Advertisement

ऋषि पंचमी व्रत कथा व पूजा विधि हिंदी में जाने | Rishi Panchami Vrat Katha in Hindi 2021

Advertisement

Rishi Panchami Vrat Katha in Hindi | ऋषि पंचमी व्रत की कथा पंचमी व्रत कथा हिंदी | Rishi Panchami Vrat Katha Hindi | Rishi Panchami Katha | Panchami Vrat Katha Read In Hindi

दोस्‍तो जल्‍दी ही भाद्रपद शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी आने वाली है। इस बार यह व्रत 11 सितम्‍बर 2021 शनिवार को है। हमारे धर्मो के अनुसार इस दिन सभी औरते सप्‍त ऋषि की पूजा करती है। ताकी उनके माहवारी के समय नियमो में कोई गलती हो जाती है तो उसी गलती की क्षमा याचना के लिए ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत प्रत्‍येक वर्ष भाद्रपद शुक्‍लपक्ष की पंचमी को आता है।

Advertisement

सामान्‍यत: ऋषि पंचमी का व्रत अगस्‍त या सितम्‍बर के महीने में पड़ता है किन्‍तु इस बार 11 सितम्‍बर को है। यह व्रत हरतालिका तीज के दूसरे दिन व गणेश चतुर्थी के दिन आता है। ऐसे मे अगर आप से भी माहामारी के समय कोई गलती हो गई है तो उस दोष मुक्‍त होने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत रखकर इस लेख के माध्‍यम से कथा पढ़कर आप अपना ऋषि पंचमी का व्रत पूर्ण कर सकती हो। पोस्‍ट के अन्‍त बनी रहे।

Rishi Panchami Vrat Katha in Hindi

ऋषि पंचमी का महत्‍व (Rishi Panchami Mahtva)

आप सभी में से बहुत ही कम लोग यह जानते होगे की भाद्रपद माह की शुक्‍लपक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। यह व्रत जाने अनजाने हुए सभी पापों के प्रक्षालन के लिए स्‍त्री या पुरूष दोनो को करना चाहिए। व्रत करने वाले को गंगा नदी या किसी अन्‍य पवित्र नदीं एवं तालाब में स्‍नान करना चाहिए। यदि आपके यहा कोई नदी या तालाब नही है तो आप घर पर ही पानी लाकर उसमें गंगाजल मिलाकर स्‍नान कर सकते हो। इसके बाद गोबर से लीपकर मिट्टी या तांबे का जल भरा हुआ कलश रखकर अष्‍टदल कमल बनावें। अरून्‍धती सहित सप्‍त ऋषियों का पूजन कर कथा सुनें तथा ब्राह्मण को भोजन कराकर स्‍वयं भोजन करे।

ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त

इस बार ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त 11 सितम्‍बर 2021 को सुबह 11 बजकर 03 मिनट से लेकर 01 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त 02 घंटे 31 मिनट तक रहेगा। इस शुभ मूहूर्त के बीच में आप अपना यह व्रत खोल सकते है। इस बार ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त की शुरूआत 10 सितम्‍बर 2021 को रात 09 बजकर 57 मिनट पर शुरू हो जाएगी। इसका व्रत का समापन 11 सितम्‍बर 2021 को 07 बजकर 37 मिनट पर होगी।

Advertisement
तारीख वार शुभ मुहूर्त का समय
10 सितम्‍बर 2021 शुक्रवार रात्रि के 09:57 मिनट पर शुरू
11 सितम्‍बर 2021शनिवार रा‍त्रि के 07:37 मिनट पर समापन

ऋषि पंचमी व्रत पूजा की विधि (Rishi Panchami Vrat Puja ki Vidhi)

  • ऋषि पंचमी का व्रत रखने वाले सभी स्‍त्री व पुरूष प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्‍नान आदि से निवृत होकर भगवान सूर्य नारायण को पानी चढ़ाऐ। इसके बाद पीपल व तुलसा माता के पेड़ में भी पानी चढ़ाऐ।
  • इसके बाद एक शांत जगह पर बैठकर सप्‍त ऋषिया यानी विश्रवामित्र, कण्‍व, ऋषि वशिष्‍ठ, भारद्वाज, वामदेव, अत्रि और शौनक इन सभी को ध्‍यान कर बुलाना चाहिए।
  • ततपश्‍चा्त इनके फल, फूल, चंदन, धूप, अक्षत, मिष्‍ठान, दीप आदि चढ़ाकर सभी सप्‍त ऋषियों की पूरे विध‍ि -विधान से पूजा करे।
  • पूजा समाप्‍त होने के बाद अर्ध्‍य देकर कथ का श्रवण करे।
  • रात्रि के समय जागरणकरके ब्रह्मचर्य नियम का पालन करे, तथा सग से व्रत खोलना चाहिए।
  • पुराणों के अनुसार व्रत को पूरा होते ही किसी धार्मिक स्‍थान व र्ती‍थ पर जाऐ जिससे पुण्‍य फलो की प्राप्ति होगी। और साथ में अंतिम समय में स्‍वर्ग लोक मिलेगा।
Rishi Panchami Vrat Katha in Hindi

ऋषि पंचमी व्रत की कथा (Rishi Panchami Vrat Katha in Hindi)

एक बार सिताश्‍व नामक राजा ने ब्रह्माजी से पूछा की ”हे पितामह” सब व्रतों में से श्रेष्‍ठ व्रत और तुरन्‍त फलदायक व्रत कौनसा है। राजा सिताश्‍व कि‍ बात सुनकर ब्रह्माजी बोले ”हे राजन” सब व्रतों में से श्रेष्‍ठ और पापों का विनाश करने वाला व्रत ऋषि पंचमी का व्रत है जो भाद्रपद शुक्‍लपक्ष की पंचमी को आता है।

ब्रह्माजी ने कहा, ”विदर्भ देश में एक उत्तंक नामक सदाचारी ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्‍नी सुशीला बड़ी ही पतिव्रता नारी थी। उनके एक पुत्र और एक पुत्री थी। जब पुत्री बड़ी हुयी तो उन्‍होन उसका विवाह कर दिया। विवाह करने के बाद उसका पति मर गया जिससे वह विधवा हो गई। दु:खी ब्राह्मण-दम्‍पत्ति एवं पुत्र व पुत्री सहित गंगातट पर कुटिया बनाकर रहने लग।

एक दिन उत्तंक समाधि में बैठकर ध्‍यान कर रहा था। तो उसने ज्ञात किया की उसकी पुत्री पिछले जन्‍म में रजस्‍वला (माहामारी) होने पर भी बर्तनों को छू लेती थी। जिसके कारण वह अंत समय में कीड़े पडने से मरी थी। धर्म शास्‍त्रो के अनुसार रजस्‍वला (माहामारी) स्‍त्री पहले दिन तो ”चाण्‍डालिनी” दूसरे दिन ”ब्रह्मघातिनी” तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है। वह चौथे दिन स्‍नान करके शुद्ध होती है।

Advertisement
Rishi Panchami Vrat Katha in Hindi

उत्तंक ब्राह्मण ने सोचा यदि मेरी पुत्रि विधिपूर्वक ”ऋषि पंचमी’ का व्रत एवं पूजन करेगी तो इस व्रत के प्रभाव से इस जन्‍म में पापमुक्‍त हो जाएगी। और उस ब्राह्मण ने अपनी पुत्रि को भाद्रपद शुक्‍ल्‍पक्ष की पंचमी को आने वाला व्रत ऋषि पंचमी के व्रत के बारे में बताया। ब्राह्मण की पुत्रि ने कई वर्षो तक पूरे विधि-विधान से ऋषि पंचमी का व्रत किया। और वह इस व्रत के प्रभाव से सभी दुखो व पापों से मुक्‍त हो गई। और मरने के बाद अगले जन्‍म में अटल सौभाग्‍य सहित अक्षय सुखों का भोग मिला।

ऋषि पंचमी व्रत उदपान की विधि (Rishi Panchami Vrat Udapaan Vidhi)

ऐसा माना जाता है की ऋषि पंचमी का व्रत एक बार करना शुरू कर दे तो फिर यह व्रत प्रतिवर्ष करना जरूरी है। और यह वृद्धावस्‍था तक किया जाता है। इसके बाद आप इस व्रत का उद्यापन कर सकते है। उद्यापन करने के लिए कम से कम 07 ब्राह्मणों को भाेजन करवाते है। यह ब्राह्मण सप्‍त ऋषि का रूप मानकर उन्‍हे दक्षिणा में वस्‍त्र, अन्‍न व य‍था शक्ति रूपया देकर विदा करते है।

यह भी पढ़े-

Q: ऋषि पंचमी क्‍या है।

Ans: भाद्रपद शुक्‍लपक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी कहा जाता है। इस दिन माहामारी दोष से मुक्‍त होने के वाली औरते व्रत रखती है।

Q: ऋषि पंचमी कब आती है।

Ans: ऋषि पंचमी प्रत्‍येक वर्ष भाद्रपद शुक्‍लपक्ष की पंचमी को आती है।

Q: इस बार ऋषि पंचमी कब की है।

Advertisement

Ans: इस बार ऋषि पंचमी का व्रत 11 सितम्‍बर 2021 शनिवार के दिन है।

You may subscribe our second Telegram Channel for upcoming posts related to Indian Festivals & Vrat Kathas.

Leave a Comment