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National Education Day 2021 in Hindi | राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस के बारे में विस्‍तार से जाने

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राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस 2021 प्रतिवर्ष 11 नवबंर को मनाया जाता है। जो की इस बार भी 11 नवबंर 2021 गुरूवार के दिन पूरे भारतवर्ष में बडे ही उल्‍लास के साथ मनाया जाऐगाा। यह दिवस स्‍वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के जन्‍म दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिनका जन्‍म 11 नवबंर 1888 में हुआ था। जिनका शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण योगदान रहा है।

इसी उपलक्ष्‍य में प्रतिवर्ष 11 नवबंर को राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में यदि आप राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस से जुड़ी समस्‍त जानकारी पाना चाहते है तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

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राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस 2021

मौलाना अब्‍दुल कलाम आजाद (National Education Day in Hindi)

अब्‍दुल कलाम का जन्‍म 11 नवम्‍बर 1888 में मक्‍का (सऊदी अरब) में हुआ था। इनके पिता का नाम मोहम्‍मद खैरूदीन जो की एक बंगाली मौलाना हुआ करते थे। तथा साथ ही बहुत बड़े विद्धान की गिनती में आते थे। और इनकी माता अरबी मूल की थी जो की मदीना की एक मौलवी के रूप में कार्य करती थी। मौलाना जब 2 वर्ष के थे तो इनके पिता अपने परिवार को मक्‍का से भारत आ गऐ और यही पर स्‍थायी निवास करने लगे।

जब मौलाना 13 वर्ष के हुऐ तो उनकी शादी जुलेखा बेगम से हो गई। आपको बता दे दोस्‍तो मौलाना का परिवार रूढि़वादी था। अर्थात इसी लिए वह शिक्षा में आगे बड़े, मौलाना को सबसे पहले उनके पिता ही शिक्षा देते थे। मौलाना को अरबी, फारसी भाषा सीखने के बाद दर्शनशास्‍त्रख्‍ ज्‍यामिति, गणित और बीजगणित का का ज्ञान लिया। जिसके बाद बंगाली व उर्दू भाषा को सिखा। ऐ पढ़ाई में इतने अव्‍वल थे के इन्‍हाने बाद में अंग्रेजी भी सीख ली।

मौलाना का जीवन (Day of National Education 2021)

मौलाना ने अपने युवा काल में बहुत सी पत्रिकाओं में कार्य किया। और वह अलग-अलग साप्‍ताहिक समाचार पत्र अल-मिस्‍वाह के संपादक बने। जिसके बाद मुस्लिम धर्म का पवित्र ग्रंथ कुरान के सिद्धातो की रचना अपनी भाषा में की। इन्‍हाेने अपने जीवन में अफगानिस्‍तान, इराक, मिस्‍त्र, सीरिया व तुर्की आदि देशो की यात्रा थी करी है। और यही से उनकी सोच राष्‍ट्रवादी क्रांतिकारी के रूप में बद गई।

जिसके बाद ऐ श्री अरबिंदो और श्‍याम सुन्‍दर चक्रवती से मिले और दोनो के साथ मिलकर भारत को स्‍वतंत्रता दिलाने के लिए राजनीति में आ गऐ। किन्‍तु हमारे देश में मुस्लिम व हिन्‍दु धर्म में एक दूसरे से मतभेद थे। और इसी मतभेद को दूर करने के लिए मौलाना अब्‍दुल कलाम ने बहुत कोशिशे की थी। जिनमे से वो 60 प्रतिशत कामयाब भी हुऐ।

शायद आप सभी में से बहुत कम लोग यह जानते होगे की मौलाना अबुल कलाम आजाद का असली नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुदीन था। जो एक प्रसिद्ध भारतीय मुस्लिम विद्धान हुआ करते थे। मौलाने ने अपने जीवन में महात्‍मा गांधी के प्ररेणा को अपनाया था। वे एक ऐसे नेता थे जिन्‍होने मुस्लिम राष्‍ट्र पाकिस्‍तान के लिए विरोध किया थाा।

सन 1923 में भारत के राष्‍ट्रीय काग्रेंस के प्रेसीडेंट बने जिसके बाद 1940 से लेकर 1945 तक भी रहे। 15 अगस्‍त 1947 में देश आजाद होने के बाद सन 1952 में मौलाना जी उत्तरप्रदेश राज्‍य के समपुर जिले में सांसद भी रहे है। और वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने। जिसके बाद उन्‍होने विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग की स्‍थापना करी थी।

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वे धारासन सत्याग्रह के अहम इन्कलाबी (क्रांतिकारी) थे। वे 1940-45 के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे जिस दौरान भारत छोड़ो आन्दोलन हुआ था। कांग्रेस के अन्य प्रमुख नेताओं की तरह उन्हें भी तीन साल जेल में बिताने पड़े थे। स्वतंत्रता के बाद वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना उनके सबसे अविस्मरणीय कार्यों में से एक था।

National Education Day in Hindi
National Education Day in Hindi

राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस का इतिहास (National Education Days)

देश में हो रहे मानव संसाधन विकास मंत्रालय कार्यक्रम के दौरान 11 नवबंर 2008 में राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में घोषण करी। क्‍योकि भारत में मौलाना के शिक्षा के स्‍तर को ऊचा करने के लिए काफि योगदान रहे है। जिसके चलते वो एक महान विद्धान, स्‍वतंत्रता सेनानी, प्रसिद्ध शिक्षाविद तथा स्‍वतंत्र भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री रहे। जिन्‍हे सन 1992 में देश का सर्वोच्‍च समान्‍न ”भारत रत्‍न” से सम्‍मानित किया गया है। इसी लिए उनकी याद में प्रतिवर्ष राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है।

राष्‍ट्रीय शिक्षा का महत्‍व (Education Day in Hindi)

राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस 2021 मौलाना जी ने अपने जीवन काल में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान और विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग की स्‍थापना में विशेष महत्‍व दिया था। ताकी देश के सभी विद्यार्थी अपनी आगे की पढ़ाई के लिए जुटे रहे। और पूरे देश में उच्‍च शिक्षा की नीवं डल जाऐ। उनका कहना था की प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा में व्‍यतीत करना चाहिए। जिसके बाद उन्‍होने सन 1949 में आधुनिक विज्ञान में जारकारी देने के लिए पूर्ण रूप से योगदान दिया। और ब्रिटिश सरकार की अलोचना के लिए अल-हिलाल नामक उर्दू में साप्‍ताहिक पत्रिका (अकबार) को शुरू किया।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपकोराष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस 2021 अर्थात मौलाना अबुल कलाम आजाद जी के बारे में कुछ महत्‍वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। यदि आपको हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

यह भी पढ़े-

प्रश्‍न:- मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्‍म कब हुआ था।

उत्तर:- 11 नवबंर 1888

प्रश्‍न:- राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस क्‍यो मनाया जाता है

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उत्तर:- शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मौलाना अबुल कलाम आजाद के योगदान को लेकर

प्रश्‍न:- राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस प्रतिवर्ष कब मनाया जाता है।

उत्तर:- 11 नवबंर

प्रश्‍न:- राष्‍ट्रीय शिक्षा दिवस 2021 की थीम क्‍या है।

उत्तर:- ”महिलाओं की शिक्षा’, अनिवार्य सार्वभौमिक प्राथमिक श‍िक्षा”, व्‍यावसायिक शिक्षा का महत्‍व है।

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