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Somavar Vrat Katha in Hindi | सोमवार व्रत कथा व पूजा विधि यहा से पढ़े

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Somvar Vrat Ki Katha In Hindi | सोमवार के व्रत की कथा हिंदी में पढे़ | भगवान शिवजी के व्रत की कथा | साहूकार एवं उसके बेटे की कथा | Vrat Kathaye in Hindi | Somvar Fast Katha Read in Hindi

प्‍यारे दोस्‍तों आज के इस लेख में हम सोमवार के व्रत की कथा (Somvar Vrat Ki Katha) के बारे में विस्‍तार से जानेंगे। जैसा कि आप सभी जानते है कि हिन्‍दु धर्म में अनेक देवी-देवताओं की पूजा की जाती है जिनमे से एक है भगवान महादेव। जिन्‍हे कई अन्‍य नामों जैसे शिव, शकंर, भोलेनाथ, शम्‍भु आदि अनेक नामों से जाना जाता है।

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ऐसा माना जाता है जो भी भगवान शिव की पूजा-पाठ करते है या इनके लिए सोमवार का व्रत रखते है भगवान भोलेनाथ उनकी सभी मनोकामनाए पूर्ण करते है। ऐसे में अगर आप भी भगवान शंकर के भक्‍त है व भोलेनाथ को प्रसन्‍न करने के लिए सोमवार का व्रत रखते है तो आज की इस पोस्‍ट में हम आपको सोमवार व्रत की कथा (Somvar Vrat Ki Katha) के बारे में बताएंगे जिसे पढ़कर आप अपना व्रत पूर्ण कर सकते है।

इस तरह से रखे सोमवार का व्रत (Somvar Vrat Katha)

अक्‍सर सोमवार का व्रत चैत्र, वैशाख, श्रावण, मार्गशीर्ष या फिर कार्तिक माह से आरंभ किया जाता है। लेकिन बहुत से लोग श्रावण मास अर्थात् सावन के महिने में ही इस व्रत को रखते है। इस व्रत को रखने के लिए स्‍त्री या फिर पुरूष को प्रात:काल जल्‍दी उठकर स्‍नान करना चाहिए। स्‍नान करने के पश्‍चात् विधिपूर्वक भगवान भोलेनाथ की पूजा करनी चाहिए एवं पूजा के दौरान ओउम नमो शिवाय मंत्र का जाप करना करे। सोमवार के व्रत रखने वाले व्‍यक्ति को सोमवार व्रत की कथा सुनकर पूरे दिन में एक बार ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

सोमवार व्रत कथा (Somvar Vrat Katha in Hindi)

आइये अब आपको सोमवार के व्रत की कथा (Somvar Vrat Ki Katha) के बारे में विस्‍तार से बताते है। यह कथा एक साहूकार की है जो कि इस प्रकार है:-

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Somvar Vrat Katha

साहूकार को पुत्र प्राप्ति का वरदान

एक समय की बात है कि एक बहुत ही धनवान साहुकार था उसके पास सब कुछ था परन्‍तु उसके कोई पुत्र नहीं था। पुत्र न होने की वजह से वह बहुत परेशान रहता था। पुत्र प्राप्‍त करने के लिए वह भगवान शिवजी का व्रत रखकर उनकी पूजा करता था व सुबह-शाम शिव मंदिर में दीपक जलाया करता था।

साहूकार की भगवान शिव के प्रति इस भक्ति को देखकर माता पार्वती ने प्रभु से कहा कि साहूकार सेठ आपका बहुत बड़ा भक्‍त है ओर हमेशा आपका व्रत रखता है एवं आपकी पूजा-अर्चना करता है ऐसे में आपको साहूकार की इच्‍छा को पूरा करना चाहिए। तब प्रभु शिव ने मॉं पार्वती से कहा – यह संसार एक कर्मभूमि है एवं यहा पर हर किसी को अपने कर्मो के हिसाब से फल मिलता है। जैसा बीज इंसान बोता है उसे उसी प्रकार का फल प्राप्‍त होता है।

मॉं पार्वती ने भ‍गवान शिव से साहूकार की पुत्र प्राप्ति की इच्‍छा को पूर्ण करने की प्रार्थना की ओर कहा कि अगर भगवान अपने भक्‍तो के कष्‍ठ नही हरेंगे तो कोई मनुष्‍य आपकी पूजा नही करेगा। माता पार्वती के इस आग्रह पर भगवान शिव प्रसन्‍न हुए एवं उन्‍होने साहूकार सेठ को पुत्र रत्‍न की प्र‍ाप्ति का वरदान दिया। किन्‍तु वह केवल 12 वर्ष तक ही जीवित रहेगा, ये सभी बाते साहुकार भी सुन रहा था। इन बातो को सुनकार साहूकार को न तो ज्‍यादा दुख हुआ ओर न ज्‍यादा खुशी।

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Somvar Vrat Katha

साहुकार के पुत्र का विवाह

शिवजी के वरदान के अनुसार साहूकार के घर एक पुत्र ने जन्‍म लिया। जब वह बालक 11 वर्ष का हुआ तब उसकी माता ने पुत्र के विवाह के लिए साहूकार से कहा तो उसने मना कर दिया व पुत्र को धन देकर उसके मामा के साथ शिक्षा ग्रहण करने के लिए काशी भेज दिया। साहूकार ने अपने पुत्र से कहा कि वह रास्‍ते में ब्राह्णणो को दान दे एवं यज्ञ करवाए।

इस तरह से मामा-भांजे यज्ञ एवं ब्राह्णणो को दान देते हुए एक ऐसे राज्‍य में जा पहुंचे। जहा उस राज्‍य के राजा की पुत्री का विवाह हो रहा था। एवं दूसरे राज्‍य से बारात आई हुई थी। परन्‍तु जो दूल्‍हा था वह एक आंख से काना था इस वजह से दूल्‍हे के माता-पिता बड़े दुखी थे। उन्‍हे डर था कि दोनो के विवाह मे कोई अड़चन ना आये।

जब दुल्‍हे के माता पिता ने साहूकार के बेटे काे देखा तो उन्‍होने उसके मामा से कहा कि वह अपने भान्‍जे को कुछ समय के लिए दुल्‍हा बना दे। जिससे कि उनके बेटे के विवाह मे कोई परेशानी ना आये। इस बात से मामा मान गया एवं उसने साहूकार के बेटे को नए वस्‍त्र पहनाकर घोड़ी पर बिठा दिया। जिसके बाद रीति-रिवाज के अनुसार उनका विवाह सपन्‍ंन हाे गया।

विवाह होने के बाद साहूकार के बेटे ने दूल्‍हन की चूदंड़ी के पल्‍ले पर लिख दिया कि – तेरा विवाह तो मेरे साथ हुआ है ओर मै काशी शिक्षा ग्रहण करने के लिए जा रहा है जब मेरी शिक्षा पूर्ण होगी तब मैं वापस आऊगां। किन्‍तु जिस राजकुमार के साथ तुम्‍हे विदा किया जाएगा वह एक आंख से काना है। पल्‍ले पर लिखी इन सब बातों को पढ़कर राजकुमारी ने एक आंख से काने राजकुमार के साथ जाने से मना कर दिया।

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साहूकार के पुत्र की मृत्‍यु एवं पुर्नजीवन

साहूकार का लड़का काशी पहुचकर शिक्षा ग्रहण करने लगा और कुछ समय बाद वह 12 वर्ष का हो गया। एक दिन यज्ञ के दौरान साहूकार के बेटे ने अपने मामा जी से कहा की आज मेरी तबियत कुछ ठीक नही है तो उसके मामा ने कहा की तुम अन्‍दर जाकर सो जाओ और वह लड़का अन्‍दर जाकर सो गया। भगवान शिवजी के वरदान के अनुसार थोड़ी देर बाद ही उसके प्राण निकल गये। जब उसके मामा ने अन्‍दर जाकर देखा तो वह मृत पड़ा था। उसके मामा बहुत दुखी हुए ओर वह रोने लगा। परन्‍तु उसके मामा ने सोचा कि अगर मै रोना-पीटना मचा दूगा तो यज्ञ का कार्य अधूरा रह जाएगा। ऐसे में उसने यज्ञ का कार्य जल्‍दी पूर्ण कराया।

यज्ञ पूर्ण होने के बाद लड़के का मामा जोर-जोर से विलाप करने लगा। ठीक उसी समय भगवान शिवजी एवं माता पार्वती उसी जगह से गुजर रहे थे। मामा के रोने के आवाज सुनकर माता पार्वती वही रूक गई एवं शिवजी से कहा कि वहा पर कोई रो रहा है। जब मा पार्वती लड़के पास पहुची तो पता चला कि वो तो उसी साहूकार का बेटा है जो कि शिवजी के वरदान से पैदा हुआ था। माँ पार्वती को उस पर दया आ गई एवं उन्‍होने शिवजी से उसकी आयु बढ़ाने की प्रार्थना की एवं कहा कि नही तो उसके माता-पिता तड़प-तड़प कर मर जाएंगे। पार्वती जी के बार-बार आग्रह करने पर भगवान शिवजी ने उस लड़के को पुन: जीवित करके लंबी आयु का वरदान दे दिया।

साहुकार के पुत्र की घर वापसी

साहुकार के बेटे को पुनजीवित होने पर मामा बड़े प्रसन्‍न हुए। अब मामा-भान्‍जे दोनो पहले की तरह यज्ञ करवाते हुए एवं ब्राह्णणो को दान देते हुए उसी राज्‍य में जा पहुंचे जहा पर साहूकार के बेटे का विवाह राजकुमारी के साथ हुआ था। वहा पहुंचकर उन्‍होने यज्ञ आरंभ किया। एक दिन राजकुमारी के पिता ने साहूकार के बेटे को पहचान लिया एवं उसे अपने महल मे ले आए। जिसके पश्‍चात् उन्‍होने साहुकार के बेटे को राजकुमारी के साथ पूरे रीति-रिवाज के साथ विदा किया।

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अब वो तीनो (साहूकार का बेटा, राजकुमारी एवं मामा) साहूकार के गांव पहुचने वाले थे कि मामा ने कहा कि मैं घर जाकर तुम्‍हारे आने की सूचना दे देता हूँ। जब मामा साहूकार के घर पहुचा तो उस समय साहूकार व उसकी पत्‍नी यही सोच रहे थे कि अगर उनका पुत्र सही सलामत घर नही आया तो वे दोनो भी अपने प्राण त्‍याग देंगे। इतने में मामा ने उनके पुत्र एवं उसकी पत्‍नी के आने के बारे मे कहा तो साहूकार व उसकी पत्‍नी को विश्‍वास नही हुआ। तब जाकर उसके मामा ने शपथ देते हुए कहा कि आपका पुत्र अपनी स्‍त्री के साथ बहुत सारा धन लेकर आया है। इतना सुनकर वो दोनो जल्‍दी से गए एव अपने पुत्र का भव्‍य स्‍वागत किया। इसके बाद वो अपने बेटे के साथ खुशी-खुशी रहने लगे।

Somvar Vrat Katha
Somvar Vrat Ki Katha

भगवान शिव करते है सबकी इच्‍छा पूर्ण

इस तरह से भगवान शिवजी ने साहूकार को पहले पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया एवं बाद में लंबी आयु का वरदान। यह सब साहूकार का भगवान भोलेनाथ के प्रति भक्ति का फल था। क्‍योकि साहूकार शिवजी का सोमवार का व्रत रखता था एवं उनकी बहुत पूजा अर्चना करता था। ठीक उसी तरह जो भी भक्‍त शिवजी की पूजा करता है सोमवार का व्रत रखकर कथा (Somvar Vrat Ki Katha) सुनता है भगवान भोलेनाथ उनकी सभी इच्‍छाओ को पूर्ण करते है।

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