Matsya Dwadashi 2021 in Hindi | मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत कथा व पूजा वि‍धि विस्‍तार से पढ़े

Advertisement

Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hindi | मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत की कथा | Matsya Dwadashi Katha in Hindi | मत्‍स्‍य द्वादशी 2021 | Dwadashi Matsya 2021 | मत्‍स्‍य बारस कथा | Matsya Dwadashi Kab Hai

Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hind:- दोस्‍तो मार्गशीर्ष मास की शुक्‍लपक्ष की द्वादशी को ही मत्‍स्‍य द्वादशी कहा जाता है। जो मोक्षदा एकादशी के दूसरे दिन पड़ती है। इस द्वादशी वाले दिन भगवान विष्‍णु जी के मत्‍स्‍य अवतार की पूजा की जाती है। कहा जाता है की विष्‍णु जी का यह प्रथम अवतार इसी दिन हुआ था। और वेंदों व पुराणो में इस द्वादशी का विशेष महत्‍व है। व्‍यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पाने के लिए मत्‍स्‍य द्वादशी का व्रत रखता है। ऐसे में आप भी इस द्वादशी का व्रत रखते है तो आर्टिकल में दी गई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़कर या सुनकर आप अपना व्रत पूर्ण कर सकते है। तो चलिए पोस्‍ट के अंत तक बने रहे।

Advertisement

मत्‍स्‍य द्वादशी का महत्‍व (Matsya Dwadashi 2021 Date)

Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hindi
Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hindi

विष्‍णु पुराण के अनुसार सतयुग से पहले विष्‍णु जी ने मार्गशीर्ष महीने की शुक्‍लपक्ष की द्वादशी को मत्‍स्‍य अवतार लेकर दैत्‍यराज हयग्रीव का संहार करके वेदों की रक्षा की थी। और तभी से लेकर आज से प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष माह में मत्‍स्‍य द्वादशी मनाई जाती है। पुराणों व शास्‍त्रो के अनुसार भगवान विष्‍णु जी के कुल 24 अवतार है

जिनमें से 23 अवतार तो भगवान ने इस पृथ्‍वी पर ले चुके है और 24 वा अवतार ‘कल्‍कि’ है जो कलयुग के अंत में लेगे। कहा जाता है इन सभी 24 अवतारो में से केवल 10 अवतारों को मुख्‍य अवतार माना गया है जो मत्‍स्‍य अवतार, कूर्म अवतार, वराह अवतार, नृसिंह अवतार, वामन अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार, कृष्‍ण अवतार, बुद्ध अवतार व कल्कि अवतार ही मुख्‍य है।

मत्‍स्‍य द्वादशी 2021 तिथ‍ि (Matsya Dwadashi 2021 Date and Time)

वैसे तो मत्‍स्‍य द्वादशी प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष मास की शुक्‍लपक्ष की द्वादशी को आती है जो की इस वर्ष 15 दिसबंर 2021 बुधवार के दिन पड़ रही है। यह द्वादशी मोक्षदा एकादशी के एक दिन बाद आती है। इस दिन मत्‍स्‍य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत पूजा विधि जाने

  • मत्‍स्‍य द्वादशी का व्रत रखने वाला व्‍यक्ति को प्रात: जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर साफ वस्‍त्र धारण करना चाहिए। जिसके बाद सूर्य भगवान को जल चढ़ाकर पीपल व तुलसी के पेंड़ में भी चढ़ाऐ।
  • इसके बाद पूजा के लिए किसी स्‍थान को साफ करे और उसमें चारो जगहों पर पानी से भरे हुए कलश स्‍थापित करे।
  • इन भरे हुऐ कलशों में थोड़े से पुष्‍प व तिल की खली सें ढक कर इनके आगे भगवान विष्‍णु जी की पीली धातु से निर्मित प्रतिमा स्‍थापित कर देना है।
  • कहा जाता है की ये चार कलश समुद्र का प्रतीक है इसी कारण इनको पानी से भरकर रखना बहुत जरूरी है। अब विष्‍णु जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाकर रख देना है।
  • अब भगवान की पूजा केसर और पुष्‍प, फल, तुलसी, रौली-मौली, चावल, नैवेद्य आदि चढ़ाकर पूर्ण रूप से विधिवत पूजा करे। ध्‍यान रहे पूजा के दौरान ऊॅ मत्‍स्‍य रूपाय नम: महामंत्र का जाप करे।
  • जिसके बाद मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत की कथा सुने और आरती करे।
  • पूजा के बाद भगवान को प्रसाद चढ़ाऐ और वहा मौजूद सभी को यह प्रसाद बाट देना है।

मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत कथा (Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hindi)

एक बार ब्रह्मा जी की असावधानियो के कारण एक बहुत बड़े दैत्‍य ने सभी वेदों को चुरा लिया। उस दैत्‍य का नाम हयग्रीव था जब इसने वेदों को चुरा लिया तो चारो और अज्ञान ही अज्ञान हो गया अर्थात ज्ञान लुप्‍त हो गया। चारो ओर अंधकार ही अंधकार फैल गया तथा पाप बहुत ज्‍यादा बड़ गऐ। य‍ह सब देख ब्रह्मा जी सहित सभी देवता भगवान विष्‍णु जी के पास गऐ और प्रार्थना करने लगे की हे जगत पालन कर्ता अब आप ही कुछ करिए।

अन्‍यथा यह सृष्टि खत्‍म हो जाएगी। तब जाकर भगवान विष्‍णु जी ने वेदों की रक्षा के लिए तथा धर्म की रक्षा के लिए मत्‍स्‍य रूप धारण किया। जो आधा मछली का था। इस रूप को धारण कर भगवान ने राक्षस हयग्रीव का वध कर सभी वेदों की रक्षा की। और पुन: ब्रह्मा जी को लौटाया।

मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत कथा Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hindi

कलपात के पूर्व में एक पुण्‍यत्‍मा राजा तप कर रहे थे उस राजा का नाम सत्‍यव्रत था। जो बड़े ही दानी व उदान व पुण्‍य आत्‍मा थे। ए‍क दिन सूर्योदय के समय राजा सत्‍यव्रत कृतमाला नदीं में स्‍नान करके जब तर्पण के लिए अजंली (दोनो हाथों में) में जल लिऐ तो उसमें एक छोटी से मछली आ गई। जिसके बाद राजा सत्‍यव्रत ने उस मछली को जल में छोड़ दिया। इस पर मछली बोली हे राजन जल में बड़े-बड़े जीव छोटे-छोटे जीवो को खा जाते है।

Advertisement
Advertisement

और इसी तरह मुझे भी कोई मारकर खा जाएगा। कृपा करके मेरे प्राणों की रक्षा किजिऐ। राजा के मन में उस मछली के प्रति दया उत्‍पन्‍न हो गई और उस मछली को अपने कमण्‍डल में डाल लिया। और अपने महलो में ले जाकर रख दिया और मछली से कहा की तुम रहा आराम से रह सकती हो। तुम्‍हे यहा पर कोई खतरा नही है।

तब बड़े ही आर्श्‍चय की बात हुई वह मछली एक रात में ही दुगनी बड़ी हो गई अर्थात अ‍ब वह उस कमण्‍डल में नही समा रही थी। तब उस मछली ने राजा से कहा हे राजन मेरे रहने के लिए कोई दूसरा स्‍थान ढूढिऐ। क्‍योकिं मेरा शरीर बड़ गया है। मुझे घूमने-फिरने में कष्‍ट हो रहा है। राजा ने उस मछली को कमण्‍डल से निकालकर एक पानी के मटके में डाल दिया।

यहा भी उस मछली का शरीर रातभर में ही दुगना हो गया और मटका भी उसके रहने के लिए छोटा पड़ गया। मछली पुन: राजा से बोली हे राजन मेरे रहने के लिए कोई और स्‍थान चुनिऐ। क्‍योकि यह घंडा भी कमण्‍डल की तरह छोटा पड़ रहा है। जिसके बाद राजा सत्‍यव्रत ने उस मछली को मटके से निकालकर एक सरोवर में डाल दिया। किन्‍तु आर्श्‍चय की बात सरोवर भी मछली के रहने के लिए छोटा पड़ गया।

जिसके बाद राजा ने उस मछली को नदी में डाला किन्‍तु वहा भी आकार में बड़ी हाे गई जिसके बाद राजा ने मछली को समुद्र में डाल दिया। अब तो राजा सत्‍यव्रत और भी ज्‍यादा आर्श्‍चय में पड़ गया क्‍योकि मछली को समुद्र में डालने के बाद उसका आकार इतना बड़ गया। मछली के रहने के लिए वह बहुत छोटा पड़ गया। अत: वह मछली पुन: राजा से बोली हे राजा सत्‍यव्रत यह समुद्र भी मेरे रहने के योग्‍य नही है।

मेरे रहने की व्‍यव्‍स्‍‍था की ओर करे। अब राजा सोच में पड़ गया क्‍योकि उसने आज तक ऐसी कोई मछली नहीं देखी थी। जिसके बाद राजा सत्‍यव्रत अपने दोनो हाथ जोड़कर बोले मेरी बुद्धी को विनयसागर में डुबो देने वाले आप कौन है। क्‍योकि आपका शरीर जिस गती से बड़ रहा है उसे देखते हुऐ बिना किसी सदेंह के कहा जा सकता है आप अवश्‍य ही परमात्‍मा है।

यदि यह बात सत्‍य है तो कृपा करके बताइऐ की आपने इस मछली का रूप धारण क्‍यो किया। उस मत्‍स्‍य के रूप में सचमुच ही भगवान विष्‍णु जी थे। मत्‍स्‍य रूप धारी श्री हरि ने उत्तर दिया हे राजन हयग्रीव नामक एक दैत्‍य ने वेदों को चुरा लिया है। जिस कारण जगत में चारों ओर अज्ञान व अंधकार फैल गया है। और मैनें हयग्रीव राक्षस को मारने के लिए मत्‍स्‍य का रूप धारण किया है।

तो आज से सातवें दिन पृथ्‍वी पृल्‍य के चक्र में घिर जाएगी। और समुद्र उमड़ पडेगा जिस कारण पूरी पृथ्‍वी पानी में डूब जाएगी। चारो ओर जल-ही जल दिखाई देगा इसके अतिरिक्‍त कुछ भी दिखाई नहीं देगा। उसी समय आपके पास एक नाव पहुचेगी आप सभी अनाजो, सदियों, बीजों को लेकर सप्‍तऋषियों के साथ उस नाव में बैठ जाना। मैं उसी समय आपको पुन: दिखाई दूॅगा और आपको आत्‍मतत्‍व का ज्ञान प्रदान करूगा।

यह कहकर मत्‍स्‍य भगवान वहा से अतर्रध्‍यान हो गऐ। जिसके बाद राजा उसी दिन पृथ्‍वी के प्रलय की प्रतीक्षा करने लगे। और सातवें दिन पृलय का दृश्‍य दिखाई दिया चारो ओर पानी ही पानी दिखाई देना लगा। राजा सत्‍यव्रत को उसी समय एक नाव दिखाई दी राजा सप्‍तऋषियो के साथ उस नाव में बैठ गऐ।

Advertisement

राजा ने उस नाव के ऊर सभी अनाजों के बीजों को रख लिया और नाव प्रलय के सागर में तैरने लगी। और अचानक राजा सत्‍यव्रत को भगवान विष्‍णु जी उस प्रलय के सागर में दिखाई पड़े। राजा सत्‍यव्रत और सप्‍तऋषिगण मत्‍स्‍य रूपी भगवान की प्रार्थना करने लगे। हे प्रभो आप ही इस सृष्टि की आदि है और आप ही पालक है, और आप ही रक्षक है अत: दया करके हमे अपनी शरण में लीजिऐ।

सप्‍तऋषियों व राजा सत्‍यव्रत की प्रार्थना पर भगवान मत्‍स्‍य रूपी ने प्रसन्‍न हो गऐ और अपने वचन के अनुसार राजा सत्‍यव्रत को आत्‍मज्ञान प्रदान किया। बताया की सभी प्राणियों में मैं ही निवास करता हॅू ना कोई ऊचा है ना कोई नीचा है। सभी प्राणी एक समान है और यह जगत नश्‍वर है जिसमें मेरे अतिरिक्‍त कुछ भी नही है। जो प्राणी मुझे देखते हुए अपना जीवन व्‍यतीत करता है

वह अंत में मुझ में ही मिल जाता है मत्‍स्‍य रूपी भगवान से आत्‍मज्ञान प्राप्‍त करके राजा सत्‍यव्रत का जीवन धन्‍य हो गया। और वह जीते जी ही जीवन से मुक्‍त हो गऐ। जब प्रृलय का प्रकोप शांत हुआ तो भगवान ने राक्षस हयग्रीव का वध करके वेदों को छुडवाया और ब्रह्मा जी को पुन: वेदों को दे दिया।

इस प्रकार भगवान विष्‍णु जी ने मत्‍स्‍य रूप धारण करके वेदों का उद्धार तो किया ही साथ ही संसार के प्राणियो का भी कल्‍याण किया। भगवान‍ विष्‍णु जी इसी प्रकार समय-समय पर अवतार लेते है सभी का कल्‍याण करते है।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको मत्‍स्‍य द्वादशी व्रत कथा Matsya Dwadashi Vrat Katha in Hindi के बारे में विस्‍तार से बताया है। यदि लेख में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

यह भी पढ़े-

You may also like our Facebook Page & join our Telegram Channel for upcoming more updates realted to Sarkari Jobs, Tech & Tips, Money Making Tips & Biographies.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *