Premanand Maharaj Ji Biography in Hindi~प्रेमानंद महाराज जी का जीवन परिचय

Premanand Maharaj Ji Biography in Hindi~प्रेमानंद महाराज जी का जीवन परिचय

Premanad Ji Maharaj Biography in Hindi:- आज के समय में वृज की प्‍यारी श्री राधारानी जी के परम व दिव्‍य भक्‍त श्री प्रेमानंद महाराज जी है जो वृंदावन में निवास करते है। गुरूदेव जी व उनके शिष्‍यों का कहना है की महाराज जी को शाक्षात भगवान भोलेनाथ जी ने दर्शन दिए है। आज के समय में सबसे ज्‍यादा च‍र्चित व प्रसिद्ध सहनशील स्‍वभाव के गुरूदेव जी प्रेमानंद जी महाराज है। जब से प्रेमानंद महाराज जी को भगवान भोलेनाथ ने दर्शन दिया हे उन्‍होने अपना परिवार सबकुछ त्‍याद दिया है। और बृज की कुमारी राधारानी जी की भक्ति में लीन रहने लगे है।

गुरूदेव जी आज लोगों को भक्ति का मार्ग बताते हुए उनको इस जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने का रास्‍ता बताते है। देश-विदेशों से लोग इनका भजन-सत्‍संग सुनने के लिए बड़ी श्रद्धा से आते है प्रेमानंद जी महाराज का बचपन का नाम अनिरूद्ध कुमार पांडे है जब से इनको भगवान शिवजी के दर्शन हुए है इनका नाम प्रेमानंद महाराज पड़ गया है आज लोग इनको केवल और केवल प्रेमानंद महाराज के नाम से जानते है।

Premanand Maharaj Ji Biography in Hindi~प्रेमानंद महाराज जी का जीवन परिचय

Premanand Ji Maharaj Biography in Hindi प्रेमानंद महाराज का जीवन परिचय

नाम श्री प्रेमानंद महाराज जी (Premanand Ji Maharaj)
बचपन का नाम अनिरूद्ध कुमार पांडे
जन्‍म कब हुआ लगभग 1963-64 में
जन्‍म स्‍थान अखरी गांव, सरसोल ब्‍लॉक कानपुर (उत्तर प्रदेश राज्‍य)
माता का नाम रमा देवी
पिता का नाम श्री शंभू पाण्‍डेय
पत्‍नी का नाम अवैवाहिक
जाति ब्राह्मण
धर्म हिंदू
राष्‍ट्रीयता भारतीय
घर का त्‍याद 13 साल की उम्र में मात्र
गुरू देव श्री गौरंगी शरण जी महाराज
गुरू जी की सेवा लगभग 10 साल तक
महाराज जी की उम्र लगभग 60 साल
भक्ति राधारानी जी
ऑफिशियल वेबसाइट https://vrindavanrasmahima.com/

प्रेमानंद जी महाराज का जन्‍म Premanand Ji Maharaj Birth

प्रेमानंद जी महाराज का जन्‍म एक ब्रह्मण परिवार में अखरी गांव सरसोल ब्‍लॉक उत्तर प्रदेश राज्‍य के कानपुर शहर में हुआ है। इनकी माता का नाम रमा देवी और पिता का नाम शंभू पाण्‍डेय जी था। इनका बचपन का नाम अनिरूद्ध कुमार पांडे है प्रेमानंद जी बचपन से ही सभी बच्‍चों से अलग एक बौद्धिक स्‍तर वाला लड़का था। इन्‍होने अपनी शुरूआती पढ़ाई अपने गांव के एक निजि स्‍कूल से किया, जब प्रेमानंद महाराज जी कक्षा 5वीं में पढ़ाई करते थे। उसी दौरान इनका मन गीता पाठ के साथ आध्‍यात्‍मक भक्ति में और भी ज्‍यादा रूचि बढ़ने लग गई, और इस प्रकार धीरे-धीरे अनिरूछ कुमार पांडे महज 13 साल की उम्र में अपना घर-परिवार सबकुछ त्‍याद दिया।

प्रेमानंद महाराज की शिक्षा कितनी है Premanand Maharaj Ji ki Education

अहनिरू कुमार पांडे जी के घर का माहौल यानी उसके पिताजी आध्‍यात्मिक थे, वो भी भक्ति-भावना में अधिक ध्‍यान रखते है इसी लिए इनको भी बचपन से ही हनुमान चा‍लीसा, गीता पाठ आदि का अध्‍ययन करना शुरू कर दिया था। प्रेमानंद जी का बचपन बिल्‍कुल साधारण तरह से व्‍यतीत हुआ है इनके पिताजी व माता जी भी धार्मिक प्रवृति के होने से घर में भक्ति भावना का अधिक प्रभाव रहता था। जब प्रेमानंद महाराज जी कक्षा 5वीं में पढ़ाई कर रहे थे तो इनका मन धार्मिक प्रवृति की ओर जुड़ने लग गया था।

एक बार प्रेमानंद महाराज जी ने कहा था की मैं केवल कक्षा 9वीं तक अध्‍ययन किया हुआ है उसके बाद मैने पूरी तरह से आध्‍यात्मिक जीवन को धारण कर लिया था। अपना घर-परिवार सभी रिश्‍तदार व नातेदारों के मोह-माया के बंधन से छुटकारा पाकर ईश्‍वर की खोज में निकल पड़ा। उस दौरान अनिरूद्ध कुमार पांडे जी की उम्र महज 13 साल था, शायद ही कलयुग में कोई ऐसा महात्‍मा होगा जो महज 13 साल की उम्र में ईश्‍वर को पाने की इच्‍छा से सबकुछ त्‍याद दिया है।

प्रेमानंद महाराज जी का परिवार Premanand Maharaj ki Family

जब भी कोई प्रेमानंद महाराज जी का नाम सुनता है तो अधिकतर लोगों के मन में यह सवाल उठता आखिर प्रेमानंद महाराज कौन है और इनका परिवार कहा पर रहता है साथ में किस जगह पर रहते है। इनका जन्‍म यूपी राज्‍य के कानपुर शहर में हुआ है इनका माता का नाम रमा देवी और पिता का नाम शंभू पांडे है। माता-पिता दोनो ही धार्मिक प्रवृत्ति के है इनके बड़ भाई भी पूजा-पाठ में ज्‍यादा विश्‍वास करते है। प्रेमानंद महाराज जी के दादाश्री भी एक सन्‍यासी का जीवन व्‍यतीत करते थे, ऐसे में शुरू से ही प्रेमानंद महाराज जी ने अपने घर का वातावरण पूरी तरह से भक्ति-भावना व आध्‍यातिमिक देखने के कारण इनका मन भी बड़ा जल्‍दी ही इस कोई चला गया था।

प्रेमानंद महाराज जी का आश्रम कहा है Premanand Ji Maharaj ka Ashram Kahan Hai

प्रेमानंद जी महाराज सदैव पीले रंग के वस्‍त्र धारण करते है और अपने आश्रम के सभी शिष्‍यों को भी पीला रंग का वस्‍त दिया हुआ है। आज लोगों को ज्ञान की बाते, और अच्‍छे प्रवचन देते है अगर आप भी राधारानी के विशेष भक्‍त श्री प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम में जाकर उनसे भेट करना चाहते है। तो पहले आपको अपने घर से वृंदावन धाम आना पड़ेगा।

प्रेमानदं महाराज जी का एड्रेस:- श्री हित राधा केली कुंज वृंदावन परिक्रमा मार्ग (वराह घाट भक्ति वेदांत धर्मशाला के सामने) उत्तर प्रदेश राज्‍य वृंदावन – 281121

आप सभी इस एड्रेस पर जाकर श्री प्रेमानंद महाराज जी के दर्शन का सौभाग्‍य प्राप्‍त कर सकते है इनके मिलने का समय रात्रि के 2 बजे से आरंभ होता है। इसके अलावा आप इनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकार भी अधिक जानकारी प्राप्‍त कर सकते है।

प्रेमानंद महाराज जी के बारें में बताइए Biography of Premanand jI maharaj

जब बाल्‍यकाल में ही प्रेमानंद महाराज जी ने अपना घर-बार सबकुछ त्‍याद दिया और ब्रह्मचारी का जीवन अपना लिया था। इनका नाम आनंद स्‍वरूप ब्रह्मचारी रखा गया, उसके बाद भी अनका नाम स्‍वामी आनंदाश्रम रखा गया था। ईश्‍वन को पाने की इच्‍छा से इन्‍होने कठिन तपस्‍या करी और अपने-आप को पूरी तरह से भक्ति में समर्पित कर दिया था। अनिरूद्ध कुमार पांडे जी ज्‍यादातर अकेले रहना पंसंद करते और रोजाना प्रात: जल्‍दी उठकर गंगा नदी में स्‍नान आदि करके सूर्य नारायण भगवान को जल का अर्घ्‍य देकर भगवान की भक्ति में लीन रहते थे। भिक्षा मांगकर अपना पेट भरते इस प्रकार उनको काफी समय बीत गया था।

प्रेमानंद महाराज जी बिना किसी परहवा के हमेशा भक्ति में लीन रहते और अधिकांश समय वाराणसी और हरिद्वारा के घाट पर व्‍यतीत करते थे। इनकी दिनचर्या कभी भी नहीं बदली चाहे गर्मी का मौसम है या फिर सर्दी का मौसम वो सदैव की भांति अपनी कठिन तपस्‍या में लगे रहे थे। कहा जाता है की कुछ समय बीत जाने के बाद श्री प्रेमानंद महाराज जी को भगवान शिवजी का आशीर्वाद प्राप्‍त हुआ, कई लोगो का कहना है की उनको साक्षात भगवान शिवजी ने दर्शन दिया है।

एक दिन प्रेमानंद गुरूजी बनारस में एक पेड़ के नीचे बैठकर ध्‍यान में मगन थे, उसी समय श्री श्‍यामा श्‍यामा की कृपास से वृंदावन की महिमा के प्रति आ‍र्कषक हुए। जिसके बाद इन्‍होने रासलीला में हिस्‍सा लिया और सुबह के समय श्री चैतन्‍य महा प्रभु की लीला (Leela of Sri Chaitanya Maha Prabhu) की करते। रात्रि के दाैरान श्री श्‍यामा श्‍यामा की रास लील देखने जाते इस प्रकार इन दोनो की लीला से प्रेमानंद महाराज जी इतने प्रभावित व आर्कषक हुए की अपना जीवन पूरी तरह से बदल दिया था।

Vrindavan Wale Premanand Ji Maharaj वृंदावन वाले महाराज जी

जिसके बाद अनिरूद्ध कुमार पांडे जी स्‍वामी जी की सलाह व श्री नारायण दास भक्‍त माली का एक शिष्‍य था, उसकी मदद से मथुरा (यूपी) में वृंदावन को आ गऐ। जिसके बाद महाराज जी वृंदावन की पावन भूमि पर अपना जीवन बीताने लगे सुबह शाम वृंदावन की परिक्रमा करते और रात्रि को मंदिर में जाकर राधावल्‍लव जी की प्रतिमा को निहारते रहते थे। एक दिन प्रेमानंद महाराज जी को मंदिर के पुजारी जी ने एक श्‍लोक सुनाया और का ही श्री हरिवंश जी का जाप किया करो।

पर प्रेमानंद महाराज जी को उस श्‍लोक का अर्थ नहीं पता, इसलिए हरिवंश जी का जाप करने से हिचक रहे थे, जब उन्‍होने परिक्रमा देते समय इस श्‍लोक का स्‍मरण किया तो वो हरिवंश की लीला में और भी ज्‍यादा मग्‍न हो गए। कुछ समय बीत जाने के बाद प्रेमानंद महाराज जी ने वृन्‍दावन में एक आध्‍यात्मिक संगठन की स्‍थापना करी, इसका उद्देश्‍य वृन्‍दावन में कई प्रकार की धार्मिक कार्यो को करना और उनके माध्‍यम से पूरे देश में प्रेम और शांति बनाए रखना है।

जो भी आदमी आज किसी कारण से परेशान है तो वह वृंदावन वाले प्रेमानंद महाराज जी के पास जाकर अपने मन को शांति प्रदान करता है। गुरूदेव उसे ऐसी बाते बताते है जिससे उस व्‍यक्ति के जीवन में अपने-आप मन, प्रभु के प्रति भक्ति की भावना जागृत हो जाती है। प्रेमानंद महाराज जी सभी भक्‍तजनों को नि:शुल्‍क सेवाए प्रदान करते है।

प्रेमानंद महाराज जी का स्‍वास्‍थ्‍य कैसा है Premanand Maharaj Ji ka Health

गुरूदेव महाराज जी आज भी वृंदावन में निवास करते है और अपना पूरा ध्‍यान आध्‍यात्मिक गतिविधियों, भगवान कृष्‍ण जी के साथ राधारानी जी निस्‍वार्थ सेवा व भक्ति करके अपना जीवन को व्‍यतीत कर रहे है। गुरूदेव का कहना है की उनके दोनो गुर्दे (Kidney) खराब है इसी लिए डॉक्‍टर ने उनको कहा था की आप कुछ समय ही जीवन जी सकते है उसके बाद आपकी मृत्‍यु हो जाएगी। पर आचर्श्‍य है की आज भी गुरूदेव जी को कुछ नहीं हुआ यह सभी भगवान श्री कृष्‍ण जी और राधा रानी जी की निस्‍वार्थ भक्ति का प्रभाव है।

जो गुरूदेव दोनो किडनी के बिना भी अपना जीवन व्‍यतीत कर रहे है और उनका स्‍वास्‍थ्‍य बिल्‍कुल सही है। एक बार उन्‍होने कहा की जब डॉक्‍टर में यह कहा की आपकी किडनी खराब है और आप कुछ समय के लिए है। तो मैं बिल्‍कुल दु:खी नहीं हुआ और सदैव भांति अपनी भक्ति में लगा रहा है जो आज में सही हूँ तो केवल राधा रानी व भगवान री कृष्‍ण जी की कृपा से हूं।

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