Kajli Teej Festival in Hindi~ कजली तीज का त्‍यौंहार 2022 जानिए महत्‍व, तिथी व शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

Advertisement

Kajli Teej Festival in Hindi~ कजली तीज का त्‍यौंहारKajli Teej Festival 2022 जानिए महत्‍व, तिथी व शुभ मुहूर्त, पूजा विधि। कजली तीज कब है। kajli teej kab hai। सातुडी तीज कब है। satudi teej kab hai। कजली तीज तिथी 2022। kajli teej date 2022। कजली तीज महत्‍व। importance of kajli teej। कजली तीज की शुरूआत। starting of kajli teej। कजली व्रत कथा। kajli vrat katha। सातुडी व्रत कथा। satudi vrat katha। कजली तीज क्‍या है। what is kajli teej। कजली तीज पूजा विधि। kajli teej pooja vidhi । सातुडी तीज क्‍या है। what is satudi teej। कजरी तीज क्‍या। what is kajri teej।

Kajli Teej Festival in Hindi:- दोस्‍तो वैसे तो हमारे हिन्‍दु धर्म में अनेक त्‍यौंहार व व्रत मनायें जाते हैं। उनमे से ही एक त्‍यौंहार हैं कजली तीज का त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival)। सभी त्‍यौंहार अपने आप में बहुत महत्‍व रखते हैं। लेकिन कजली तीज का त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) हिन्‍दु धर्म में अपनी एक अलग ही पहचान रखता है। तो आज के इस लेख में हम बात करेगें कि कजली तीज का त्‍यौंहार कब से व किस कारण सेे मनाई जाती हैं। तथा इस साल इसका व्रत कौनसी तिथी को मनाया जाएगा व कजली तीज के त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) मनाने का शुभ मुहूर्त क्‍या है। यदि आप भी कजली तीज के व्रत के बारे में पूर्ण रूप से जानना चाहते है तो बने रहिए हमारे लेख के साथ अन्‍त तक।

Advertisement

कजली तीज के त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) का महत्‍व

Kajli Teej Festival in Hindi~ कजली तीज का त्‍यौंहार 2022

हिन्‍दु धर्म में तीज- त्‍यौंहारो, व व्रतो का बहुत महत्‍व है। यूं तो साल में कई तीज के त्‍यौंहार के आते है। हर एक का अपने आप में बहुत प्रमुख है। तीज के त्‍यौंहार हिन्‍दु महिलाओं के लिए बहुत खास महत्‍व रखता है। तीज त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) का व्रत साल में चार बार आता है। जिनमे से आज हम कजली तीज के त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) के महत्‍व के बारे में जानेगें। जिसे सातुडी तीज, बुढी तीज व बडी तीज के नाम से भी जाना जाता है।

कजली तीज का त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) भादो माह के कृष्‍ण पक्ष की तृतीया तिथी को मनाई जाती है। महिलाये इस व्रत को बडे ही हर्षो- उल्‍लास से मनाती है। माना जाता है क‍ि सुहागन महिलाओं के इस व्रत को करने से उनके पति की उम्र लंबी होती है। यदि इस व्रत को कुंवारी कन्‍याऐ करती है तो इस व्रत से उन्‍हें मनचाहा वर मिलता है। कजरी तीज मानसून के दौरान आती है। यह तीज बारीश का स्‍वागत करती हैं। आज के दिन माता पार्वती की पूजा की जाती हैं जिससे वह यह दर्शाती हैं कि वे अपने पति से कितना प्रेम करती हैं तथा वे अपने पति से कभी अलग नहीं होती।

कजली तीज (Kajli Teej Festival) व्रत तिथी व शुभ मुहूर्त

कजली तीज (Kajli Teej Festival) का व्रत हर वर्ष भाद्रपद मतलब भादो कृष्‍ण पक्ष की तृतीया तिथी को किया जाता है। इस साल हिन्‍दु पंचाग के अनुसार कजली तीज 14 अगस्‍त रविवार को पड रही है। भादो पद के कृष्‍ण पक्ष की तृतीया तिथी का शुभारम्‍भ 13 अगस्‍त शनिवार की रात 12 बजकर 53 मिनट पर हो जाएगा। 14 अगस्‍त रविवार रात 10 बजकर 35 मिनट पर शुभ मुहूर्त की समाप्ति हो जाएगी। इस समय के बीच का समय ही व्रत करने के लिए शुभ रहेगा। आप इस समय के बीच में कजली तीज (Kajli Teej Festival) के व्रत का पालन कर सकते है।

कजली तीज (Kajli Teej Festival) व्रत की पूजा विधि

कजली तीज के त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) पर व्रत करने के लिए मिटृटी या गोबर से कृत्रिम तालाब बनाया जाता हैं। नीमडि माता बनाई जाती हैं तथा एक नीम कि टहनी लगाई जाती हैं। नीमडि माता या कजली माता या कजरी माता का 16 श्रृंगार किया जाता हैं। और पूजा के स्‍थान को गंगा जल के छिंटे मार कर शुद्ध करना चाहिए। जो तालाब बनाया गया हैं उसमें गाय का कच्‍चा दुध डाले। यदि गाय का दुध न मिले तो किसी भी पशु का दुध ले सकते हैं। दुध डालने के बाद उसमे थोडा पानी डाल ले़। उसके बाद तालाब के पास एक घी का दिपक जलाए व धूप जलाए।

तीज के त्‍यौंहारो (Kajli Teej Festival) पर मामूली तौर पर झूला लगाया जाता हैं। जिस पर महिलाए झूला झूलती हैं और तीज के त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) का आनन्‍द लेती हैं। और पूजा के लिए भी मोली के डोरे से झूला बनाया जाता हैं और (ये सब तैयारीयाँ सुबह से लेकर शाम तक की जाती हैं।) उसे महंदी कि सहायता से दीवार पर लगाया जाता हैं। फिर हाथ मे गेहूँ के दाने लेकर तालाब के किनारे डाल देते हैं। अब उसके बाद रोली का तिलक कजली माता व नीम पर लगाया जाता हैं तथा तलाई (तालाब) पर लगाया जाता हैं। उसके बाद रोली से स्‍वास्तिक बनाए। उसके बाद पानी के लौटे पर 13 बिंदीया लगाएंगे। उसके बाद इसी लैटे से चंद्रमा जी को अर्घ्‍य देकर हम अपना व्रत सम्‍पूर्ण करेंगे।

उसके बाद स्‍वास्‍तिक के नीचे 13बिंदीया रोली कि व 13 बिंदीया महंदी कि लगाएंगे। कजरी माता व नीम को अक्षय अर्पित कर देंगे। आज के दिन गौ माता का पूजन बहुत ही शुभ माना जाता हैं। इसलिए आज के दिन गौ माता का पूजन करना चाहिए। उसके बाद मे कजरी माता को भोग के रूप में जो नीमडी बनाई हैं उसको तालाब मे अर्पित कर देंगे। उसके बाद मे आंकडे का पत्‍ता व बील पत्र को कजरी माता के चढायेंंगे । गौ माता को गेहूँ के आटे से बनी और गुड लगी हुई लोई चढायेंगे। अब जो पुष्‍प है उन्‍हें अर्पित कर देंगे। उसके बाद कजरी माता को श्रृंगार चढायेंगे। उसके बाद मोली के डोरे को नीम में बांधना चाहिए। ताकी उसी तरह हमारे स्‍वाग की रक्षा होती रहे।

Advertisement
Advertisement

अब हाथ में 13 गेहूँ के दाने लेकर कथा सुनेंगे। इन गेहूँ के दाने को लौटे मे डाल कर चंद्रमा को अर्घ्‍य दे देगें। और इस प्रकार से हमारा ये व्रत पूरा होता हैं।

कजली तीज (Kajli Teej Festival) व्रत कथा

एक बार एक गॉंंव मेें एक गरीब ब्राह्रण का परिवार रहता था। वे इतने गरीब थे क‍ि उन्‍हे दो वक्‍त का खाना भी बहुत मुश्किल से प्राप्‍त होता था। ऐसे में परेशान होकर ब्राह्रण की पत्‍नी ने कजली तीज (Kajli Teej Festival) का व्रत रखने का फैसला किया। पत्‍नी ने व्रत के लिए सत्‍तू लाने को कहा। तो ब्राह्रण ये सुनकर परेशान हो गया और सोचने लगा कि उसके पास तो सत्‍तू लाने के लिए पैसे तो है ही नहीं।

पत्‍नी की जिद के सामने लाचार ब्राह्रण साहुकार की दुकान पर पहुँचा। वहॉं जाकर देखा कि साहुकार सो रहा है। तो वह दुकान में रखे सत्‍तु को उठाने लगा वैसे ही साहुकार की ऑंखे खुल गई। साहुकार ने ब्राह्रण को पकड लिया और जोर- जोर से चिल्‍लाने लगा ”चोर- चोर”। तब ब्राह्रण ने कहा कि मैं चाेर नहीं हूँ। मेरी पत्‍नी ने कजली तीज (Kajli Teej Festival) का व्रत रखा है। तो मैं सिर्फ चने का सत्‍तू लेने आया था। साहुकार ने ब्राह्रण की तलाशी ली। कुछ ना मिलने पर साहुकार की ऑंखे नम हो गई।

साहुकार कहने लगा कि हे ब्राह्रण मुझे क्षमा करो। आज से आपकी पत्‍नी को मैं अपनी बहन मानता हूँ। साहुकार ने ब्राह्रण को कुछ पैसे व सत्‍तू देकर विदा किया। हे भगवान शंकर और माता पार्वती जैसे आपने ब्राह्रण के परिवार की समस्‍या को हल किया वैसे ही कथा सुनते को, कहते को, हुँकारा भरते पर कृपा करना। जय भाेले नाथ जय माता पार्वती।

दोस्‍तो आज के इस लेख में कजली तीज के त्‍यौंहार (Kajli Teej Festival) के बारे में विस्‍तार से बताया गया है। जो कि आध्‍यात्मिक कथाओं के आधार पर वर्णित है। हमारे द्वारा लिखा गया लेख यदि आपको पसन्‍द आये तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न आए तो कमेंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

2 thoughts on “Kajli Teej Festival in Hindi~ कजली तीज का त्‍यौंहार 2022 जानिए महत्‍व, तिथी व शुभ मुहूर्त, पूजा विधि”

  1. Pingback: Yogini Ekadashi vrat Katha ~ क्‍यों किया जाता है योगिनी एकादशी व्रत जानिए

  2. Pingback: Bhool Bhulaiyaa 2 movie review ~ भूल भुलैया 2। चलिए जानते है मंजूलिका का रहस्‍य

Leave a Comment

Your email address will not be published.