है। धन्‍यवाद

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