Narak Chaturdashi Vrat Katha in Hindi | रूप चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) व्रत कथा व पूजा विधि यहा से पढ़े

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Narak Chaturdashi Vrat Katha in Hindi | रूप चतुर्दशी (नरक चतुर्दशी) व्रत कथा व पूजा विधि यहा से पढ़े | Narak Chaturdashi Story | नरक चतुर्दशी क्‍यों मनाते है | Narak Chaturdashi Vrat katha | नरक चतुर्दशी की कथा | Narak Chaturdashi Vrat Vidhi | नरक चतुर्दशी 2022 | Narak Chaturdashi 2022 | रूप चतुर्दशी की कथा | Chaturdashi Vrat katha | रूप चतुर्दशी व्रत कथा सुनाइएं | Roop Chaturdashi Vrat katha in Hindi | काली चौदस कब है | Kali Chaudas Vrat katha in Hindi

Narak Chaturdashi 2022 Date:- नरक चतुर्दशी प्रतिवर्ष कार्तिक महीने की कृष्‍णपक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। यानी धनतेर त्‍यौहार के दूसरे दिन को नरक या रूप चतुर्दशी कहा जाता है। हमारे हिंदी पंचाग के अनुसार कुल 24 चतुर्दशीया है जिनमें से एक है नरक चतुर्दशी जिसे कई जगहो पर कार्तिक चतुर्दशी (Kartik Chaturdashi) के नाम से जाना जाता है। में से एक है। जिसे रूप चतुर्दशी व छोटी दीपावली के रूप में मनायी जाती है। पौराणिक मान्‍यताओ के अनुसार जो कोई स्‍त्री पुरूष नरक चतुर्दशी का व्रत पूरे श्रद्धा भाव से करता है तो उसे मृत्‍यु के बाद कभी नरक नही मिलता। ऐसे में यदि आप इस व्रत के बारे में विस्‍तार से जानना चाहते है तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

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नरक चतुर्दशी का महत्‍व (Narak Chaturdashi Kya Hai)

नरक चतुर्दशी का मतलब क्‍या है:- हिदीं पंचाग के अनुसार नरक चतुर्दशी प्रतिवर्ष कार्तिक मास की कृष्‍णपक्ष की चौदस को आती है। जिसे रूप चतुर्दशी व छोटी दिवाली के रूप में भी मनाते है। धार्मिक मान्‍यताओ के अनुसार इस चतुदर्शी वाले दिन कोई व्‍यक्ति नरक से मुक्‍त‍ि पाने के लिए प्रात: तेल लगाकर अपामार्ग(चिचड़ी) पौधे सहित जल में स्‍नान करेगा। तो उसे अवश्‍य मुक्ति प्राप्‍त होगी। जिसके बाद शाम को यमराज के लिए दीपदान करना चाहिए जिस कारण वो आप पर प्रसन्‍न होगे।और आपको मृत्‍यु के बाद नरक में वास नही करने देते है। शास्‍तो व पुराणों तथा महाभार के अनुसार ऐसा कहा गया है की इसी दिन भगवान श्री कृष्‍ण जी ने नरकासुर नामक दैतय का वध करके उसे मुक्ति दि थी। जिस कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है।

Narak Chaturdashi Vrat Katha in Hindi, काली चौदस
Narak Chaturdashi Vrat Katha in Hindi

Narak Chaturdashi Vrat Ka Shub Muhurat in Hindi (नरक चतुर्दशी शुभ मुहूर्त)

  • अभ्‍यंग स्‍नान का मुहूर्त:- 24 अक्‍टूबर 2022 को सुबह 05:08 मिनट से लेकर 06:31 मिनट तक
  • कुल अवधि:- 01 घंटा 23 मिनट
  • नरक चतुर्दशी तिथि प्रारंभ:- 23 अक्‍टूबर 2022 शाम 06:03 मिनट पर
  • नरक चतुर्दशी तिथि समाप्‍त:- 24 अक्‍टूबर 2022 शाम 05:27 मिनट पर
  • नरक चतुर्दशी कब है:- 24 अक्‍टूबर 2022 सोमवार को है
  • काली चौदस मुहूर्त:- 23 अक्‍टूबर 2022 रात्रि 11:42 मिनट से लेकर 24 अक्‍टूबर को प्रात: 12:33 मिनट तक

नरक चतुर्दशी व्रत विधि (Narak Chaturdashi Vrat Vidhi)

  • नरक चतुर्दशी का व्रत रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को प्रात: सूर्य उगने से पहले स्‍नान करने का विधान है। स्‍नान के समय अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा है) को शरीर प स्‍पर्श (लगाकर) स्‍नान करना चाहिए।
  • स्‍नान के समय अपामार्ग को लगाते समय इस महामंत्र का जाप तीन भार मस्‍तक घुमाकर करना चाहिऐ जो की इस प्रकार है:- हर पापमपामार्ग भ्राम्‍यमाण: पुन: पुन:।।-3
  • स्‍नान आदि से मुक्‍त होने के बाद दक्षिण्‍ दिशा की तरफ अपना मुह करके निम्‍न मंत्रो हा जाप करते हुए तिलयुक्‍त से तीन बारे जलांजलि देना चाहिए।
  • यह जलांजलि आपको तन-मन-धन-तर्पण से करनी होगी, जिससे के प्रभाव से आपके सभी पापो का विनाश हो जाऐगा। ऊँ यमाय नम:, ऊँ धर्मराजाय नम:, ऊँ मृत्‍यवे नम:, ऊँ अन्‍तकाय नम:, ऊँ वैवस्‍वताय नम:, ऊँ कालाय नम:, ऊँ सर्वभूतक्षयाय नम:, ऊँ औदुम्‍बराय नम:, ऊँ दध्राय नम:, ऊॅा नीलाय नम:, ऊँ परमेष्ठिने नम: ऊँ वृकोदराय नम:, ऊँ चित्राय नम:, ऊँ चित्रगुप्‍ताय नम:।। इस सभी महामंत्रो का जाप करे।
  • इस तरह सभी को तर्पण करना चाहिऐ जिसके बाद शाम को भगवान यमराज को दीपदान करने का विधान है। तथा साथ ही भगवान श्रीकृष्‍ण जी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
  • ऐसा कहा गया है की इसी दिन रूप चतुर्दशी होती है और रूप चतुर्दशी का व्रत रखने वाले भगवान कृष्‍ण जी की पूजा करनी चाहिए।
  • इस दिन जो भी व्‍यक्ति पूरे श्रद्धा के अनुसार श्री कृष्‍ण जी की पूजा करेगा उसको मृत्‍यु उपंरात वैकुंठ लोक मिलता है।

रूप चतुर्दशी 2022

नरक चतुर्दशी हर साल कार्तिक मास की कृष्‍ण पक्ष की चतुर्दशी (चौदस) को होती है जिसे रूप चतुर्दशी व काली चौदस के नाम से जाना जाता है और इस बार तो चतुर्दशी और दीपावली का त्‍यौहार एक ही दिन पड़ रहे है। इसी लिए इस चतुर्दशी का शुीा योग दुबारा 27 वर्षो के बाद पड़ रहा है। कई जगहो पर इसे कार्तिक चौदस के नाम से भी जाना जाता है

नरक चतुर्दशी व्रत कथा (Narak Chaturadshi Vrat Ki Katha)

Narak Chaturadashi Vrat katha in Hindi:- प्राचीन समय में रन्तिदेव नामक राजा हुऐ करता थे। वह राजा अपने पूर्व जन्‍म में एक बड़े ही धर्मात्‍मा व ज्ञानी विद्धान थे। और इस जन्‍म में भी वह दान-पुण्‍य आदि करता था। जब वह राजा बूढ़ा हो गया और मृत्‍यु का समय निकट आया तो यमदूत उसे नरक में ले जाने के लिए आऐ। राजा ने उन सभी यमदूताे से कहा की मैं तो दान दक्षिणा तथा सत्‍कर्म करता हॅू। फिर भी मुझे नरक ही क्‍यों ले जा रहे हो। राजा की बात सुनकर यमदूतो ने कहा की हे राजन एक बार तुम्‍हारे द्वार से भूख से व्‍याकुल ब्राह्मण लौट गया था। इसलिए तुम्‍हें नरक में जाना पड़ रहा है।

यमदूतो की बात सुनकर वह राजा उनके विनती करते हुऐ बोला की आप सभी मेरी आयु एक वर्ष और बढ़ा दीजिऐ। यमदूतो ने बिना सोचे समझे राजा की प्रार्थना को स्‍वीकार करते हुऐ उसे एक वर्ष की आयु और प्रदान कर दी। जिसके बाद यमदूत तो यमलोक चले गऐ। फिर राजा ने ऋषियों व मुनियों के पास जाकर इा पाप से मुक्‍ति पाने का उपाय पूछा। तो ऋषियों ने बताया की हे राजन यदि तुम कार्तिक मास की कृष्‍णपक्ष की चतुर्दशी का व्रत पूरे विधि-विधान से करोगे। तथा भगवान कृष्‍ण जी की पूजा अर्चना करके ब्राह्मणों को भोजन कराकर यथा शक्ति दक्षिणा देकर अपने अपराध की क्षमा याचना करोगे।

तो तुम्‍हे इस पाप से छुटकारा मिल जाऐगा। जिसके बाद राजा ने कार्तिक माह की कृष्‍ण पक्ष की चतुर्दशी (चौदस) का व्रत पूरे विधिवत रूप से किया। और वह अपने जीवन में सुख भोगता हुआ मृत्‍यु के बाद वैकुंठ लोक को चला गया।

रूप चतुर्दशी व्रत कथा (Roop Chaturdashi Vrat Katha in Hindi)

Narak Chaturdashi Vrat Katha in Hindi:- आपको बता दे की इस चतुर्दशी के व्रत वाले दिन सौन्‍दर्य रूप श्री कृष्‍ण जी की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्‍यताओ के अनुसार ऐसा करने से भगवान उस व्‍यक्ति को सुन्‍दरता प्रदान करते है।

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एक समय भारतवर्ष में ”हिरण्‍यगभ” नामक नगर में एक योगीराज रहते थे। एक दिन वह योगीराज अपने मन को एकाग्र करके भगवान की तपस्‍या में लीन होना चाहा। और तपस्‍या के लिए समाधि भी लगा ली। और वह समाधि में बैठ गऐ किन्‍तु कुछ दिनो के बाद ही उनके शरीर में कीड़े पड़ गऐ। ऑखों के रोओं, भौहों व सिर के बालो में जुऐ पड गऐ। जिससे योगीराज बहुत ज्‍यादा दुखी हुऐ। उसी समय नारदमुनि वहॉ से जा रहे थे तो उस योगिराज ने नारद जी से पूछा की मैं समाधि मैं था तब मेरी दशा ऐसी क्‍यों हो गई। तब नारदजी ने बताया की हे योगीराज तुम भगवान का चिन्‍तन तो करते हो, किन्‍तु देह आचार का पालन नही करते। इसीकारण तुम्‍हारी यह दशा हो गई है।

तब योगीराज ने इसका देह आचार के विषय में नारदजी से पूछा। नारदजी बोले देह आचार के विषय में जानने से अब कोई लाभ नही है। पहले तुम्‍हे जो मैं बताता हॅू तुम उसे करो, फिर देह आचार के बारे में बताऊगा। हे योगीराज तुम इस बार आने वाली कार्तिक मास की कृष्‍णपक्ष की चतुर्दशी को व्रत रखकर भगवान विष्‍णु जी की पूजा करना। यदि तुम ऐसा करोगे तो तुम्‍हारा श‍रीर पहले जैसा हो जाऐगा।

ऐसा कहकर नारद जी तो वहा से चले गऐ। जिससे बाद वह योगीराज कार्तिक माह की कृष्‍ण पक्ष की चौदस को पूरे विधिवत रूप से व्रत किया। तथा पूरे श्रद्धा भाव से भगवान विष्‍णु (कृष्‍णजी) की पूजा अर्चना करी। ऐसा करने से उस योगी का शरीर पहले की भांति हो गया। इसी कारण इस चौदस को रूप चतुर्दशी भी कहा जाता है।

Choti Diwali in Hindi (छोटी दीपावली 2022)

इस दिन सूर्योदय से पहले आटा, तेल, हल्‍दी आदि का उबटन मलकर स्‍नान करे। फिर एक थाली में एक चौमुखी दीपकर तथा 16 छोटे दीपक लेकर उनमें तेल बाती डालकर जलावें। फिर रोली, खील, गुड़, धूप, अबीर, गुलाल, फल, फूल आदि से पूजा करे। पहले घर के पुरूष लोग पूजा करे उसके बाद ही स्त्रिया पूजा करे। पूजा के बाद सब दीपको को घर के अन्‍दर प्रत्‍येक स्‍थान पर रखे दे। चारमुख वाले दीपक को घर के मुख्‍य दरवाजे पर रख देना है। जिसे आगे माता लक्ष्‍मी का चौक पूरकर धूर दीप करे दे।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको नरक चतुर्दशी व रूप चतुर्दशी Narak Chaturdashi Vrat Katha in Hindi के बारे में विस्‍तार से बताया है। जो केवल पौराणिक मान्‍यताओ, कथाओं व पंचाग के अनुसार बताया है। यदि आपको ऊपर लेख में बताई गई जानकरी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमेंट अवश्‍य करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

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