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Teja Dashmi Kab Hai ~वीर तेजाजी का जीवन परिचय हिंदी में पढ़े

Veer Teja ji Biography in Hindi | Teja Dashmi | Teja ji ki Biography Read in Hindi | वीर तेजाजी का जीवन परिचय यहा से पढ़े । वीर तेजाजी । तेजा दशमी । Veer Teja ji Biography

दोस्‍तो आप सभी जानते होगे की प्रतिवर्ष भाद्रपद महीने की शुक्‍लपक्ष की दशमी को वीर तेजाजी के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस बार तेजाजी दशमी 16 सितम्‍बर 2021 यानी गुरूवार के दिन है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की ग्रथों में ऐसा कहा गया है की वीर तेजाजी को भगवान शंकर जी का 11 वा अवतार है। जिन्‍का जन्‍म राजस्‍थान के क्षत्रिय परिवार में हुआ था। यह पर्व खासतौर पर राजस्‍थान व मध्‍यप्रदेश राज्‍यो में मनाया जाता है।

इस दिन जितने भी वीर तेजाजी के मंदिर व स्‍थान है वहा पर बहुत बड़ा मेला लगता है। और मंदिरो में वीर तेजाजी की पूरे विधि-विधानो से पूजा की जाती है। तेजाजी राजस्‍थान के सभी लोक देवताओ में से प्रथम स्‍थान पर आते है। आप में से बहुत से लोगो में मन में यह विचार आया होगा की आखिर तेजा दशमी क्‍या है, क्‍यों मनाई जाती है, इसके पीछे की कथा क्‍या है।, यह सब जानने के लिए पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

तेजाजी दशमी कब मनाते है। (Teja Dashmi kab Manate hai)

आप सभी जानकारी के लिए बाता दे की वीर तेजाजी दशमी प्रत्‍येक वर्ष अगस्‍त या सितम्‍बर में महीने में और हिंदी पंचाग के अनुसार भाद्रपद महीने की शुक्‍लपक्ष की दशमी को मनाया जाती है। और इस बार यह पर्व 25 सितम्‍बर 2023 शनिवार के दिन है। ज्‍यादातर यह पर्व राजस्‍थान, गुजरात, हरियणा, मध्‍यप्रदेश, उत्तर प्रदेश राज्‍यो में मनाया जाता है।

तेजाजी का जीवन परिचय (Veer Teja ji Biography in Hindi)

वीर तेजाजी को जन्‍म 1130 में विक्रम संवत माघ सुदी चौदस (अग्रेजी के अनुसार 29 जनवरी 1074 गुरूवार) के दिन राजस्‍थान के नागौर जिले के खरनाल गॉंव में हुआ था। इनके पिता का नाम ताह़ड देव जी जो की गॉंव के मुखिया जी थे। इनकी माता राम कंवरी जो ग्रहणी थी। तेजाजी के माता व पिता दोनो ही भगवान शंकर जी के भक्‍त थे। और नाग देवता के आशीर्वाद से इनका जन्‍म हुआ। बचपन में इनको तेजा बाबा के नाम से बोलते थे।

 Veer Teja ji Biography in Hindi

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तेजाजी का विवाह (Tejaji ka Vivah)

जब ये बड़े हुए तो इनके माता पिता ने तेजाजी का विवाह पेमल नामक राजकुमारी के साथ किया। जो झॉंझर गौत्र के पनेर गॉंव के मुखिया रायमल की बेटी थी। जिसका जन्‍म 1131 बुद्ध पूर्णिमा विक्रम सवंत में हुआ था। तेजाजी और राजकुमारी पेमल का विवाह 1074 में पूर्णिमा के दिन पुष्‍कर घाट (अजमेर) में हुआ। पेमल के मामा खाजूकाला जो तेजाजी के पिता ताहड़ देव जी से दुश्‍मनी होने के कारण वह एक-दूसरे को मारना चाहते थे।

दुश्‍मनी इतनी बढ़ गई की खाजूकाला ने ताहड़ देव जी को मारने के लिए ताहड़ देव पर हमला कर दिया किन्‍तु ताहड़ देव जी ने खाजूकाला को मौत के घाट उतार दिया। यह घटना सुनकर पेमल की माता बहुत क्रोधित हुई और वह ताहड़ देव जी के परिवार से बदला लेने के बारे सोचने लगी। Veer Teja ji Biography

तेजाजी का मौत कैसे हुई (Veer Tejaji ki maut kaise hui)

पीछे से एक दिन तेजाजी की भाभी ने उनकेा पेमल के बार में कुछ ताने सुनाऐ जिससे उनको बुरा लगा वो तुरन्‍त उठे घोड़ी ‘लीलण’ और पेमल को लेने ससुराल को चल दिए। जब वो पनेर ससुराल पहुचे तो उनकी सास गायो का दूध निकाल रही थी। घोडी को देखकर गाय ने चौक गई और पैर से पेमल की माता को लात मार दी। जिससे वह दूर जाकर गिरी। गुस्‍से में उसने कहा की इस घोडी वाले का ‘काला सॉप काटे’

जब पेमल की मॉ ने देखा तो घोडी वाला कोई और नही बल्कि उसका दामाद था। यह बात तेजाजी को बहुत बुरी लगी और वो वापस लौट गए। और रास्‍ते में पेमल उनको उनकी सहेली लाछा गुजरी के यहा मिली। पेमल ने कहा की अब रात हो गई हम सुबह जल्‍दी खरनाल के लिए निकल जाएगे। किन्‍तु उसी रात लाछा गुजरी की सभी गायो को मेर के मीणा चुरा ले गए। गाऐ छुडाने के लिए तेजाजी उनक पीछे गए।

रास्‍ते में उन्‍हे एक सॉप जलता हुआ मिला। यह देख तेजाजी ने उस सॉप को अपने बाले से जलती हुई अग्नि से बाहर दिया। जिससे सॉप बहुत क्रोधित हुआ और कहा की तुमने मुझे जोडे से बिछाड दिया क्‍योकि सॉपिन जल चुकी था। और कहा अब तो मेरा क्रोध तब शांत होगा जब मै तुम्‍हे डस लूगा। साॅप की बात सुनकर वीर तेजाजी बोले की अब मै किसी को वचन देकर आया हूॅ की गायो को सही-सलामत उसके पास पहुचाऊगा। मै वापस तुम्‍हारे पास आऊगा तुम जब डस लेना।

इसके बाद तेजाजी मेर के मीणाओ से युद्ध करके लाछा गुजरी के गायो को मुक्‍त कराया। और लाछा गुजरी को सभी गाये शौप दी। गौरक्षा के दौरान तेजाजी जी बहुत ज्‍यादा घायल हो गए। पेमल उनको अन्‍दर ले जाने के लिए आई किन्‍तु तेजाजी ने कहा की मै सॉप को डसने का वचन देकर आया हूँ। मुझे जाना होगा यहा कहकर तेजाजी सॉप के बिल के पास आ पहुचे। और कहा ‘हे नागराज अब आप मुझे डस सकते हो। Veer Teja ji Biography

किन्‍तु सॉप ने बोला की तुम्‍हारे तो पूरे शरीर पर घाव है मै तुम्‍हे कहा डसू। सॉप की बात सुनकर तेजाजी ने कहा आप मेरी जीभ पर डस लो वहा एक भी घाव नहीं है। सॉप न वीर तेजाजी को जीभ पर काटां और वो जमीन पर गिर गए। इसके बाद सॉप अपने असली रूप में आऐ वह सॉप कोई और नही बल्कि भगवान शंकर जी थ। भगवान ने कहा की मैं तुम्‍हारे इस सत्‍यवचन से प्रसन्‍न हुआ मैं तुम्‍हे वरदान देता हू आज से इस संसार मे जिस मनुष्‍य को सांप काटेगा वह तुम्‍हारे द्वारा पर ठीक हो जाएगा।

और तुम आज से इस संसार मं वीर तेजाजी के नाम से विख्‍यात होगे। तथा तुम्‍हारी सॉपो के देवता के रूप में पूजा होगी। इसके बाद वीर तेजाजी की मृत्‍यु शाद्रपद माह की शुक्‍लपक्ष के दिन 10 संवत 1160 (अग्रेजी कैलण्‍ड के अनुसार 28 अगस्‍त 1103) को हुई। जब पेमल को इस बात का पता चला की तेजाजी की मौत हो गई तो वो भी अपने पति के साथ सती हुई।

आज के समय में वीर तेजाजी (Veer Teja ji Biography)के बहुत से देवरे और स्‍थान है। जिन पर उनकी मूर्ति घोडी पर बैठे हुऐ एक हाथ में बाला लिए हुए तथा सॉप को डसते हुए है। इनके सभी स्‍थानो पर सॉप काटने वाले व्‍यक्ति का ”गुडला (सेवक) के द्वारा जहर चूसा जाता है। और इनके नाम की तांती बॉधी जाती है। तथा प्रत्‍येक वर्ष भाद्रपद शुक्‍लपक्ष की दशमी को विशाल मेला भरता है। जिसमे लाखो श्रद्धालु आते है।

महत्‍पूर्ण तथ्‍य

आपकी जानकारी के लिए बता दे की वीर तेजाजी के बुजुर्ग उदयराज जी ने खरनाल पर अपना कब्‍जा कर राजधानी बनाई। जिसके अन्‍दर पूरे 24 गॉंव आते है। और कई वर्षो तक इनके वंश का राज चला।

तेजाजी के भजन लिखित में

लीलण म्‍हारी जाइजे जाइजे, गढ़ खरनाले शहर। भाभल ने निवण देवजे।। ओ तेजाजी कैया जावा, खाली म्‍हारी पीठ, कोई सुनी म्‍हारी पीठ मावड़ली देशी ओल्‍बा।।

ओ लीलण म्‍हारी कहिजे कहिजे, साचोड समचार, नजरा तु देखी केवजो। ओ तेजाजी ऐडा काई लिखिया विधाता लेख म्‍हारा लिखिया विधाता लेख।

ओ लीलण म्‍हारी राखो राखो, मनड़ा माहि धीर कोई हिवड़ा माहि धीर, स्‍वर्गा में मिलसी जिवड़ा ओ तेजाजी था बिन, म्‍हारे जीवन को नहीं सार, म्‍हारे जीवन को नहीं सार लीलण भीा संग में चालसी।।

ओ लीलण म्‍हारी में थारो चंदो, तू म्‍हारी है चकोर म्‍हारे काल्‍जिया री कोर मानु में थाने जिव री जड़ी, ओ लीलण म्‍हारी मत ना तू तो आसुडा ढलकाय मत आसुडा ढलकाय तेजल रो कापे जिवड़ो।।

लीलण म्‍हारी जाइजे जाइजे, गढ़ खरनाले शहर कोई गढ़ खरनाले शहर भाभल ने निवण देवजे।।

दोस्‍तो आज की इस पोस्‍ट के माध्‍यम से हमने आप सभी को तेजा दशमी यानी वीर तेजाजी (Veer Teja ji Biography) के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी प्रदान की है। यदि आप सभी को हमारा यह लेख पंसद आया है तो लाईक करे व अपने मिलने वाले के पास शेयर करे। यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कमंट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद

यह भी पढ़े-

प्रश्‍न:- तेजा दशमी कब आती है।

उत्तर:- तेजा दशमी भाद्रपद महीने की शुक्‍ल पक्ष की दशमी को आती है।

प्रश्‍न:- वीर तेजाजी की मृत्‍यु कैसे हुई।

उत्तर:- वीर तेजाजी की मृतयु सॉप के काटने से हुई थी।

प्रश्‍न:- तेजाजी का जन्‍म कब व कहा हुआ।

उत्तर:- वीर तेजाजी का जन्‍म सन 1130 विक्रम संवत माघ सुदी की चौदस (अग्रेजी कैलण्‍डर के अनुसार 29 जनवरी 1074 गुरूवार) के दिन राजस्‍थान राज्‍य के नागौर जिले में खरनाल गॉव में हुआ था।

प्रश्‍न:- तेजाजी की मृत्‍यु कब हुई।

उत्तर:- वीर तेजाजी की मृत्‍यु भाद्रपद महीने की शुक्‍लपक्ष को 10 संवत 1160 (अग्रेजी कैलण्‍डर के अनुसार 28 अगस्‍त 1103) को हुई थी।

प्रश्‍न:- वीर तेजा की शादी कब व किसके साथ हुई थी।

उत्तर:- तेजाजी की शादी झॉझर गौत्र व पनेर गॉव की मुखिया रायमल की बेटी पेमल से सन 1074 अजमेर पुष्‍कर घाट पर हुई थी।

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