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Sharad Purnima in Hindi | शरद पूर्णिमा कब है | शरद पूर्णिमा व्रत कथा व पूजा विधि जाने

शरद पूर्णिमा कब आती है,Ashwin Purnima Vrat kab Hai, शदर पूर्णिमा की कहानी, शरद पूर्णिमा व्रत कब है, Ashwin Purnima Katha in Hindi, शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे करें, /sharad Purnima Katha in Hinai, शरद पूर्णिमा का व्रत कब खोला जाता है, Sharad Purnima Vrat Vidhi, आश्विन पूर्णिमा कब है,

Sharad Purnima in Hindi:- वैसे तो प्रतिमाह पूर्णिमा Sharad Purnima आती है किन्‍तु जो आश्विन महीने की शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा आती है उसे शरद पूणिमा कहते है। ज्‍योतिष की मान्‍यता है की सम्‍पूर्ण वर्ष में आश्विन मास की पूर्णिमा को चन्‍द्रमा जी षोड़स (16) कलाओं का होता है और कहते है की इस दिन चन्‍द्रमा जी अमृत वर्षा करता है जिस कारण इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहते है। जो इस बार 28 अक्‍टूबर 2023 शनिवार के दिन पड़ रही है। शरद पूर्णिमा व्रत कथा

इस दिन शाम को खीर, पूरी बनाकर भगवान को भोग लगाऍं, भोग लगाकर खीर को छत पर रख दें और रात को भगवान का भजन करें। चॉद की रोशनी में सुईं पिरोऍं तथा अगले दिन खीर का प्रसाद सबको देना चाहिए। क्‍योकि वह खीर प्रात: तक अमृत जैसी हो जाती है। और इस दिन जो कोई स्‍त्री व पुरूष व्रत रखता है तो उसे पोस्‍ट में दी गई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़कर अपना शरद पूर्णिमा का व्रत पूर्ण कर सकते है।

शरद पूर्णिमा

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शरद पूर्णिमा का महत्‍व (Sharad Purnima )

पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार इस दनि माता लक्ष्‍मी जी का जन्‍म समुद्र मंथन के समय हुआ था। जिस कारण शरद पूर्णिमा को धन-दौलत व सुख समृद्धि की पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्‍णु जी और माता लक्ष्‍मी जी पूजा का विशेष महत्‍व है। ऐसे कहा जाता है जो कोई स्‍त्री व पुरूष रात्रि को माता लक्ष्‍मी जी का पूजा-अर्चना करता है माता लक्ष्‍मी उस पर सदैव अपनी कृपा बनाऐ रखती है।

वही धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार इस समय चा‍तुर्मास चलता है जिस कारण भगवान विष्‍णु जी पाताल लोक में निवास करते है। जिस कारण इस पूर्णिमा कई जगहो पर को कोजागारी पूर्णिमा कहा जाता हे। व पुराणों के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्‍ण जी ने इस दिन अपनी सभी गोपियों के साथ रास रचाया था। जिस कारण शरद पूर्णिमा के व्रत को कौमुदी व्रत की उपाधि दी गई है।

इस दिन चंद्रमा जी अपनी सम्‍पूर्ण षोड़स कलाओ के साथ होता है और पूरे ब्रह्माण्‍ड़ में अपनी रोशनी काे उजागर करता है। ऐसा कहा जाता है की इस दिन चंद्रमा जी किरणों से अमृत की बरसात होती है। और इस दिन कोई भी चांद की इस अमृत रोशनी में खीर रखे तो वह सुबह तक अमृत जैसी बन जाती है। जिसे खाकर मन तृप्‍त हो जाता है।

शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त (Sharad Purnima Shub Muhrat)

हिन्‍दी पंचाग के अनुसार इस बार शरद पूर्णिमा 28 अक्‍टूबर 2023 शनिवार के दिन प्रात: 04 बजकर 47 मिनट पर आरंभ हो रही है। जिसके बाद 28 अक्‍टूबर को देर रात्रि (29 अक्‍टूबर) 01:53 मिनट पर पूरी होगी। उदयातिथि के तहत शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा) 28 अक्‍टूबर 2023 को मनाई जाएगी।

शरद पूर्णिमा पर लगेगा साल का आखिरी चन्‍द्रग्रहण

शरद पूर्णिमा पर साल का अंतिम चन्‍द्रग्रहण 28 अक्‍टूबर 2023 शनिवार के दिन लग रहा है। ग्रहण 28 अक्‍टूबर को मध्‍य रात्रि में 01 बजकर 06 मिनट पर लगभग शुरू होगा और 02 बजकर 22 मिनट पर समाप्‍त हो जाएगा।

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शरद पूर्णिमा व्रत पूजा विधि (Sharad Purnima Vrat Puja Vidhi)

  • शरद पूर्णिमा का व्रत रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को प्रात:काल ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी पर स्‍नार करे और स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करे।
  • यदि आपके यहा कोई नदी नही है तो आप घर पर ही गंगाजल डालकर स्‍नान कर सकते है। स्‍नान करने के बाद भगवान सूर्य को पानी चढ़ाकर पीपल व तुलसी के पेड़ में पानी चढ़ाऐ।
  • जिसके बाद किसी एक स्‍थान पर चौकी बिछाकर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर चारो ओर गंगाजल का छिडकाऊ करे।
  • अब उस चौकी के ऊपर भगवान विष्‍णु जी व माता लक्ष्‍मी (भगवती देवी) की मूर्ति की स्‍थापना करे ओर माता लक्ष्‍मी लाल रंग की चुनरी ओढाऐ।
  • जिसके बाद गंध, अक्षत, पुष्‍प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्‍बूल, सुपारी आदि भगवान व माता को चढ़ाऐ और पूरे विधि विधानो से पूजा करे।
  • इसके बाद एक लोटे में जलख्‍ गिलास में गेहूँ दोनो में रोली व मौली तथा चावल रखें। और अपने दोनो हाथों में गेहूँ के 13 दाने लेकर शरद पूर्णिमा व्रत कथा (Sharad Purnima Story) विधिवत रूप से सुने।
  • कथा सुननें के बाद भगवान विष्‍णु जी की व माता लक्ष्‍मी जी की आरती करे व प्रसाद चढ़ाऐ। जिसके बाद गेहूँ के गिलास पर अपना हाथ फेरकर मिश्राणी के पॉंव स्‍पर्श करके वह गिलास उसे दें देना है।
  • तथा जल से भरे हुऐ लौटे को रात्रि के समय जब चंद्रमा दिख जाऐ तब उसे अर्घ्‍य देना है।
  • पूजा आदि करने के बाद गाय के दूध में खीर बनाकर भगवान को प्रसाद चढ़ाकर चद्रमा की रोशनी में उस खीर को रखे देना है।
  • सुबह होने शुभ प्रभात होने पर उस खीर को प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्‍याें को बॉंट देना है।

शरद पूर्णिमा क्‍यों मनाई जाती है/Sharad Purnima in Hindi

पौराणिक मान्‍ताओं के अनुसार हर पूर्णिमा का व्रत भगवान सत्‍यनारायण, भगवान विष्‍णु जी को समर्पित है। मान्‍यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा वाले दिन माता लक्ष्‍मी जी प्रक्रट समुद्र मंथन के दौरान हुई थी। देश के कई स्‍थानों पर आश्विन महिने की पूर्णिमा तिथि पर माता लक्ष्‍मी का जन्‍मोत्‍सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है। कई स्‍थानों पर इस पूर्णिमा को ठंडी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थीं। इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। कोजागर पूजा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा-अराधना का बड़ा महत्व है

शरद पूर्णिमा व्रत कथा (Sharad Purnima Vrat Katha in Hindi)

एक साहूकार था जिसके दो बेटियॉं थी। उसकी दोनो बेट‍ियॉं पूर्णिमा का व्रत रखती थी, किन्‍तु बड़ी पुत्री पूर्णिमा का पूरा व्रत करती और छोटी बेटी अधूरा व्रत रखती थी। अर्थात वह शुभ समय से पहले ही व्रत खोलकर खाना खा लेती थी। धीरे-धीरे दोनो पुत्री बड़ी हो गई और उस साहूकार ने दोनो की शादि कर दी।

शादी के बाद साहूकार की बड़ी बेटी के पुत्र हो गया किन्‍तु छोटी बेटी के जो भी संतान होती वह मर जाती। जिससे वह बहुत दुखी रहती थी। एक दिन उसने और उसके पति ने किसी विद्धावान पंडित से इसका कारण पूछा। तो पंडित जी ने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती है जिसके कारण तुम्‍हारी सन्‍तान पैदा होते ही मर जाती है।

दोनो ने पूर्णिमा के व्रत की पूरी विधि के बारे में पूछा और तब पंडित ने उसे पूर्णिमा के व्रत के बारे में विधिपूर्वक बतया। और कहा यदि तुम इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करोगी मो तुम्‍हारी सभी इच्‍छाए पूर्ण हो जाऐगी। ऐसा कहकर वह पंडित तो वहा से चला गया और कुछ दिनो के बाद शरद पूर्णिमा आई।

साहूकार की छोटी बेटी ने शरद पूर्णिमा का व्रत वैसे ही किया जैसे की पंडित ने बताया था। इस व्रत के प्रभाव से उसको पुत्र रत्‍न की प्राप्‍ती हुई किन्‍तु उसका बेटा शीघ्र ही मर गया। उसने अपने मरे हुऐ पुत्र को एक पीढ़े पर लिटाकर एक लाल रंग के कपड़े से ढक दिया। और अपनी बड़ी बहन को बुलाकर लाई और उसने उस पीढ़ के ऊपर बैठने को कहा।

जैसे ही उसकी बड़ी बहन उस पीढ़ पर बैठने लगी तो उस बच्‍चे को उसका घाघरा लग गया जिससे वह बच्‍चा जोर-जोर से रोने लगा। उसने पीछे मुड़कर पीढ़े की तरफ देखा तो उसके ऊपर उसकी छोटी बहन का पुत्र सो रहा था। यह सब देखकर बड़ी बहन अपनी छोटी बहन से बोली -”तू मुझे कलंक लगाना चाहती थी। अभी तो यह मेरे बैठने से मर जाता।

तब उसकी छोटी बहन बोली नही बहन ”यह तो पहले से ही मरा हुआ था। तेरे ही भाग्‍य से यह जीवित हो गया, तेरे पुण्‍य व्रत के प्रभाव से यह पुन: जीवित हुआ है। यह देखकर उसकी बड़ी बहन बहुत खुश हुई और दोनो बहनों ने पूरे नगर में पूर्णिमा के व्रत के प्रभाव के बारे में बताया। जिसके बाद उस नगर की सभी औरते पूर्णिमा का व्रत करने लगी।

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शरद पूर्णिमा व्रत उद्यापन विधि/Sharad Purnima Vrat Udyapan Vidhi

मान्‍यताओं के अनुसर आपको पूर्णिमा व्रत प्रारंभ करना है तो सबसे शुभ वैशाख की पूर्णिमा से बताया हुआ है आपको भी वैशाख की पूर्णिमा से ही व्रत करना आरंभ करना चाहिए। हर पूर्णिमा तिथि पर भगवान शिवजी और माता पार्वती जी की शास्‍त्रोक्‍त रीति से षोडशोपचार पूजन करना चाहिए। साथ में भगवान विष्‍णु जी और माता लक्ष्‍मी जी की भी पूजा करनी होती है हर पूर्णिमा व्रत वाले दिन। आपको पूर्णिमा का व्रत करने हुए काफी समय बीत गया है और अब आप पूर्णिमा व्रत का उद्यापन (Purnima Vrat Udyapan Vidhi) करना चाहती है तो नीचे दिए हुए नियमों के अनुसार कर सकते है।

  • इस व्रत वाले दिन आपको प्रात: जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि से मुक्‍त होकर साफ वस्‍त्र धारण करें, उसके बाद भगवान सूर्य नारायण को जल्‍द का अर्घ्‍य दे, जिसके बाद तुलसी व पीपल के वृक्ष में भी पानी अवश्‍य चढ़ाऐ।
  • अब आपको आटे का एक दीपकर बनाकर उसमें घी डालकर बत्ती जलाकर रख देना है ध्‍यान रहे आपको बत्तीस पूर्णमासी पूरी करनी होती है
  • इस दिन निराहार रहकर उपवास करना होता है रात्रि को मण्‍डप बनाकर उसमें मिटटी का कलश उस पर श्रीफल रखना पड़ता है
  • पानी से भरा हुआ लौटा एक चौकी पर भगवान विष्‍णु जी की प्रतिमा स्‍थापित करनी है।
  • उसके बाद उमा व महेश्रवर की प्रतिमा को स्‍थापित करना है और पूजन सामग्री से पूजा करनी है।
  • पूजा के दौरान आपको ऊँ नम: शिवाय, ऊँ उमाय नम:, ऊॅ भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करना होता है।
  • पूजा करने के बाद आरती करनी है और प्रसाद चढ़ाना होता है।
  • उसके बाद ब्राह्मण व ब्राह्मण स्‍त्रीयों को भोजन कराकर यथा शक्ति दान दक्षिणा देनी होती है।

नोट:- पूर्णिमा व्रत उद्यापन विधि आपको पौराणिक मान्‍यताओं, कथाओं के आधार पर बताया है उद्यापन के बारें में अच्‍छे से जानने के लिए किसी संबंधित विद्धान, पंडित, विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए।

डिस्‍कलेमर:- दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको शरद पूर्णिमा व्रत कथा Sharad Purnima Vrat Katha in Hindi के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी प्रदान की है। जो आपको पौराणिक मान्‍यताओं, कथाओं व पंचाग के आधार पर बताया है। आपको बताना जरूरी है Onlineseekhe.com किसी प्रकार की पुष्टि नही करता है यदि लेख में दी गई जानकारी पसंद आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कंमट बॉक्‍स में जरूर पूछे। धन्‍यवाद

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