Vrat Katha

Putrada Ekadashi Vrat Katha in Hindi | पुत्रदा एकादशी व्रत कथा व पूजा विधि जानिए

Putrada Ekadashi Vrat Katha in Hindi | पुत्रदा एकादशी व्रत कथा व पूजा विधि जानिए | Putrada Ekadashi Vrat katha | पुत्रदा एकादशी कब है | Putrada Ekadashi Date | पुत्रदा एकदशी व्रत कथा 2024| Putrada Ekadashi | वैकुण्‍ठ एकादशी | Putrada Ekadashi Vrat | वैकुण्‍ठ एकादशी कब है | Baikunth Ekadashi | वैकुंठ एकादशी व्रत कथा | Vaikunta Ekadashi Kab Ki Hai

एकादशी का व्रत सभी व्रतो में से श्रेष्‍ठ व सर्वोत्तम माना जाता है। जो की प्रतिमहीने में दो बार अर्था शुक्‍लपक्ष की ग्‍यारस व कृष्‍ण्‍पक्ष की ग्‍यारस को किया जाता है। इन सभी एकादशीयों को महत्‍व अगल-अगल होता है। किन्‍तु आज हम आपको पौष मास की शुक्‍लपक्ष की एकादशी अर्थात पुत्रदा एकादशी के बारें में विस्‍तार से बताएगे। तो पोस्‍ट के सा‍थ अंत तक बनें रहे।

पुत्रदा एकादशी व्रत (Vaikunta Ekadashi 2024)

यह व्रत प्रतिवर्ष पौष महिने की शुक्‍लपक्ष की एकादशी को किया जाता है इस एकादशी को वैकुण्‍ठ एकादशी (Vaikunta Ekadashi Vrat katha) व मुक्‍कोटी एकदशी (Mukkoti Ekadashi Vrat 2024) भी कहा जाता है। जिस कारण इस व्रत को शास्‍त्रों व पुराणों में विशेष महत्‍व दिया गया है अर्थात जो कोई स्‍त्री व पुरूष श्रद्धा भाव से पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है उसे संतान प्राप्ति का वरदान प्राप्‍त होता है। जिस कारण इसे पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। इस व्रत वाले दिन भगवान विष्‍णु जी की पूजा की जाती है उसके बाद माता लक्ष्‍मी जी की पूजा भी की जाती है।

पौष पुत्रदा एकादशी कब है Paush Putrada Ekadashi Vrat Kab Hai

पंचांग के अनुसर पौष महिने की शुक्‍ल पक्ष में ग्‍यारस को पुत्रदा एकादशी कहा गया है जो इस बार 21 जनवरी 2024 रविवार के दिन रहेगी।

पुत्रदा एकादशी कब है (Mukkoti Ekadashi 2024)

Putrada Ekadashi Vrat Katha in Hindi
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

हिंदु पंचाग के आनुसार इस वर्ष पुत्रदा एकादशी का व्रत 21 जनवरी 2024 के दिन पड़ रही है। त‍था हिन्‍दी पंचाग के अनुसार प्रतिवर्ष पुत्रदा एकादशी (वैकुण्‍ड एकदशी) का व्रत पौष मास की शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। तो आइये जानते है पंचाग के अनुसार शुभ मुहूर्त-

  • पौष पुत्रदा एकादशी:- 21 जनवरी 2024 रविवार
  • एकादशी तिथि प्रारंभ:- शाम 06:26 मिनट पर (20 जनवरी 2024 को)
  • एकादशी तिथि का समापन:- रात्रि 07:26 मिनट पर (21 जनवरी 2024 को)

पुत्रदा/वैकुण्‍ठ एकादशी व्रत के पारण का शुभ मुहूर्त जानिए

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा Mukkoti Ekadasi Vrat katha in Hindi

मुक्‍कोटी एकादशी व्रत का पारण 22 जनवरी 2024 सोमवार को प्रात: 07:14 मिनट से लेकर 09:21 मिनट तक किया जा सकता है। और यदि आप इस समय के बीच में व्रत का पारण नहीं कर सके तो आपको इसके बाद द्वादशी खत्‍म होने के बाद ही इस व्रत का पारण करना चाहिए।

एकादशी व्रत की पूजा विधि जानिए (Putrada Gyaras Ki Katha)

Putrada Ekadashi Vrat Katha in Hindi

  • इस व्रत वाले दिन व्‍यक्ति को प्रात: जल्‍द‍ि उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर साफ वस्‍त्र धारण करे। और पुत्रदा/वैकुण्‍ठ एकादशी Putrada Ekadashi व्रत का संकल्‍प ले।
  • जिसके बाद भगवान सत्‍यनाराण को पानी चढ़ाकर पीपल व तुलसी के पेंड में भी जल चढ़ाऐ और भगवान विष्‍णु जी के नाम का उच्‍चारण करे।
  • जिसके बाद एक चौकी पर लाल रंग का वस्‍त्र बिछाकर भगवान विष्‍णु जी व माता लक्ष्‍मीजी की मूर्ति की स्‍थापना करे।
  • अब आपको भगवान विष्‍णु जी की पूजा पूरे विधि-विधान से व श्रद्धा भाव सके करे।
  • पूजा में श्री हरि को पीले रंग के वस्‍त्र व पीले रंग के पुष्‍प्‍ अवश्‍य चढ़ाऐ। उसके बाद जल, फल, चंदन, अक्षत, तुलसी, पंचामृत आदि को पूजा में चढ़ाए और पूजा करे।
  • जिसके बाद पुत्रदा एकादशी अर्थात वैकुण्‍ठ एकादशी व्रत की कथा सुने जिसके बाद भगवान विष्‍णु जी की आरती उतारे।
  • आरती के बाद प्रसाद चढ़ाकर अपनी पूजा को पूर्ण करे।
  • मान्‍यताओं के अनुसार इस व्रत वाले दिन भगवान श्री कृष्‍ण जी के बालस्‍वरूप की भी पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से आपको उन्‍ही का जैसे सुदंर संतान मिलेगी।

वैकुण्‍ठ एकादशी व्रत कथा (Putrada Ekadashi Vrat Katha in Hindi)

भद्रावती नामक का राज्‍य था जिस पर सुकेतु नाम का राजा राज करता था। राजा सुकेतु की धर्मपत्‍नी का नाम शैव्‍या था किन्‍तु उनके कोई भी संतान नहीं होने के कारण राजा-रानी बहुत दु:खी रहते थे। संतान दु:ख को झेलते हुए एक दिन राजा ने अपना राजपाठ अपने महामंत्री को सौपकर अपनी पत्‍नी शैव्‍या के साथ वन को चल दिए। राजा रानी ने आत्‍महत्‍या बनाने का विचार बना लिया और घने वन में अंदर तक चले आए।

राजा व रानी दोनो आत्‍महत्‍या करने की सोच रहे थे किन्‍तु राजा ने कहा की यह तो घोर व महापार है। आत्‍महत्‍या करना किसी को शोभा नहीं देता है। उसी पल उन्‍हे वेदपाठ व मंत्रों की ध्‍वनि सुनाई दी और वो दोनो उसी ध्‍वन‍ि की ओर चल दिए। देख की एक सरोवर के निकट कई ऋषि व मुनि गण वेदपाठ कर रहे थे। राजा सुकेतु और उसकी रानी शैव्‍या ने उन सभी ऋषियों को प्रमाण किया।

राजा सुकेतु अपनी पत्‍नी शैव्‍या के साथ उन सभी ऋषियों की सेवा में लग गए। जिससे सभी ऋषि उन दोनो पर अति प्रसन्‍न हुए और कहा हे वत्‍स मांगो तुम दोनो क्‍या मांगते हो। तब राजा ने कहा की प्रभु मेरे कोई पुत्र नहीं है बस हमे एक पुत्र चाहिए। राजा की बात सुनकर मुनिश्रेष्‍ठाें ने कहा हे राजन यदि तुम और तुम्‍हारी पत्‍नी पौष मास की शुक्‍लपक्ष की एकादशी Putrada Ekadashi का व्रत पूर्ण नियमों के साथ करोगे। तो तुम्‍हे अवश्‍य ही संतान प्राप्ति हो जाएगी।

जिसके बाद राजा व रानी अपने राज्‍य भद्रावती आ गए और कुछ दिनो के बाद पौष महीने की एकादशी आयी। राजा सुकेतु व रानी शैव्‍या ने वैकुण्‍ठ एकादशी का व्रत बड़ी ही श्रद्धा सके किया। जिस कारण भगवान विष्‍णु उन पर अति प्रसन्‍न हुऐ और उन्‍हे संतान प्राप्ति का वरदान दिया। कुछ दिनों बाद रानी शैव्‍या ने गर्भधारण किया। और नौ महिने के बाद एक सुंदर बालक को जन्‍म दिया। राजा रानी तेजस्‍वी पुत्र पाकर धन्‍य हो गऐ। कहा जाता है की कोई व्‍यक्ति पूर्ण श्रद्धा रूप से भगवान विष्‍णु जी पूजा अर्चना करता है और पुत्रदा एकादशी का व्रत करता है। उसकी सभी मनोकामनाए पूर्ण होती है।

डिस्‍कलेमर:- दोस्‍तो आज के इस छोटे से लेख में हमने आपको पुत्रदा/वैकुण्‍ठ/ मुक्‍कोट एकादशी Putrada Ekadashi Vrat Katha in Hindi के बारें में विस्‍तार से बताया है। जो आपको पौराणिक मान्‍यताओं, कथाओं, पंचांग के आधार पर बताया है। आपको बताना जरूरी है Onlineseekhe.com किसी प्रकार की पुष्टि नहीं देगा, अधिक जानकारी हेतु किसी संबंधित विद्धान, पंडित के पास जाएगा, यदि हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

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