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World Bamboo Day 2021 | विश्‍व बांस दिवस की जानकारी यहा से पढ़े

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World Bamboo Day | विश्‍व बांस दिवस 2021 | Bamboo Day in Hindi | बासं दिवस के बारे में सॅपूर्ण जानकारी यहा से पढ़े | World Bamboo Day in Hindi | World Bamboo Day 2021 | विश्‍व बांस दिवस

दोस्‍तो विश्‍व बांस दिवस प्रती वर्ष 18 काे मनाया जाता है। इस बार भी 18 सितम्‍बर 2021 यानी शनिवार के दिन पूरे विश्‍व में मनाया जाऐगा। बांस (विश्‍व बांस दिवस) भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्‍व में होता है। इसकी कई प्रकार की किस्‍म है जो क‍ी बैंब्‍यूसा (Bambusa), डेड्रोकेलैमस (Daedrocalamus) आदि। तथा भारत में लगभग बांस के 24 वंश पाऐ जाते है। बांस दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला काष्‍ठीय पौधा है। जो एक दिन में 121 सेंटीमीटर तक बढ़ता है। वर्षा के दिनो में इस पौधे की बढ़ने की रुतार लगभग 2 मीटर हो जाती है।

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बांस तने पर से ठोस एवं अन्‍दर से खोखला होता है। एवं इसकी जड़े आस्‍थानिक एवं रेशेदार होने के कारण यह काफी लम्‍बा होता है। किन्‍तु इसकी पत्तिया सीधी एवं सरल होती है तथा इसका शीर्ष भाग बहुज नुकीला होता है। आज के समय में बांस का उपयोग बहुत ज्‍यादा किया जाता है। तो चलिए जानते है बांस के बारे में सम्‍पूर्ण जानकारी तो पोस्‍ट के अन्‍त तक बने रहे।

World Bamboo Day
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बांस का परिचय (Bamboo ka Parichay in Hindi)

आपकी जानकारी के लिए बता दे की बॉस पारिस्थितिकी का जैवक्षयी प्राकृतिक पौधा है। जो बहुत ही ज्‍यादा मजबूत होता है बांस का अंग्रेजी भाषा का नाम ‘बम्‍बू’ तथा भारतीय शब्‍द ‘मंबुया ‘बम्‍बु’ से बोलो जाता है। बांस भारत के लगभग सभी क्षेत्रो में पाया जाता है। किन्‍तु ज्‍यादा तौर पर दक्षिणी एवं उत्तरी अमेरिका, ऑस्‍टेंलिया, अमेरिका एवं दक्षिणी एशिया में होता है। परन्‍तु चीन देश में बांस की सबसे ज्‍यादा प्रजातिया पाई गयी है। विश्‍व बांस दिवस

भारत में बांस की खेती की रोपाई जून से लेकर सितम्‍बर महीने तक की जाती है। जो की चार-पांच वर्षो में जाकर तैयार होती है। याीन एक बार बांस की खेती करने के बाद 30 से लेकर 35 साल तक बांस की पैदावार होती है। इसी कारण बांस की खेती किसानो के लिए ”एटीएम” कहा गया है। इस खेती में कोई मेहनत की जरूरत नही है बस एक बार रोपन होने के बाद ये अपने आप बढ़ते जाते है।

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बांस का उपयोग (Use of Bamboo)

आपमें से बहुत कम लोग यह जानते होगे की बांस किन-किन वस्‍तुओ को बनाने में उपयोग लिया जाता है। बांस (विश्‍व बांस दिवस) का उपयोग कागज बहुत अधिक मात्रा में बनाया जाता है। सबसे ज्‍यादा चीन व भारत में बांस के कागज बनाया जाता है क्‍योकि यह प्राचीन उद्योग है। इसके लिए सबसे पहले बांस की पत्त‍ियो को छॉटरक और तने के छोटे-छोटे टुकडे करके पानी में चूने के साथ 4 से 5 महीने के लिए सड़ाया जाता है। इसके बाद इसे ओखलियों में गूधकर साफ किया जाता है। जो यह लुग्‍दी का आकार कर लेता है जिसके बाद इसमें सफेट या रंगीन रंग डालकर बडा सा चदर बना लेते है। बाद में इसकी कटीग करके कंपनीयो में भिजवा देते है।

  • इसके अलाव भी बांस को कई जगह प्रयोग किया जाता है। जब किसी जानवर के बच्‍चा होता है तो उसके पेट की सफाई के लिए बांस की पत्तियो का उबाकर उसका पानी दिया जाता है।
  • वही पर बांस से कई प्रकार के फर्नीचर बनाऐ जाता है।
  • भारते के कई इलाको में लोग बांस के घर बनाकर रहते है।
  • खेतो के चारो ओर बांस का जाल बनाया जाता है।
  • मकान बनाते समय या कोई पुल बांधते समय भी बांस का उपयोग किया जाता है।
  • बांस की टोकरीया व खेतो में काम करने के लिए बांस का उपयोग किया जाता है।
  • समुद्र में मछली पकडने के लिए, तीर, धनुष, भाले आदि बनाने के लिए बांस का प्रयोग किया जाता है।
  • इसके अलावा बांस की बांसुरी, वॉयलिन, नागा, ज्‍यूर्स हार्प,‍ गिटार आदि बनाऐ जाते है।
  • बांस की नदी या तालाब पार करने के लिए नाव भी बनाई जाती है।
  • ऐसे में बांस का बहुत ज्‍यादा उपयोग होता है।
World Bamboo Day
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भारत सरकार ने गैर वन क्षेत्रो में बांस की खेती को बढ़ावा दिया है। भारतीय वन अध्‍यादेश 2017 को घोषण की जिसमें गैर वन क्षेत्रों में उपजाऊ किए बांस के दायरे में लाए जाने से छूट मिलेगी। तथा आर्थिक उपयोग के लिए काटने, पारगमन परमिट की आवश्‍यकता से छूट प्रदान की जा सके। बांस को घास की प्रजाति बताई गई है। किन्‍तु भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत कानूनी रूप से बांस को वृक्ष का रूप दे दिया गया।

इस संशोधन के तहत किसी भी वन व गैर वन भूमि पर बाेए गए बांस को कातने या पारगमन पर भारतीय वन अधिनियम 1927 को प्रावधान लागू कर दिया। इस संशोधन के तहत किसानो को बहुत ज्‍यादा आय में बढोतरी होगी। ओर देश में हरति क्षेत्र काे बढ़ाव मिलेगा।

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लोगो को बांस उद्योग के सरंक्षण और सवर्धन के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 18 सितम्‍बर को विश्‍व बांस दिवस (World Bamboo Day) के रूप में मनाया जाता है। इसकी घोषण वर्ष 2009 में बैकांक में हुआ आयोजन में वर्ल्‍ड बम्‍बू काग्रेस (World Bamboo Congress) ने किया था। जिसके बाद भारत में विश्‍व बांस दिवस के रूप में झांरखण्‍ड राज्‍य की उप राजधानी दुमका में प्रतीवर्ष 18 सितम्‍बर व 19 सितम्‍बर को राष्‍ट्रीय बांस कारीगर मेला का विशेष आयोजन होता है।

यह आयोजन लघु एवं कुटीर उद्योग विकास बोर्ड एवं उद्योग विभाग किया जाता है। इस मेले में बांग्‍लादेश, भूटान, नेपाल, नार्वे, अफगानिस्‍तान, एवं यूनाइटेड़ अरब अमीरात (यूएई) आदि देश शामिल होते है। 18 सितम्‍बर शनिवार के दिन वर्ल्‍ड बैम्‍बू दिवस (World Bamboo Day) के रूप में मनाया जाता है।

World Bamboo Day
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दोस्‍तो आज के इस लेख में हमने आपको विश्‍व बांस दिवस के बारे में जानकारी प्रदान की है। यदि आप सभी को हमारे द्वारा बताई हुई जानकारी पसंद आयी हो तो लाईक करे व अपने मिलने वालो के पास शेयर करे। यदि आपके मन में किसी प्रकार का प्रश्‍न है तो कंमट करके जरूर पूछे। धन्‍यवाद


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