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Morai Chhath Vrat Katha in Hindi | मोराई छठ व्रत की कथा हिंदी में पढ़े

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Morai Chhath Vrat ki katha Hindi me | मोराई छठ व्रत की कथा यहा से पढ़े | Chhath Katha in Hindi | मोराई छठ व सूर्य छठ व्रत की कथा | Morai Vrat katha Read in Hindi

मोराई छठ:- दोस्‍तो मोराई छठ का व्रत या पर्व भाद्रपर मास की शुक्‍ल पक्ष की षष्‍ठी काे आता है। इस वर्ष यह व्रत 12 सितम्‍बर 2021 रविवार को रहेगा। इस दिन औरत संतान प्राप्ति व पुत्र की लम्‍बी आयु की कामना के लिए सूर्य भगवान का व्रत रखती है। किन्‍तु इस बार मोराई छठ रविवार के दिन होने के कारण इस व्रत का विशेष महत्‍व रहेगा। क्‍योकि रविवार सूर्य भगवान का वार होता है। इस दिन जो भी स्‍त्री व पुरूष श्रद्धा व भक्ति भाव से सूर्य भगवान को अर्पित मोराईछठ का व्रत रखते है। उनकी सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है।

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वैसे ताे सूर्य छठ साल में कई बार आती है। किन्‍तु जो माेराई छठ है वह वर्ष में भाद्रपद शुक्‍ल पक्ष की षष्‍ठी को आती है। इस दिन सत्‍यनारायण (सूर्य भगवान) की पूजा-अर्चना करने से मनुष्‍य अपने सभी रोगो व बिमारीयों से मुक्‍त हो जाता है। ऐसे में अगर आप भी मोराई छठ का व्रत रखते है तो इस लेख के माध्‍यमसे बताई गई सभी जानकारी व व्रत कथा पूजा विधि इत्‍यादि को पढ़कर या फिर किसी अन्‍य से सुनकर आप अपना व्रत पूर्ण कर सकती है।

Morai Chhath Vrat Katha
Morai Chhath Vrat Katha

मोराई छठ पूजा सामग्री (Morai Chhath Puja Samagri)

मोराई छठ व्रत () खोलने के लिए कुछ आवश्‍यक सामग्रीया है जो की इस प्रकार है:-

  • गंगाजल
  • रौली-मौली
  • लाल चन्‍दन
  • कपूर चावल
  • कनेर व गुलाब के फुल
  • लाल व पीला कपड़ा
  • गेहूँ
  • गूड़
  • तॉबे व पीपल के बर्तन
  • धूप व दीप

मोराई छठ व्रत की पूजा विधि (Morai Chhath Puja Vidhi)

  • मोराई छठ का व्रत रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को व्रत वाले दिन प्रात:काल जल्‍दी उठकर गंगा नदी में स्‍नान करे। अगर आपके यहा पर गंगा नदी नही है तो आप अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्‍नान करे।
  • इसके बाद ताँबे या पीतल के लौटे में जल भरकर उसमें थोड़ से चावल व फूल डालकर भगवान सूर्य को पानी चढ़ाऐ।
  • सूर्य भगवान को पानी अर्ध्‍य देते हुए वरूण रूप को प्रमाण कर ”ऊॅ रवये नम: मंत्र का तीन बार जाप करे।
  • मंत्र बोलने के बाद लौटे को ऊल्‍टा रखकर अपने दोनो हाथ जोडकर भगवान सूर्य से बुद्धि, शक्ति, स्‍वास्‍थ्‍य, निरोगी काया की कामना करे।
  • जिनके संतान नहीं है वो संतान प्राप्ति को वरदान मांगे।
  • इसके बाद रौली व मौली, धूप, दीप आदि से भगवान सूर्य की पूजा पूरे विधि-विधान से करे।
  • पूजा करने के बार सूर्य देव की आरती करे प्रसाद लगाए।
  • सबसे अन्‍त में सूर्य की पूजा से सबंधित सभी सामग्रीया जैसे तांबे का बर्तन, लाल व पीला वस्‍त्र, गेंहूँ, गूड़, लाल चन्‍दन आदि और यथा शक्ति रूपया दान करे।
  • सूर्य छिपने से पहले ही व्रत रखने वाले स्‍त्री व पुरूष भोजन ग्रहण करे। इस दिन एक समय बिना नमक का भोजन करना चाहिए।
  • इस दिन सूर्य भगवान के अलावा माता छठी की भी पूजा की जाती है।
Morai Chhath Vrat Katha
Morai Chhath Vrat Katha

मोराई छठ व्रत कथा (Morai Chhath Vrat Katha in Hindi)

प्राचीन समय की बात है एक गॉंव में बुढि़या रहती थी। उसके एक बेटा था बेटा जब बड़ा हुआ तो बुढि़या ने बेटे का विवाह कर दिया । वह बुढि़या छठी माता की भक्‍त थी और प्रतिवर्ष छठी माता का व्रत पूरी श्रद्धा के अनुसार रखती थी। परन्‍तु बुढि़या मॉं की बहू नए विचारो वाली व मॉडन होने के कारण वह पूजा-पाठ में बिल्‍कुल विश्‍वास नही करती थी।

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एक बार बुढि़या अम्‍मा माता छठी का व्रत खोलने की तैयारी कर रही थी। यह देखकर बुढि़या की बहू उन पर हंसने लगी और कहा अम्‍मा दुनिया कहा से कहा पहुच गई। लोग आसमान को छू रहे है। और आप आज के समय में भी इती अंधविश्‍वासी हो। किन्‍तु बुढिया ने अपनी बहू की बातो को अनसुनी कर दि और वह पूजा की तैयारी करने लग गई। बहू ने फिर से का अम्‍मा ये सब बेकार की बाते है। अगर आप इस उम्र में भुखी रहोगी तो बीमार पढ़ जाओगी।

नई बहू की बाते सुनकर बुढिया मुस्‍कराई और बोली बहू मेंरी शादी के बाद मेंरे कोई संतान नही हुई। तब मुझे किसी ने यह बताया की मैं छठी माता का व्रत व पूजा करूगी तो मुझे संतान का सुख मिलेगा। जब मैने माता छठी का व्रत करना शुरू किया तो कुछ दिनो के बाद तेरा पति को छठी मैया ने मेरी गोद में डाल दिया। यदि तू भी इस वर्ष छठी माता का व्रत करेगी तो माता तुम्‍हार पुकार सुनेगी और तुम्‍हारी गोद भी हरी कर देगी।

किन्‍तु नऐ विचारो वाली बहू ने बुढिया की बाती नही मानी और बोली मुझे तो सुन्‍द पति मिल गया और मेरी जिदंगी सुख पूर्वक व्‍यतीत हो रही है। बुढि़य के लाख समझाने के बाद भी बहू पर कोई असर नहीं हुअ वो नासतिक थी। इतने मैं बुढी अम्‍मा का बेटा वहा आया और अपनी पत्‍नी से बाेला तुम्‍हे पूजा-पाठ नही करनी तो मत करो। किन्‍तु मेरी मॉं से झगडाे मत और जाकर तैयार हो जाओ छठ माता की पूजा के लिए घाट पर जाना है।

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बहू बिना रूचि पूजा के लिए घाट पर चली गई। लेकिन वहा पूजा करने के बजाय वह छठी माता का मेला देखने लगती है। और इधर-उधर घूम कर मेले का आंनद लेती है। कुछ देर बाद उसका पति उसे पूजा के स्‍थान पर नहीं पाकर वह डूडने लग जाता है। उसे वह हलवाई की दुकानो के पास स्‍वादिष्‍ट्र मिठायो का आंनद लेती हुयी नजर आती है। पति उससे जाकर कहता तुम यहा तक आयी हो तो कुछ देर मॉं के साथ पूजा में बैठ जाओ।

बहू बोली नही मैं पूजा पाठ मैं नही बैठूगी मैं तो मेला घूमूगी। आप और आपकी मॉं दोनो ही करो ये पूजा-पाठ। पत्‍नी की बात सुनकर पति वहा से चला जाता है और स्‍नान के लिए जैसे की नदी में डूबकी लगाता है। तो वह नदी में डूब जाता है और जोर-जोर से चीखता है तो वहा मौजूद सभी लोग उसकी आवाज सुनकर दौडते है किन्‍तु इतने में वह डूब जाता है।

जैसे ही बुढिया को पता लगता है की उसका बेटा नदी में डूब गया। वह जोर-जोर से रोने लगती है और माता छठी बोली हे माता मुझ से ऐसी कौनसी गलती हो गई जिसकी इतनी बड़ी सजा दी है। बोलो मा ऐसी क्‍या गलती हो गई जिसके कारण मेरी गोद सूनी कर दी। यदी आप मुझे अपना पुत्र वापस नही लौटाओगी तो मैं भी इसी नदी में कूदकर जान दे दूगी।

Morai Chhath Vrat Katha
Morai Chhath Vrat Katha

उधर मेले में शोर मचा की घाट पर एक व्‍यक्ति डूब गया। यह सुनकर बहू दौडती हुयी पूजा के स्‍थान पर आयी तो देखा की उसकी सासूमां जोर-जोर से पुत्र वियोग में रो रही थी। बहू को सदमा लग जाता है जिसक कारण वह बुढिया से कहती है मैने पहले ही कहा था। छठ पूजा पाठ के चक्‍कर में मत पढ़ो। और देखो आज मेरी मांग सूनी हो गई।

यह घटना देखकर वहा मौजूद सभी लोग माता छठ से प्रार्थना करते है ”हे मॉं इस बुढिया की पुकार सुन लो, इसे इसका बेटा लौआ दो। छठी मैया तो दयालु है वह अपने भक्‍तो की बात तुरन्‍त सुनती है। इधर पुत्र वियोग में बुढिया जैसे ही जान देेने के लिए नदी में कूदने लगती है तबी अचानक नदी में से एक जोरदार लहर आती है। और उसी लहर में से बुढिया का बेटा पानी से बाहर आ जाता है।और वह खड़ा होकर अपनी मॉ के पास आ जाता है। यह दृश्‍य देखकर छठ घाट पर मौजूद सभी लोगो की आंखे खुली की खुली रह गई।

अपने बेटो को वापस पाकर बुढिया खुशी से रोने लगती है। इतने मैं तेज गर्जना के साथ छठी मैया प्रक्रट हुयी और बोली मै कभी अपने बच्‍चो व भक्‍तो का बुरा नही करती। मैं तो तुम्‍हारे बेटे को नदी में डूबाकर तुम्‍हारी बहू की आंखो से अज्ञान का पर्दा हटाया है। इसके बाद बुढिया की बहू माता छठी से क्षमा याचना करी और माता ने उसे क्षमा कर दिया। और कहा इस कलियुग में जो कोई पूरी श्रद्धा से मेरा व्रत व पूजा पाठ करेगा उसकी सभी मनोकामनाए पूर्ण होगी।

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