Tara Bhojan Vrat | तारा भोजन व्रत कब से प्रारंभ है जाने यहा से

Tara Bhojan Vrat :- दोस्‍तो कार्तिक मास के प्रारंभ से लेकर पूर्ण माह तक व्रत करते है। इस पूरे महीने में व्रत रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को रात्रि के समय तारों को अर्घ्‍य देकर भोजन करना होता है। तथा व्रत के अन्‍तिम दिन कार्तिक के व्रत का उपवास किया जाता है। यह उपवास लगातार 5 दिनो तक होता है जिसमें बिल्‍कुल भी अन्‍न नही खाया जाता केवल एक समय सागार किया जाता है। तारा भोजन व्रत

कार्तिक महीने के अन्तिम दिन पर इस व्रत का उजमन किया जाता है। उजमन में पॉच सीधे, पॉंच सुराही, किसी ब्राह्मण को देते है। उसके बाद सिंगार का पूरा सामान और साड़ी-ब्‍लाऊज उस पर यथा शक्ति रूपये रखकर अपनी सास के पैर स्‍पर्श करके उन्‍हे देना होता है। ऐसे में आप भी तारा भोजन का व्रत रखते है तो नीचे पोस्‍ट में दी गई व्रत कथा व पूजा विधि को पढ़कर आप अपना प्रतिमाह तारा भोजन का व्रत पूर्ण कर सकते है। पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

तारा भोजन व्रत की तिथि (Tara Bhojan Vrat Date)

आपकी जानकारी के लिए बता दे की तारा भोजन प्रतिवर्ष कार्तिक महीने की कृष्‍णपक्ष की प्रतिपदा से लेकर शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा तक किया जाता है। यह व्रत महिलाओं के द्वारा लगातार एक महिने तक किया जाता है इस व्रत में भगवान विष्‍णु जी की महिमा, कृपा बनी रहती है। इस साल से कार्तिक मास प्रारंभ यानी तारा भोजन व्रत का आरंभ 29 अक्‍टूबर 2023 से हो रहाता है। जो लगातार 1 महिने तक यानी 27 नवंबर 2023 काे पूरा हो रहा है इसी बीच में भारत का सबसे बड़ा पर्व दिपावली का त्‍यौहार भी आता है तारा भोजन व्रत लगातार कार्तिक के महिने में पड़ने के कारण ज्‍यादातार लोग इसे कार्तिक स्‍नान महिने भी कहते है आम भाषा में कहे तो कार्तिक नहाना कहा जाता है।

तारा भोजन व्रत

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कार्तिक मास का महत्‍व/कार्तिक मास का अर्थ/Kartik Month ka Mahatva

kartik Maas ka Mahatva:- सनातन धर्म के सभी पुराणों, वेदों, शास्‍त्रों के अनुसार विष्‍णु भगवान को सर्वश्रेष्‍ठ देवता बताया हुआ है और उनका सर्वश्रेष्‍ठ/प्रिय महिना कार्तिक का महिना बताया हुआ है। जिस कारण सनातन धर्म में इस खास मास की बहुत ज्‍यादा महत्‍व होता है इस महिने में देवताओं की कृपा सदैव बनी होती है। इसके अलावा तुलसी की पूजा का भी विशेष महत्‍व बतलाया हुआ है विष्‍णु पुराण के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्‍णु जी की पूजा अधूरी बताई हुई है।

इस महिने में देव तत्‍व इतना मजबूत होता है की श्रद्धा से किया हुआ भाव अवश्‍य ही फलपूर्ण होता है। कार्तिक के महिने में पड़ने वाले कुछ खास पर्व गंगा स्‍नान, दीप दान, यज्ञ, दान, दिपावली, छठ पूजा, धनतेरस, कार्तिक पूर्णिमा आदि खास त्‍यौहार पड़ते है। पुराणों के अनुसार जो कोई महिला व पुरूष कार्तिक स्‍नान पूरी श्रद्धा से करता है उसको मोक्ष की प्राप्ति अवश्‍य होती है।

तारा भोजन व्रत पूजा विधि (Tara Bhojan Vrat Puja Vidhi)

  • कार्तिक के पूरे महीने में प्रतिदिन हर रोज स्‍त्री व पुरूष को प्रात:काल ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी पर स्‍नान करे।
  • स्‍नान आदि से मुक्‍त होने के बाद भगवान विष्‍णु व सूर्य भगवान को पानी चढाकर पीपल व तुलसी के पेड़ में पानी प्रतिरोज चढा़ऐ।
  • जिसे बाद प्रतिरोज मंदिर जाकर विधिवत रूप से पूजा-पाठ करे। तथा रात्रि के समय तारों को अर्घ्‍य देकर भोजन ग्रहण करे। यह विधि प्रतिरोज करे।
  • कार्तिक के अन्तिम पांच दिनो में किसी पवित्र स्‍थान पर जाकर स्‍नान आदि करे और वहा पर दीपक जलाकर आऐ।
  • इन पांच दिनो में व्रत (कार्तिक स्‍नान करने वाले को) रखने वाले स्‍त्री व पुरूष को अन्‍न नहीं खाना चाहिए। केवल एक समय ही फलाहार करे।
  • अन्तिम दिन अर्थात्‍ पूर्णिमा के दिन इस व्रत का उजमन करे। उजमन के समय पॉंच सुराही ब्राह्मणों को दे और एक साड़ी व ब्‍लाउज यथा शक्ति रूपये अपनी सासु को दे। यदि सासु नही है तो अपनी ननद, जैठानी किसी अन्‍य को दे।

तारा भोजन व्रत कथा (Tara Bhojan Vrat Katha in Hindi)

प्राचीन काल में एक साहूकार के तीन पुत्रवधू थी। जिनमें से एक तारा भोजन का व्रत रखती थी। एक दिन उसने अपनी सासु को तारा भोजन व्रत की कहानी सुनाने को कहा तो सासु ने मना कर दिया। और कहा की मुझे अभी तो अपनी पूजा करनी है। इसके बाद उसने अपनी जेठानी जी से कहा की आप ही मुझे तारा भोजन व्रत की कथा सुना दीजिऐ। किन्‍तु जेठानी ने भी मना करते हुऐ कहा की अभी मुझे तो खाना बनाना है।

जिसके बाद उसने अपनी देवरानी जी से कहा की आप ही मुझे इस व्रत की कथा सुना दीजिऐ किन्‍तु सासु और जेठानी की तरह देवरानी ने भी मना कर दिया। इसके बाद वह अपनी ननद से की किन्‍तु उसने भी उसकी नही सुनी। अन्‍त में बहू हारक नगर के राजा के पास गई और उससे कहा की तुम ही मुझे कहानी सुना दो। राजा ने कहा की मुझे अपने व्‍यापार के आगे समय नही है। राजा की बात सुनकर उस सेठ की बहू बड़ी दुखी हुई।

उसकी इस मनोदशा को देखकर भगवान को उस पर दया आ गई और उसने स्‍वर्ग से विमान भेजा। उस विमान को आते देख उसकी सासु, जेठानी, देवरानी और ननद तथा राजा उस विमान में बैठकर स्‍वर्ग जाने के लिए तैयार हो गऐ। किन्‍तु उस बहू ने मना कर दिया। तभी उस बहू की पड़ोसन वहा आई और बोली की मुझे भी अपने साथ ले चलो। उसने कहा आ जाओ।

क्‍योकि वही एकमात्र महिला थी जिसने उस बहू के साथ-साथ पूरे कार्तिक के महीने कथा सुनी थी। इसके बाद दोनो विमान में बैठकर स्‍वर्ग जाने लगी तभी उस बहू के मन में अभिमान आया कि मैनें तो कार्तिक के महीने में प्रतिरोज जल्‍दी उठकर स्‍नान आदि करके व्रत किया है। और मेरी इस पड़ोसन ने केवल कहानी सुनी है तो इसे मेरे कारण ही स्‍वर्ग लोक जानेे को मिल रहा है।

सेठ की बहू के मन में यह विचार देखते ही भवगान ने उसे विमान से नीचे फेंक दिया। तब उस औरत ने भगवान जी से पूछा की हे प्रभु आखिर मेरा अपराध क्‍या जिसके कारण आपने मुझे इस विमान से नीचे फेंक दिया। उस बहू की बात सुनकर भगवान ने कहा की तुझे बहुत ज्‍यादा अभिमान हो गया जिस कारण मैंने तुझे वा‍पस धरती पर भेज दिया। भगवान की बात सुनकर बहू भगवान के पैरो में गिरकर क्षमा याचना करने लगी।

बार-बार प्रार्थना करने पर भगवान को उस पर दया आई और कहा की यदि तुम अगले तीन वर्षा तक पूरे विधि-विधान व विधिवत रूप से तारा भोजन का व्रत रखोगी। तो तुम्‍हे पुन: स्‍वर्ग लोक की प्राप्ति होगी। यह कहकर भगवान अंतर्ध्‍यान हो गऐ जिसके बाद वह विमान भी उड कर स्‍वर्ग लोक की ओर चला गया।

दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपाके तारा भोजन व्रत Tara Bhojan Vrat के बारे में विधिवत रूप से बताया है। यदि हमारे द्वारा प्रदान की गई जानकारी पसदं आई हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। और यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कंमट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद दोस्‍तो

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