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Gangaur Festival In 2021 | गणगौर त्‍यौहार पूजा कैसे करे | गणगौर का त्‍यौहार क्‍यों मनाते है

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दोस्‍तो आप सभी जानते है कि भारत में तरह-तरह के त्‍यौहार मनाए जाते है शायद ही कोई महिना ऐसा निकलता है जिसमे किसी त्‍यौहार को नही मनाया जाता है ऐसे में आपको बता दे कि जल्‍द ही गणगौर का त्‍यौहार आने वाला है। और आप सभी इस खास त्‍यौहार का इतंजार कर रहें होगें। इस त्‍यौहार को हमारे यहा बड़ी ही धुम-धाम से हर वर्ष मनाया जाता है। किन्‍तु कई बार आपके मन में यह प्रश्‍न आता होगा कि आखिर गणगौर का त्‍यौहार (Gangaur Festival / Gangaur Ka Tayohar) क्‍यों मनाते है और इसके पीछे क्‍या वजह है। तो आज हम आपको अपने इस आर्टिकल के माध्‍यम से इस अनोखे त्‍यौहार के बारे में विस्‍तार से बताएगे। इसलिए आपसे निवेदन है कि इस पोस्‍ट को अन्‍त तक जरूर पढ़े।

क्‍यो मनाया जाता है गणगौर का त्‍यौहार?

हमारे देश में कई त्‍यौहार ऐसे होते है जो कि किसी विशेष क्षेत्र में ही मनाए जाते है जैसे गणगौर का त्‍यौहार वैसे तो भारत के कई राज्‍यो में मनाया जाता है लेकिन राजस्‍थान राज्‍य में इस गणगौर के त्‍यौहार (Gangaur Festival) को बड़ी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। इस तरह Gangaur Festival का त्‍यौहार राजस्‍थान राज्‍य का सबसे बड़ा त्‍यौहार है। इस त्‍यौहार के दिन कुवांरी एवं विवाहित महिलाए भगवान शिवजी एवं माता पार्वती के लिए गणगौर पूजा करते है।

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ऐसी मान्‍यता है कि माता पार्वती जी ने भगवान शिवजी को अपने वर रूप में पाने के लिए बहुत ही कठिन तपस्‍या की। तब जाकर भगवान शिवजी उनकी इस तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर पार्वती जी के सामने प्रकट हुऐ। और माता पार्वती जी से कहा की मैं तुम्‍हारी इस तपस्‍या से प्रसन्‍न हॅू। मागो क्‍या वरदान मागती हो।

माता पार्वती ने भगवान शिव से वरदान के रूप में खुद शिवजी को अपने पति के रूप में मागां। भगवान शिव ने उनकी इच्‍छा को पूरी करने के लिए माता पार्वती जी से विवाह कर लिया और दोना पति-पत्‍नी बन गऐ। और माता को अखण्‍ड़ सौभागयवती होने का आशीर्वाद दिया। तब से लेकर आज तक महिलाऐ अच्‍छा पति पाने के लिए गणगौर का त्‍यौहार मनाते है एवं इस त्‍यौहार पर महिलाए व्रत रखती है एंव शिवजी (ईसर जी) एवं पार्वत (गौरी) का पूजन करती है।

इस दिन मनाते है गणगौर का त्‍यौहार

दाेस्‍तो, अगर बात करे कि गणगौर का त्‍यौहार कब मनाया जाता है तो आपको बता दे कि Gangaur Ka Festival चैत्र कृष्‍ण माह से लेकर चैत्र शुक्‍ल तृतीया तक मनाया जाता है अर्थात् यह त्‍यौहार होली के त्‍यौहार के दूसरे दिन से लेकर आने वाले 16 दिनों तक इस त्‍यौहार को बड़े हर्ष-उल्‍लास के साथ मनाया जाता है।

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अगर बात करे कि इस वर्ष यानि कि 2021 में यह त्‍यौहार किस दिन मनाया जाएगा तो बता दे आने वाले 15 अप्रैल को इस त्‍यौहार को हमारे देश में मनाया जाएगा। इस त्‍यौहार को सोलह दिनों तक इसलिए मनाया जाता है क्‍योकिं 16 दिन सोलह माताओं जैसे गौरी, उमा, प़द्यमा, पार्वती, दुर्गा, काली, महाकाली आद‍ि का प्रतीक होता है। आइये अब जानते है कि गणगौर के त्‍यौहार के पूजन की विधि क्‍या है।

Gangaur Festival पूजा की विधि

इस पर्व में प्रथम दिन होली दहन की राख से 16 पिडिया बनाकर उनकी लगातार सोलाह दिन तक पूजा की जाती है। और साथ में कुमकुम, मेहदीं, व मावड़ की 16-16 बिन्‍दी लगाकर व रोली से छोटा सा मन्दिर बनाकर उसकी पुजा की जा‍ती है। इस व्रत को कुवारी लड़किया अच्‍छा पति पाने के उद्देश्‍य से रखती है जबकि शादीशुदा एवं नवविवाहित महिलाए अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए गणगौर का व्रत रखती है।

इस त्‍यौहार पर सभी महिलाए प्रात:काल जल्‍दी उठकर स्‍नान करती है। फिर पीतल के लौटो या घडि़यो मे किसी कुऐ, तालाब व नलकूप से पानी भरकर,‍ उनमें हरी दुब डालकर सिर के उपर रखकर गणगौर के गीत गाती हुयी आती है। फिर सभी महिलाए इसी तरह से 16 दिनों तक Gangaur Mata का पूजन करती है जिसके बाद लास्‍ट वाले दिन गणगौर का किसी तालाब या नदी में विर्सजन किया जाता है।

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गणगौर व्रत कथा | Gangaur Vrat Katha

एक समय की बात है एक दिन माता पार्वती और भगवान शिवजी तीनो लोक घूमनें के लिए नारदजी के साथ गऐ। वे तीनो चलते चलते चैत्र शुक्‍ला तृतीया को एक गॉंव में आ पहुचे। उनका आने का सामाचार पाकर उस गॉंव की सभी औरते खुश हुई। और सभी जाति की स्त्रिया उनके स्‍वागत के लिए स्‍वादिष्‍ट भोजन बनाने लगी। किन्‍तु उन्‍हे भोजन बनाने में बहुत देर हो गई ।

महिलाओ को सुहाग का वरदान

ऐसे में गॉव की जो नीचे कुल की स्त्रिया थी वो सभी अपनी-अपनी थालियों में साधारण भोजन ड़ालकर ले आई एवं मॉ पार्वती, शिवजी एवं नारदजी को तिलक लगाकर फूलो से स्‍वागत किया। माता पार्वती उनकी इस पूजा एवं भक्ति भाव को देखकर सुहाग का सारा रस उन पर छिड़क दिया। इस तरह नीचे कुल की सभी महिलाओ को सदा सुहागन का वरदान मिला एवं वे वापस लौट गई।

इसके बाद उच्‍च कुल की स्त्रिया अपने सोने-चॉंदी की थालीयो में अच्‍छे-अच्‍छे पकवान सजाकर शिवजी और माता पार्वती जी की पूजा करने पहुची। यह सब देखकर भगवान शिवजी ने माता पार्वती से कहा की तुमने सारा सुहाग रस तो नीचे कुल की स्‍त्रीयो को दे दिया। तो अब इन्‍हे क्‍या दोगी।

यह सुनकर पार्वती जी ने भगवान से कहा की आप चिन्‍ता ना करे मैं नीचे कुल की स्‍त्रीयों को उपरी पदार्थो से बना रस छिड़का है। इसलिए उनका सुहाग रस हमेंशा बना रहेगा। किन्‍तु इन उच्‍च कुल की औरतो को मैं अगुंली चीरकर अपने रक्‍त का सुहाग रस दूगीं। यह रस जिसके भाग्‍य में पड़ेगा वह औरत मेरी तरह सौभाग्‍यवती हो जाएगी। और माता पार्वती ने सुहाग रस छिड़का, जिस पर जैसा रस पड़ा उसको वैसा ही सुहाग मिला।

माता पार्वती जी की लीला

उसके बाद वो तीनो आगे बढ़े और एक नदी के किनारे जा पहुचे। उस नदी में माता पार्वती ने स्‍नान किया एवं स्‍नान करने के बाद बालू मिट्टी से भगवान शिव की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा की एवं भोग चढ़ाया। माता को यह सब करने में बहुत ही समय लग गया। ऐसे में जब भगवान शिवजी ने माता से देरी होने का कारण पूछा तो माता ने झूट बोलते हुए कहा कि मेरी भाभी मुझे दूध-भात खिलाने लग गई जिसकी वजह से मै देर हो गई।

यह सुनकर भगवान का मन भी दूध-भात खाने के लिए किया और वो भी नदी की तरफ चल दिऐ। इस तरह माता पार्वती जी झूठ बोलकर बडी दुविधा में फस गई। और मन ही मन में भगवान भोलेनाथ का चिन्‍तन किया। हे प्रभु मै तो आपकी चरणो की दासी हॅू मैने जो आप से झूठ बोला है उसकी लाज रखे।

यह कहती हुई माता भगवान के पीछे पीछे चली गई। जब शकंरजी वहा पर पहुचे उनके साला-सालायली और सास सुसर वही पर थे। उन सभी ने भगवान भोलेनाथ का स्‍वागत किया और वो दोना दो दिनो तक वही पर ठहरे। तीसरे दिन माता ने शिवजी से चलने को कहा तो शिवजी ने कहा कि अभी और रूक जाते है किन्‍तु पार्वती जी नही मानी। और वो तीनो वहा से चल दिऐ।

रास्‍ते में संध्‍या के समय भगवान शिवजी ने पार्वती जी से कहा की मैं तूम्‍हारे मायके में अपनी माला भूल आया। माता ने कहा मैं वापिस लेकर आती हॅू। परन्‍तु शिवजी ने मना कर दिया और नारदजी को वह माला लेने के लिए भेज दिया। माला लेने के लिए नारद जी उस स्‍थान पर पहुचे तो उन्‍हे कोई भी नजर नही आया। और वो सोचने लगे की मै गलत जगह आ गया।

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जब आकाश में बिजली चमकी तो उन्‍हे एक पेड़ पर शिवजी की माला टँगी दिखाई दी। नारद जी उस माला को उतारकर वापिस शिवजी के पास पहुचें। और वहा का पूरा वृतांत सुनाया। भगवान शिवजी हॅसते हुऐ नारदजी से कहा की ये सब पार्वती की लीला थी। माता ने नारद जी से कहा की मैं किस योग्‍य हॅू।

नारदजी ने हाथं जोड़कर कहा माता आप तो इस संसार में सभी पतिव्रता नारियो में सर्वश्रेष्‍ठ है। आप तो पूरे जगत की आदि शक्ति है यह सब चमत्‍कार आपके पतिव्रत प्रभाव से ही हुआ है। माता इस पूरे संसार में स्त्रिया आपके नाम व पूजा से सौभाग्‍य प्राप्‍त कर लेती है। मैं आपकी यह लीला देखकर धन्‍य हो गया। यह सुनकर माता पार्वती जी ने कहा हे नारद इस पूरे संसार में कोई महिला मेरा Gangaur Festival या व्रत और पूजा कथा करेगी उसकी सभी मंगलकामनाऐ पूरी होगी।

Durga Navratri Vrat Katha In Hindi | श्री दुर्गा नवरात्रि व्रत कथा

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